सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अमित शाह ने ड्रग्स के खिलाफ देश की लड़ाई का पूरा खाका सार्वजनिक किया। उन्होंने अपनी पोस्ट में बताया कि यह रणनीति चार मज़बूत स्तंभों पर टिकी है, जो मिलकर नशे की समस्या से हर मोर्चे पर निपटने का काम करेंगे।
चार प्रमुख स्तंभ
पहला स्तंभ है प्रवर्तन, खुफिया और अभियान। इसके तहत ड्रग तस्करों पर कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई को और अधिक संगठित, त्वरित और असरदार बनाया जाएगा। नशे के नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने के लिए खुफिया तंत्र और अभियानों को आपस में बेहतर तालमेल के साथ चलाया जाएगा।
दूसरा स्तंभ है प्रीकर्सर और सिंथेटिक ड्रग नियंत्रण। नशीले पदार्थ आज सिर्फ पारंपरिक रूट से नहीं, बल्कि प्रयोगशालाओं में रासायनिक पदार्थों की मदद से बनाए जाने वाले कृत्रिम ड्रग्स के रूप में भी तेज़ी से फैल रहे हैं। इन पर लगाम लगाने के लिए उनकी सप्लाई चेन और कच्चे माल पर नियंत्रण रखना इस रणनीति का अहम हिस्सा है।
तीसरा स्तंभ है मांग में कमी और पुनर्वास। सिर्फ ड्रग्स की सप्लाई रोकने से समस्या हल नहीं होती। जो लोग पहले से नशे की गिरफ्त में हैं, उनके लिए इलाज और पुनर्वास की व्यवस्था करना उतना ही ज़रूरी है। यह स्तंभ इस लड़ाई के मानवीय पहलू को सबसे आगे रखता है।
चौथा स्तंभ है क्षमता निर्माण और समन्वय। ड्रग्स से लड़ाई किसी एक एजेंसी के बस की बात नहीं है। केंद्र और राज्य की तमाम एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और उनकी संस्थागत क्षमता को मज़बूत करना इस पूरे अभियान की नींव बनेगा।
पृष्ठभूमि
खबरों के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में अमित शाह ने नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की दसवीं शीर्ष स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इसी अवसर पर 'ड्रग नियंत्रण पर विज़न डॉक्यूमेंट (2026-2029)' भी सार्वजनिक किया गया, जो आगामी तीन वर्षों के लिए देश की नशा-रोधी नीति की दिशा तय करता है।
जनता की प्रतिक्रिया
इस पोस्ट पर लोगों की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही। कई लोगों ने इसे नशामुक्त भारत की दिशा में एक ठोस और स्वागत योग्य कदम बताते हुए भरपूर समर्थन दिया, जबकि कुछ ने यह सवाल उठाया कि एक तरफ शराब की बिक्री को सरकारी लाइसेंस देना और दूसरी तरफ नशे के खिलाफ मुहिम चलाना एक विरोधाभासी रवैया है।





















