इराक में लंबे समय से तैनात अमेरिकी सैन्य बलों की पूर्ण वापसी का ऐलान सामने आया है। डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक मंच पर साझा किया कि गठबंधन सेनाएं और उनके सैन्य उपकरण इरबिल एयर बेस से व्यवस्थित तरीके से निकल रहे हैं। इसके साथ ही दो दशकों से अधिक समय से चला आ रहा वह सैन्य अभियान समाप्त होने की दिशा में बढ़ गया है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2003 में जॉर्ज डब्ल्यू बुश के राष्ट्रपति काल में हुई थी। बाद में वर्ष 2014 में बराक हुसैन ओबामा के प्रशासन और फिर जो बाइडन के कार्यकाल के दौरान आगे बढ़े ऑपरेशन इनहेरेंट रिज़ॉल्व का यह अंतिम चरण माना जा रहा है।
ऑपरेशन इनहेरेंट रिज़ॉल्व और इराक से वापसी की घोषणा
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2026 में उनके नेतृत्व में इस पूरे मिशन का समापन हो रहा है। उन्होंने इस क्षण को अमेरिका और इराक दोनों के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया। उनके अनुसार, जिस प्राथमिक लक्ष्य को लेकर सेना आगे बढ़ी थी, उसमें इस्लामिक स्टेट यानी आईएसआईएस का खात्मा प्रमुख था। ट्रंप ने रेखांकित किया कि उनके पहले कार्यकाल के दौरान इस आतंकी संगठन के प्रभाव को पूरी तरह कुचल दिया गया था। अब जबकि खिलाफत का वजूद खत्म हो चुका है, तो वहां किसी भी अस्थायी सैन्य मौजूदगी को स्थायी रूप देने का कोई औचित्य नहीं बचता था।
इरबिल एयर बेस से निकासी और अफगानिस्तान से तुलना
इस सैन्य वापसी की रूपरेखा को समझाते हुए ट्रंप ने इरबिल एयर बेस से सेना और साजो-सामान की व्यवस्थित रवानगी पर जोर दिया। उन्होंने इसकी तुलना पूर्व में अफगानिस्तान से हुई अफरातफरी भरी वापसी से की, जहां भारी मात्रा में आधुनिक हथियार पीछे छूट गए थे और 13 अमेरिकी सैनिकों की जान गई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे। ट्रंप ने कहा कि इराक में सैनिकों या सैन्य संसाधनों को यूं ही लावारिस नहीं छोड़ा गया है, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से महंगे अभियान को अब समेटा गया है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनके पास वहां रुकने या लौटने का विकल्प था, लेकिन उन्होंने घर वापसी के फैसले को चुना।
इराक के नए नेतृत्व पर भरोसा
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान ट्रंप ने इराक के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री अली अल-जैदी की भूमिका को भी अहम माना। उन्होंने बताया कि वह शुरुआत से ही अली अल-जैदी का समर्थन कर रहे थे। एक अप्रत्याशित चुनावी मुकाबले में जब जीत की उम्मीदें कम आंकी जा रही थीं, तब अल-जैदी ने प्रचंड बहुमत से जीत दर्ज की थी। ट्रंप ने विश्वास जताया कि नए प्रधानमंत्री बेहद सक्षम हैं और देश की बागडोर तथा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती से संभालने में पूरी तरह समर्थ साबित होंगे।



























