डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर एक तीखी पोस्ट डालकर अमेरिकी सीनेट के एक हालिया वोट पर जमकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि ईरान दबाव में आकर लगभग हर बात मानने को तैयार था, लेकिन सीनेट में हुए वॉर पावर्स एक्ट वोट ने उनकी पूरी रणनीति को झटका दे दिया।
ट्रंप ने दावा किया कि दशकों बाद पहली बार ईरान अमेरिका और उसके राष्ट्रपति का खुलकर सम्मान कर रहा था, और ठीक उसी समय सीनेट ने ऐसा कदम उठाया जिसे उन्होंने गलत वक्त पर लिया गया और बेमतलब बताया।
पोस्ट में ट्रंप ने क्या कहा
अपनी पोस्ट में ट्रंप ने लिखा कि इस वोट के जरिए दुनिया के सबसे बड़े आतंक प्रायोजक को यह संदेश चला गया कि अमेरिका को उसके खिलाफ उठाए जा रहे कदम पसंद नहीं हैं और उसे रुकना चाहिए। उनके मुताबिक इससे असल में दुश्मन को मदद और राहत पहुंची है।
तो, मेरे पास ईरान पूरी तरह घुटनों पर है, हारने के लिए तैयार है, हमें लगभग हर चीज देने को राजी है, और दशकों में पहली बार अमेरिका और उसके राष्ट्रपति यानी मेरा, तथा अमेरिकी सीनेट का जमकर सम्मान कर रहा है, और तभी अमेरिकी सीनेट गलत वक्त पर और बेमतलब का वॉर पावर्स एक्ट वोट कराने का फैसला करती है, जो दुनिया के नंबर एक आतंक प्रायोजक को बता रही है कि अमेरिका को वह पसंद नहीं जो मैं उनके साथ कर रहा हूं, और मुझे रुकना होगा, और ऐसा करके उसने दुश्मन को मदद और राहत पहुंचाई है। चार रिपब्लिकन हारे हुए लोगों ने डेमोक्रेट्स के साथ वोट दिया, और ईरान ने मेरे लोगों से पूछा, इस सबका क्या मतलब है? इन सीनेटरों ने अभी-अभी मेरा काम और मुश्किल कर दिया है, लेकिन मैं इसे पूरा करूंगा, किसी न किसी तरह, क्योंकि मैं हमेशा काम पूरा करता हूं! राष्ट्रपति DJT
चार रिपब्लिकन सीनेटरों पर निशाना
ट्रंप ने अपनी ही पार्टी के चार सीनेटरों को आड़े हाथों लिया, जिन्होंने डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर वोट किया। उन्होंने इन सीनेटरों के लिए सख्त शब्दों का इस्तेमाल किया। ट्रंप का कहना है कि इस फैसले से ईरान के मन में भ्रम पैदा हो गया और उसने उनके लोगों से पूछा कि आखिर इस वोट का मतलब क्या है।
इसके बावजूद ट्रंप ने भरोसा जताया कि वह अपना मकसद हासिल करके रहेंगे। उन्होंने दो टूक कहा कि भले ही सीनेटरों ने उनका काम कठिन बना दिया हो, लेकिन वह इसे किसी भी हाल में पूरा करेंगे, क्योंकि वह हमेशा काम पूरा करते हैं।
पृष्ठभूमि
खबरों के मुताबिक ईरान को लेकर अमेरिका की रणनीति पर लगातार चर्चा हो रही है, और कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप को अपनी शर्तें मनवाने के लिए जरूरी नहीं कि कोई औपचारिक समझौता ही करना पड़े। वहीं, ईरान से जुड़े तनाव के बीच सुरक्षा विशेषज्ञ कारोबारी और संस्थागत स्तर पर साइबर सुरक्षा के खतरों को लेकर भी आगाह कर रहे हैं, और इसे कंपनियों के नेतृत्व के लिए ध्यान देने योग्य अहम विषय बता रहे हैं।





















