शशि थरूर ने सोशल मीडिया मंच X पर महाराष्ट्र सरकार द्वारा टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए सुधारात्मक मराठी भाषा कक्षाओं के आदेश और फिर उसके स्थगन पर अपने विचार साझा किए हैं। उन्होंने एक पोस्ट साझा करते हुए इस भाषाई नियम की अनिवार्यता और इसे लागू करने में हुए विलंब पर ध्यान केंद्रित किया।
मराठी कक्षाओं का आदेश और फैसला टलना
महाराष्ट्र राज्य में सार्वजनिक परिवहन सेवा देने वाले कैब चालकों और ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा की कक्षाएं अनिवार्य करने का नियम सामने आया था। हालांकि, बाद में इस फैसले के क्रियान्वयन को स्थगित कर दिया गया। इस पूरे मामले को लेकर शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर लिखा, "जैसे ही महाराष्ट्र अपने कैब और ऑटो चालकों के लिए सुधारात्मक मराठी कक्षाओं का आदेश देता है, मैं इस आवश्यकता (और इसके स्थगन) पर विचार करता हूं।" उन्होंने एक वेब लिंक भी साझा किया, जिसमें इस नीतिगत फैसले की बारीकियों को दर्शाया गया था।
भाषाई नीति और प्रशासनिक कदम
इस कदम के माध्यम से क्षेत्रीय भाषा को बढ़ावा देने और स्थानीय यात्रियों के साथ बेहतर संचार स्थापित करने का उद्देश्य रखा गया था। परंतु, निर्णय के लागू होने और फिर तुरंत टल जाने के कारण प्रशासनिक फैसलों की प्रक्रिया पर चर्चा शुरू हो गई है। जनसेवा से जुड़े चालकों के लिए भाषा प्रशिक्षण की व्यावहारिकता और इसके समयबद्ध क्रियान्वयन को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण व्यक्त किए जा रहे हैं।
जनता की प्रतिक्रिया
शशि थरूर की इस पोस्ट पर आम जनता और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं ने विविध विचार प्रकट किए। कई लोगों का मानना था कि राजनीतिक दल केवल क्षेत्रीय वोट बैंक साधने के लिए भाषा का मुद्दा उठाते हैं। कुछ उपयोगकर्ताओं ने राय दी कि भाषा की अनिवार्यता के स्थान पर नागरिक सुविधाओं, गुटखा पर प्रतिबंध और सार्वजनिक स्थानों पर थूकने जैसी समस्याओं पर सख्त कानून लागू किए जाने चाहिए। वहीं, कुछ लोगों ने अन्य राज्यों में जारी भाषा नीतियों का उदाहरण देते हुए इस पर अलग-अलग राय साझा की।

























