लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक तीखा पोस्ट साझा करते हुए केंद्र सरकार और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण ढंग से अपने भविष्य के बारे में सवाल पूछने वाले विद्यार्थियों के खिलाफ बेरहमी से बल प्रयोग किया गया। उनके अनुसार प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया और कीलों वाली लाठियों तथा आंसू गैस के गोलों का खुलकर प्रयोग किया गया, जिससे कई युवा गंभीर रूप से घायल हो गए।
युवाओं और महिलाओं पर बर्बरता के आरोप
अपने बयान में राहुल गांधी ने दावा किया कि इस झड़प के दौरान युवा महिलाओं को भी पुलिसकर्मियों द्वारा बुरी तरह पीटा गया और कई को उनके निजी अंगों पर गंभीर चोटें आईं। इसके अलावा नाबालिग बच्चों की हड्डियां तक टूट जाने की बात कही गई है। उनका कहना था कि सरकार अपनी नीतियों और नाकामियों पर सवाल उठाने वाले युवाओं को बातचीत के जरिए जवाब देने के बजाय इस प्रकार की हिंसक और दमनकारी कार्रवाई से चुप कराने का प्रयास कर रही है।
संसद के पास हुई घटना पर तीखी प्रतिक्रिया
यह पूरा घटनाक्रम संसद भवन से महज कुछ ही दूरी पर सामने आया, जहां छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इस स्थिति पर कड़ा रोष व्यक्त करते हुए राहुल गांधी ने मांग की कि गृह मंत्री अमित शाह को इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। उनका तर्क है कि सुरक्षा बल सीधे तौर पर गृह मंत्रालय के अधीन आते हैं, इसलिए इस प्रकार की अमानवीय हिंसा के लिए शीर्ष नेतृत्व ही जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर इस तीखे हमले के बाद जनता और विभिन्न राजनीतिक समर्थकों के बीच तीखी बहस छिड़ गई, जहां कुछ लोगों ने इस बयान का पुरजोर समर्थन किया तो वहीं अन्य उपयोगकर्ताओं ने अन्य राज्यों के मुद्दों पर भी सवाल उठाए।



























