भारत की पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की पुण्यतिथि के अवसर पर 6 अगस्त को देशभर में उन्हें याद कर भावपूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित की गई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विशेष संदेश साझा करते हुए उन्हें एक ओजस्वी वक्ता तथा सौम्यता और सादगी की प्रतिमूर्ति के रूप में स्मरण किया। उन्होंने देश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में उनके अतुलनीय योगदान की सराहना की।
अमित शाह ने किया सुषमा स्वराज के योगदान को याद
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संदेश में सुषमा स्वराज के संगठनात्मक और शासकीय कार्यों की विस्तार से प्रशंसा की। उन्होंने उल्लेख किया कि सुषमा स्वराज ने अपने कठोर अनुशासन, अद्वितीय कर्मठता और निरंतर संघर्षशीलता के बल पर पार्टी संगठन से लेकर सरकार तक में मिले हर दायित्व का अत्यंत उत्कृष्ट ढंग से निर्वहन किया। अमित शाह ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि उन्होंने विदेश मंत्रालय की कार्यप्रणाली को सीधे भारत के आम नागरिकों से जोड़ने का एक ऐतिहासिक कार्य किया, जिससे विदेश नीति का प्रभाव आम जनमानस तक पहुंचा।
बेटी बांसुरी स्वराज और नेताओं की भावुक श्रद्धांजलि
इस स्मृति दिवस के अवसर पर सुषमा स्वराज की बेटी और लोकसभा सांसद बांसुरी स्वराज ने भी अपनी मां को याद करते हुए एक अत्यंत भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने अपनी मां के प्रति अपनी गहरी व्यक्तिगत संवेदना व्यक्त करते हुए उनके मार्गदर्शन को याद किया। इसके साथ ही देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों, वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी पूर्व विदेश मंत्री के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पूर्व में उन्हें एक असाधारण, मेधावी और उत्कृष्ट मंत्री के रूप में स्मरण करते हुए भारतीय लोकतंत्र में उनके योगदान की सराहना की थी।
कौन थीं सुषमा स्वराज
सुषमा स्वराज भारतीय राजनीति की एक अत्यंत प्रतिष्ठित और प्रभावशाली महिला नेता थीं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के संगठन में कई प्रमुख दायित्व संभाले और वह राष्ट्रीय राजनीतिक दल की पहली महिला प्रवक्ता बनीं। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक सफर में संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर अपनी गहरी छाप छोड़ी। वर्ष 1998 में उन्होंने दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री के रूप में प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद केंद्र सरकार में सूचना एवं प्रसारण, स्वास्थ्य और संसदीय कार्य जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाला।
वर्ष 2009 के लोकसभा चुनावों के लिए उन्हें भारतीय जनता पार्टी की 19 सदस्यीय चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाया गया था। इसी वर्ष 2009 में वह भारत की 15वीं लोकसभा में प्रतिपक्ष की नेता चुनी गईं, जहां उन्होंने अपनी तीखी तर्कशक्ति और उत्कृष्ट भाषण कला से देश का ध्यान आकर्षित किया। इसके पश्चात वर्ष 2014 से 2019 तक उन्होंने भारत की विदेश मंत्री के रूप में ऐतिहासिक कार्य किया। विदेश में संकट में फंसे भारतीयों की सोशल मीडिया के माध्यम से त्वरित सहायता करने की उनकी मानवीय कार्यशैली के कारण उन्हें अपार लोकप्रियता हासिल हुई और वे 'सुपरमाम ऑफ इंडिया' के रूप में प्रसिद्ध हुईं। सार्वजनिक जीवन में उनके उत्कृष्ट योगदान के सम्मान स्वरूप उन्हें मरणोपरांत देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से अलंकृत किया गया।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर आम नागरिकों ने सुषमा स्वराज के चित्र, संस्मरण और उनके ऐतिहासिक भाषणों के वीडियो साझा कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। लोगों ने एक कुशल कूटनीतिज्ञ, प्रखर वक्ता और आम जनता के लिए सदैव सुलभ रहने वाली नेता के रूप में उनके व्यक्तित्व को नमन किया।


























