राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश के हथकरघा क्षेत्र की सराहना करते हुए सभी बुनकरों और कारीगरों को शुभकामनाएं दी हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक विस्तृत संदेश साझा करते हुए उन्होंने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को संजोने में स्थानीय बुनकरों के योगदान की प्रशंसा की। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की हथकरघा परंपरा न केवल हमारी सांस्कृतिक विविधता और कलात्मक कौशल का प्रतीक है, बल्कि इसका भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से भी ऐतिहासिक और भावनात्मक जुड़ाव रहा है।
हथकरघा क्षेत्र और स्वतंत्रता संग्राम का ऐतिहासिक संबंध
प्रत्येक वर्ष 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस विशेष तिथि का चयन भारत के इतिहास के एक महत्वपूर्ण मोड़ को याद करने के लिए किया गया था। 7 अगस्त 1905 को कोलकाता के टाउन हॉल में स्वदेशी आंदोलन की औपचारिक शुरुआत हुई थी, जिसने देशवासियों को विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार कर स्वदेशी हथकरघा वस्त्रों को अपनाने के लिए प्रेरित किया था। अमित शाह ने अपने संदेश में इसी गौरवशाली विरासत का स्मरण कराते हुए कहा कि हथकरघा क्षेत्र ने देश की पहचान को गढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और यह आज भी भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक रीढ़ बना हुआ है।
संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकारी पहल
हथकरघा बुनाई की प्राचीन कला को विलुप्त होने से बचाने और इसे आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुसार नया आयाम देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2015 में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाने की घोषणा की थी। केंद्र सरकार लगातार 'वोकल फॉर लोकल' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियानों के माध्यम से बुनकरों और हस्तशिल्पियों के कल्याण के लिए काम कर रही है। इन योजनाओं के तहत बुनकरों को वित्तीय सहायता, आधुनिक करघे, बेहतर धागे और प्रत्यक्ष बाजार पहुंच उपलब्ध कराई जा रही है ताकि उनकी आजीविका में सुधार हो सके और पारंपरिक कौशल सुरक्षित रहे।
सोशल मीडिया अभियान और जीआरडब्ल्यूएम ट्रेंड
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के मौके पर आम नागरिकों से लेकर हस्तियों तक सभी से स्वदेशी हथकरघा उत्पादों को अपनाने की अपील की गई है। सरकार और प्रतिनिधियों ने लोगों को अपने पसंदीदा हथकरघा परिधानों में तस्वीरें और रचनात्मक वीडियो साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया। विशेष रूप से युवाओं के बीच लोकप्रिय 'गेट रेडी विद मी' (GRWM) प्रारूप में वीडियो बनाकर भारतीय हथकरघा की विविधता और रॉयल्टी को प्रदर्शित करने का ट्रेंड तेजी से चला है, जिससे स्वदेशी फैशन को नई ऊर्जा मिल रही है।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर गृह मंत्री अमित शाह के संदेश के बाद आम जनता ने व्यापक समर्थन व्यक्त किया है। उपयोगकर्ताओं ने मशीनी वस्त्रों के स्थान पर हाथ से बुने देसी कपड़ों को पहनने पर गर्व महसूस करने की बात कही और स्थानीय बुनकर परिवारों की कड़ी मेहनत को सलाम करते हुए स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।


























