महान क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी खुदीराम बोस के बलिदान दिवस के अवसर पर देश भर में उन्हें याद किया गया और श्रद्धांजलि अर्पित की गई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले इस युवा अमर शहीद के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया। महज 18 वर्ष की आयु में हाथ में श्रीमद्भगवद्गीता लेकर हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूमने वाले खुदीराम बोस की शहादत आज भी हर भारतीय के दिल में राष्ट्रभक्ति की अलख जगाती है।
कौन थे खुदीराम बोस
खुदीराम बोस का जन्म 3 दिसंबर 1889 को हुआ था और वे भारतीय स्वाधीनता संग्राम के सबसे कम उम्र के प्रमुख क्रांतिकारियों में गिने जाते हैं। किशोरावस्था में ही वे ब्रिटिश साम्राज्य के अत्याचारों और औपनिवेशिक शासन के खिलाफ आजादी के आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल हो गए थे। मुजफ्फरपुर में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ उनके साहसिक कदम ने ब्रिटिश प्रशासन की नींव हिला दी थी। इसके बाद गिरफ्तार किए जाने पर मुजफ्फरपुर जेल में 11 अगस्त 1908 को उन्हें फांसी की सजा दी गई। इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि फांसी के समय उनके चेहरे पर मृत्यु का कोई भय नहीं था, बल्कि वे अत्यंत प्रसन्न मुद्रा में हाथ में पवित्र गीता थामे और जुबां पर वंदे मातरम का नारा लिए सूली पर चढ़ गए थे।
रक्षा मंत्री ने अर्पित की नम्र श्रद्धांजलि
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विशेष संदेश साझा करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस महान स्वाधीनता सेनानी के अमर योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि भारत माता को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए खुदीराम बोस ने अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान दिया था। उनका अदम्य साहस, निस्वार्थ राष्ट्र सेवा और अटूट देशभक्ति भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में हमेशा स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगी। राजनाथ सिंह ने यह भी रेखांकित किया कि शहीद खुदीराम बोस का चरित्र और उनका बलिदान आने वाली हर पीढ़ी के लिए प्रेरणा का एक ऊर्जावान स्रोत बना रहेगा।
जनता की प्रतिक्रिया
रक्षा मंत्री के इस संदेश के सामने आते ही सोशल मीडिया पर देश के नागरिकों ने भी शहीद खुदीराम बोस को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। आम लोगों ने उनके पराक्रम और अद्वितीय राष्ट्रप्रेम को नमन करते हुए कहा कि इतनी कम उम्र में देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों का जीवन भारतीय युवाओं को हमेशा राष्ट्र सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता रहेगा।



























