संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रशासन ने लुप्तप्राय प्रजाति अधिनियम के तहत लागू नियमों के दायरे को सीमित करने का फैसला किया है। अधिकारियों का मानना है कि पुराने कड़े नियमों की वजह से देश के आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की गति धीमी हो रही थी। इस नीतिगत बदलाव का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ औद्योगिक गतिविधियों और निर्माण कार्यों को बढ़ावा देना है।
नियामक दबाव और आर्थिक विकास पर असर
डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर एक संदेश जारी कर पिछले पर्यावरणीय नियमों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि गैर-निर्वाचित अधिकारियों के फैसलों ने इस वन्यजीव कानून के मूल उद्देश्य को काफी हद तक प्रभावित किया था। ट्रंप के अनुसार, इन कड़े प्रतिबंधों की वजह से देश में प्राकृतिक तेल, गैस और इमारती लकड़ी के उत्पादन में रुकावटें आ रही थीं। इसके अलावा, छोटे जीवों के संरक्षण के नाम पर ज़मीन को प्रतिबंधित घोषित कर दिए जाने से नए रिहायशी मकानों और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का निर्माण रुक गया था, तथा सैन्य बलों के प्रशिक्षण अभ्यासों पर भी असर पड़ रहा था।
कानूनी आधार और वैश्विक जलवायु बहस
नए नीतिगत ढांचे को न्यायमूर्ति एंटोनिन स्कालिया द्वारा दिए गए पुराने कानूनी फैसलों और व्याख्याओं के अनुरूप तैयार किया गया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि कानून को उसके मूल स्वरूप में वापस लाने से देश में जिम्मेदारी के साथ पर्यावरण सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी और निर्माण गतिविधियों को फिर से नई रफ्तार मिलेगी। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक प्राथमिकताओं के संतुलन को लेकर चर्चा जारी है।


























