नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक विवाद को लेकर संसद में जारी गतिरोध के बीच केंद्र सरकार ने चर्चा कराने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच X पर विपक्ष को एक खुली चुनौती देते हुए कहा कि सरकार संसद के भीतर हर विषय पर बहस कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों का वास्तविक उद्देश्य मुद्दों पर गंभीर चर्चा करना नहीं, बल्कि केवल हंगामा खड़ा करना और सदन की कार्यवाही में बाधा डालना है।
संसद में गतिरोध और नीट मुद्दे पर सरकार का रुख
संसद का सत्र शुरू होने के बाद से ही नीट परीक्षा से जुड़ी शिकायतों पर तत्काल चर्चा कराने की मांग को लेकर लगातार हंगामा देखने को मिल रहा है। इस विवाद पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और उन्होंने पेपर लीक को घोर पाप करार दिया था। इसके बावजूद संसद में गतिरोध बना हुआ है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे. पी. नड्डा और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने स्पष्ट किया कि सरकार देश के विद्यार्थियों के साथ मजबूती से खड़ी है और हर प्रश्न का उत्तर देने के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष चर्चा से भागकर केवल राजनीति कर रहा है।
अमित शाह की 24 घंटे की निरंतर चर्चा की चुनौती
गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए विपक्षी सांसदों को सीधी चुनौती दी। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष सचमुच छात्रों के हितों और नीट परीक्षा पर बात करने के लिए गंभीर है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत लोकसभा अध्यक्ष के पास चर्चा का औपचारिक पत्र सौंपना चाहिए। शाह ने प्रस्ताव रखा कि पत्र मिलने के बाद आज दोपहर 3 बजे से लेकर कल दोपहर 3 बजे तक लगातार 24 घंटे संसद में चर्चा कराई जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि वे स्वयं सदन में उपस्थित रहकर विपक्ष के एक-एक प्रश्न का विस्तृत उत्तर देंगे। गृह मंत्री ने जोड़ा कि इस खुली बहस के बाद देश की जनता स्वयं तय करेगी कि कौन चर्चा करने के लिए आगे आया और कौन जिम्मेदारी से भाग रहा है।
विपक्ष की शर्तें और राजनीतिक खींचतान
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने दोहराया कि गृह मंत्री संसद में वक्तव्य देने के लिए तैयार हैं, किंतु कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने चर्चा में शामिल होने के लिए नई शर्तें सामने रख दी हैं। विपक्ष की प्रमुख मांगों में प्रधानमंत्री द्वारा संसद के पटल पर माफी मांगे जाने की शर्त भी शामिल है। वहीं, संसद भवन के बाहर सीजेपी संगठन और छात्र समूहों द्वारा लगातार विरोध-प्रदर्शन किए जा रहे हैं। इस गतिरोध को दूर करने के उद्देश्य से लोकसभा अध्यक्ष ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ बैठक कर विभिन्न विकल्पों पर विचार-विमर्श किया है।
जनता की प्रतिक्रिया
गृह मंत्री अमित शाह के इस वक्तव्य के बाद सोशल मीडिया पर नागरिकों और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की विविध प्रतिक्रियाएं सामने आईं। जहां कई लोगों ने सरकार के इस रुख का समर्थन करते हुए बिना व्यवधान के चर्चा कराने का सुझाव दिया, वहीं अन्य लोगों ने प्रदर्शनकारी छात्रों की चिंताओं और अब तक संसद का समय प्रभावित होने पर सवाल उठाते हुए जल्द समाधान की उम्मीद जताई।



























