डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को आर्थिक राहत और जब्त संपत्तियां वापस लौटाने की पेशकश से जुड़े दावों का कड़ा खंडन किया है। हालिया चर्चाओं में यह बात सामने आई थी कि वाशिंगटन ने ठोस परमाणु रियायतों के बदले तेहरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, ट्रंप ने इन सभी बातों को आधारहीन बताते हुए स्पष्ट किया कि ऐसी कोई भी पेशकश नहीं की गई है।
परमाणु समझौते और आर्थिक राहत से जुड़ा विवाद
विवाद की शुरुआत उन खबरों के बाद हुई जिनमें कहा गया था कि ट्रंप प्रशासन ने ईरान के समक्ष एक नई शर्त रखी है। इस प्रस्ताव के तहत यदि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर ठोस रियायतें देने को तैयार होता है, तो बदले में उसे आर्थिक पाबंदियों से छूट और रोकी गई वित्तीय संपत्तियों तक पहुंच दी जा सकती है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच इस संभावित कदम को एक बड़े कूटनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा था।
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर क्या कहा
इन खबरों के सामने आते ही डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक मंच पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा,
यह पूरी तरह असत्य है। मैंने उन्हें कुछ भी नहीं दिया!ट्रंप ने इन दावों को पूरी तरह फर्जी करार देते हुए तुरंत वापस लेने की मांग की। उनका कहना था कि प्रशासन ने ईरान के समक्ष कोई भी नरम रुख नहीं अपनाया है और न ही किसी तरह की आर्थिक रियायत की बात हुई है।
वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ता कूटनीतिक तनाव
ईरान के साथ बातचीत को लेकर पिछले कुछ महीनों से परिस्थितियां लगातार जटिल बनी हुई हैं। इससे पहले भी शांति प्रस्तावों और वार्ता के प्रयासों के दौरान कई तरह की कूटनीतिक अड़चनें सामने आई थीं। पूर्व में पाकिस्तानी मध्यस्थता के जरिए होने वाली चर्चाओं को रद्द करने के साथ-साथ यह भी साफ किया गया था कि ठोस परमाणु समझौते के बिना नाकेबंदी और कड़े प्रतिबंधों में कोई ढील नहीं दी जाएगी। ट्रंप के हालिया बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका ईरान पर अपनी सख्त नीति को बरकरार रखने के पक्ष में है।































