मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में केन-बेतवा लिंक परियोजना के कारण विस्थापित हो रहे आदिवासियों और स्थानीय किसानों का विरोध प्रदर्शन एक बार फिर अत्यंत उग्र हो गया है। छतरपुर और पन्ना जिले की सीमाओं पर अपनी पुश्तैनी जमीनों और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे ग्रामीणों के समर्थन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी सामने आए हैं। उन्होंने जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा के लिए जारी इस आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए बेघर हो रहे लोगों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है और स्पष्ट किया है कि वे इस न्याय की लड़ाई में आदिवासियों के साथ खड़े हैं।
विस्थापन के विरोध में नदी में 'मिट्टी सत्याग्रह' और 'चिता आंदोलन'
केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के अंतर्गत कई गांवों के जलमग्न होने और बड़ी संख्या में परिवारों के बेघर होने का खतरा पैदा हो गया है। बरसात के समय में अपनी जमीनों से बेदखल किए जाने के खिलाफ प्रभावित आदिवासियों और किसानों ने अद्वितीय और कठोर तरीकों से अपना विरोध दर्ज कराना शुरू किया है। पन्ना और छतरपुर की सीमा पर विरोध प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने 'चिता आंदोलन' की शुरुआत की, जिसमें प्रदर्शनकारी प्रतीकात्मक रूप से लकड़ी की चिताओं पर लेटकर अपना विरोध जता रहे हैं। इसके साथ ही सैकड़ों ग्रामीणों ने नदी के बहते पानी में उतरकर 'मिट्टी सत्याग्रह' भी किया, ताकि प्रशासन का ध्यान उनकी जल, जंगल और जमीन की रक्षा की मांग की ओर आकर्षित किया जा सके।
भूख हड़ताल और पुलिस कार्रवाई से बढ़ा प्रशासनिक तनाव
प्रोजेक्ट के खिलाफ चल रहा यह प्रदर्शन दिनों-दिन गंभीर होता जा रहा है। बेदखली की कार्रवाई रोकने की मांग को लेकर कई आंदोलनकारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए, जिससे कई लोगों का स्वास्थ्य बिगड़ गया। भूख हड़ताल पर बैठे आंदोलनकारी अमित की तबीयत ज्यादा खराब होने के बाद उन्हें तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध करानी पड़ी। वहीं दूसरी तरफ, पुलिस और प्रशासन द्वारा धरना स्थल से प्रदर्शनकारियों को जबरन हटाए जाने की कोशिशों के बाद माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया। इस कार्रवाई के विरोध में पन्ना में पुलिस अधीक्षक कार्यालय के समक्ष भी भारी प्रदर्शन किया गया, जहां ग्रामीणों ने बिना उचित मुआवजे और पारदर्शी पुनर्वास के जमीनों के अधिग्रहण पर कड़ा ऐतराज जताया।
राहुल गांधी ने सरकार पर साधा निशाना
इस पूरे मामले पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर बुंदेलखंड के विस्थापित आदिवासियों का दर्द साझा किया। राहुल गांधी ने कहा कि अपने बुनियादी अधिकारों के लिए सालों से अन्याय सह रहे ये नागरिक सम्मान और सहयोग के हकदार हैं। उन्होंने कहा कि वे और कांग्रेस पार्टी आदिवासियों के अधिकारों की इस लड़ाई में उनके साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि शांतिपूर्ण सत्याग्रह और सच की आवाज से घबराने के बजाय सरकार को बेघर हो रहे लोगों की आपबीती सुननी चाहिए और उन्हें न्याय दिलाना चाहिए।
विकास का उद्देश्य और पर्यावरण व सामाजिक लागत का टकराव
केन-बेतवा लिंक परियोजना को बुंदेलखंड के सूखाग्रस्त इलाकों में सिंचाई सुविधाएं बढ़ाने और पीने के पानी का संकट दूर करने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना के रूप में पेश किया गया है। हालांकि, इस परियोजना के कारण पन्ना टाइगर रिजर्व के बड़े भूभाग, कृषि भूमि और प्राकृतिक जंगलों के डूब क्षेत्र में आने से पर्यावरण और स्थानीय आबादी पर गहरा असर पड़ रहा है। स्थानीय आदिवासियों का कहना है कि पीढ़ियों से जल, जंगल और जमीन पर उनका जीवन निर्भर रहा है, इसलिए विकास की आड़ में मूल निवासियों को आजीविका और घर से वंचित करना न्यायसंगत नहीं है।
जनता की प्रतिक्रिया
इस पूरे घटनाक्रम पर आम जनता और सामाजिक संगठनों की मिली-जुला रुख देखने को मिल रहा है। कई नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं और पर्यावरणविदों ने आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन के अधिकार तथा मानवीय पुनर्वास की मांग का पुरजोर समर्थन किया है, वहीं कुछ लोगों का मानना है कि बुंदेलखंड के जल संकट को हमेशा के लिए समाप्त करने के लिए परियोजना का पर्यावरण-अनुकूल और संतुलित समाधान निकाला जाना आवश्यक है।



























