डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से एक ऐसा पोस्ट किया है जो अमेरिका में घरों की बढ़ती कीमतों और आव्रजन नीति को लेकर छिड़ी बहस को फिर हवा दे सकता है। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के एक वर्किंग पेपर में यह बात सामने आई है कि बाइडेन के दौर में आई अवैध प्रवासियों की लहर ने देश में घरों के दाम 30 प्रतिशत तक बढ़ा दिए।
ट्रंप ने पोस्ट में क्या लिखा
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने हैंडल @realDonaldTrump से ट्रुथ सोशल पर सीधा दावा किया कि फेडरल रिजर्व के एक वर्किंग पेपर से यह पता चलता है कि बाइडेन के कार्यकाल में आए अवैध प्रवासियों की लहर की वजह से घरों की कीमतें 30 प्रतिशत तक बढ़ गईं। पोस्ट में ट्रंप ने सीधे तौर पर आव्रजन को घरों की कीमतों में उछाल का कारण बताया और इसे बाइडेन प्रशासन की नीतियों से जोड़ा।
फेड की रिसर्च में क्या निकलकर आया
खबरों के मुताबिक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अर्थशास्त्रियों की एक स्टडी में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि बाइडेन के कार्यकाल के दौरान अवैध प्रवासियों की बड़ी संख्या में आमद ने अमेरिका में किराए और घरों की कीमतों को ऊपर धकेला। इस स्टडी के मुताबिक अचानक बढ़ी आबादी की वजह से मकानों और किराए के मकानों की मांग तेजी से बढ़ी, जबकि आपूर्ति उस रफ्तार से नहीं बढ़ पाई, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा।
ब्याज दरों और अर्थव्यवस्था से जुड़ा एंगल
यह मामला अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर चल रही बहस से भी जुड़ता है। सितंबर 2024 में वॉशिंगटन डीसी के इकोनॉमिक क्लब में दिए एक भाषण में जो बाइडेन ने फेडरल रिजर्व की ब्याज दर में कटौती की तारीफ की थी। वहीं अगस्त 2025 में फेडरल रिजर्व प्रमुख जेरोम पॉवेल ने संकेत दिया था कि ट्रंप की नीतियों से अर्थव्यवस्था में जो हलचल मची है, उसे देखते हुए फेड जल्द ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। यानी घरों की कीमतें, आव्रजन और ब्याज दरें, ये तीनों मुद्दे अमेरिका की आर्थिक बहस में एक-दूसरे से उलझे हुए हैं।
यह मुद्दा अहम क्यों है
अमेरिका में घरों की कीमतें और किराया आम लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंताओं में से एक रहे हैं। अगर फेडरल रिजर्व की स्टडी वाकई यह दिखाती है कि आव्रजन का घरों की कीमतों पर 30 प्रतिशत तक असर पड़ा, तो यह आंकड़ा आव्रजन नीति को लेकर चल रही राजनीतिक बहस में एक बड़ा हथियार बन सकता है। डोनाल्ड ट्रंप के इस पोस्ट के बाद यह तय है कि आने वाले दिनों में आव्रजन, घरों की कीमतें और फेडरल रिजर्व की नीतियां एक बार फिर राजनीतिक और आर्थिक चर्चा के केंद्र में रहेंगी।


















