विश्व शेर दिवस के अवसर पर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की इटावा लायन सफारी की स्थिति को लेकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए आरोप लगाया कि उनकी सरकार के दौरान स्थापित किए गए इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की मौजूदा शासन में उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने पर्यावरणविदों और वन्यजीव प्रेमियों से इस केंद्र को बचाने के लिए आगे आने का आह्वान किया।
इटावा लायन सफारी पर अखिलेश यादव की अपील
अखिलेश यादव ने विश्व शेर दिवस की शुभकामनाएं देते हुए लिखा कि इटावा में विकसित की गई लायन सफारी राज्य का पहला शेर प्रजनन केंद्र है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान भारतीय जनता पार्टी की सरकार के कुशासन के कारण यह केंद्र बदहाली का शिकार हो रहा है। सपा नेता ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण के हित में इस सफारी को बर्बाद होने से बचाना बेहद जरूरी है। उन्होंने जनता और विशेषज्ञों से इस केंद्र के समर्थन में एकजुट होने की अपील की।
इटावा लायन सफारी की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
इटावा लायन सफारी और प्रजनन केंद्र को उत्तर प्रदेश में एशियाई शेरों के संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान इस परियोजना की नींव रखी गई थी ताकि गुजरात के गिर जंगलों से बाहर शेरों को एक नया और सुरक्षित प्राकृतिक आवास मिल सके। शुरुआत में इस केंद्र में शेरों को बीमारियों और स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद कड़े चिकित्सा प्रोटोकॉल और विशेषज्ञों की निगरानी में सुधार के कदम उठाए गए थे। इस परियोजना को राज्य में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक प्रमुख कदम माना गया था।
शेर संरक्षण की राष्ट्रीय स्थिति और राजनीतिक खींचतान
भारत में एशियाई शेरों का संरक्षण एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर शेरों की आबादी में बढ़ोतरी दर्ज की गई है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी विश्व शेर दिवस के अवसरों पर देश में शेरों के बढ़ते कुनबे की सराहना कर चुके हैं। हालांकि, उत्तर प्रदेश में इस परियोजना के श्रेय और प्रबंधन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी चलती रही है। एक तरफ जहां समाजवादी पार्टी इसे अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धि बताती है, वहीं सत्ता पक्ष इस केंद्र के सुचारू संचालन और चिकित्सीय व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम का दावा करता है।
जनता की प्रतिक्रिया
अखिलेश यादव के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इटावा सफारी में शेरों के बेहतर प्रबंधन और देखभाल की मांग का समर्थन किया, जबकि अन्य उपयोगकर्ताओं का कहना था कि राजनीतिक बयानबाजी के बजाय सफारी के दीर्घकालिक विकास और वन्यजीवों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।



























