उत्तर प्रदेश के गाज़ीपुर रेलवे स्टेशन परिसर में अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत कराई गई पेंटिंग और सौंदर्य कार्य देखरेख के अभाव में उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं। स्टेशन की बाहरी दीवारों को खूबसूरत बनाने के लिए दूर-दराज़ से कलाकारों को बुलाकर राष्ट्रनायकों के चित्र उकेरे गए थे। हालांकि, उचित प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था न होने के कारण यह पूरा स्थान अब गंदगी और अव्यवस्था का केंद्र बनता जा रहा है, जिससे यात्रियों और स्थानीय नागरिकों को भारी शर्मिंदगी उठानी पड़ रही है।
महान विभूतियों के चित्रों के सामने शर्मनाक स्थिति
स्टेशन की मुख्य दीवारों पर पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस और संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर जैसी महान हस्तियों के भव्य चित्र बनाए गए थे। शुरुआत में इस पहल की सर्वत्र प्रशंसा हुई थी और इससे स्टेशन का आकर्षण भी काफी बढ़ गया था। किंतु वर्तमान में स्थिति यह है कि इन्हीं चित्रों के ठीक सामने लोग बेझिझक खुले में शौच और मूत्रत्याग कर रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महज आधे घंटे की अवधि के भीतर लगभग 10 लोग इन कलाकृतियों के समक्ष खुले में शौच करते देखे गए। जब वहां मौजूद लोगों का ध्यान इस हरकत की ओर गया या कैमरे की नजर पड़ी, तो लोग वहां से भागने लगे।
पास में शौचालय उपलब्ध होने के बाद भी नियमों की अवहेलना
स्टेशन परिसर के ठीक पास में ही सार्वजनिक शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, लेकिन इसके बावजूद लोग स्वच्छता नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। स्टेशन के बाहर वाहन चलाने वाले मुन्ना सिंह (उर्फ मोच्छू) ने इस स्थिति पर कड़ा रोष व्यक्त किया। उनका कहना है कि जब से ये आकृतियां तैयार की गई हैं, तब से असामाजिक तत्वों ने इस जगह को एक तरह से मूत्रालय में तब्दील कर दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब नागरिक स्वयं अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, तो प्रशासन अकेले क्या कर सकता है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि रेलवे प्रशासन यात्रियों से यात्रा का पूरा किराया वसूल करता है, ऐसे में राष्ट्रनायकों की छवियों का अनादर करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि इस पूरे कलाकृति क्षेत्र के चारों ओर लोहे की रेलिंग या पक्की बाउंड्री वॉल बनाई जाए ताकि इस स्थान की गरिमा बनी रहे।
प्रेरणास्थल बनने के बजाय बढ़ा जिले का अनादर
स्थानीय समाजसेवी दीपक उपाध्याय ने भी इस दुर्दशा पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि सरकार ने लाखों रुपये की लागत से इन कलाकृतियों का निर्माण इसलिए कराया था ताकि स्टेशन पर आने वाले युवा इन महान विभूतियों के जीवन से प्रेरणा ले सकें और यह स्थान एक आकर्षक सेल्फी पॉइंट के रूप में विकसित हो सके। लेकिन उचित देखभाल और सुरक्षा की कमी के चलते कुछ असामाजिक तत्वों की वजह से पूरे गाज़ीपुर जिले की छवि पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। उन्होंने रेलवे अधिकारियों से तुरंत इस स्थान की घेराबंदी कराने और खुले में शौच करने वालों पर भारी जुर्माना लगाने की मांग की है, जिससे इस ऐतिहासिक स्थल की पवित्रता कायम रखी जा सके।


















