इलाहाबाद विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि और सीटों की कटौती को लेकर छात्रों का प्रदर्शन बेहद उग्र हो चुका है। प्रशासनिक सख्ती और पुलिस बल प्रयोग के बाद परिसर में भारी तनाव की स्थिति बनी हुई है। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है, वहीं छात्र संगठनों ने विरोध में सड़क जाम कर अपना आक्रोश व्यक्त किया है।
छात्र आंदोलन और पुलिस झड़प का पूरा घटनाक्रम
विश्वविद्यालय में फीस पुनर्गठन और सीट कटौती को लेकर छात्रों का असंतोष काफी समय से उबल रहा था। 14 जुलाई 2026 को छात्र समूहों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। मांगें पूरी न होने पर 28 जुलाई 2026 से छात्रों ने अनिश्चितकालीन धरना और प्रदर्शन शुरू कर दिया।
मामले ने तब तूल पकड़ा जब 31 जुलाई 2026 को विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए हंगामा और तोड़फोड़ के आरोप में चार छात्रों को निलंबित कर दिया और उनके परिसर में प्रवेश पर रोक लगा दी। इसके बावजूद आंदोलन थमा नहीं। 4 अगस्त 2026 को धरने पर बैठे छात्रों को हटाने के लिए पुलिस और सुरक्षाकर्मियों ने बल प्रयोग किया, जिसमें कई छात्र और छात्राएं चोटिल हुए। इसके विरोध में 5 अगस्त 2026 को उग्र छात्रों ने विश्वविद्यालय गेट के सामने मुख्य मार्ग पर चक्का जाम कर दिया। पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ FIR भी दर्ज की है।
राहुल गांधी ने सरकार और प्रशासन पर साधा निशाना
विश्वविद्यालय परिसर में हुए लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई पर विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि छात्र अपने बेहतर शैक्षणिक भविष्य के लिए आवाज उठा रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याएं सुनने के बजाय प्रशासन उन पर मुकदमे लाद रहा है।
प्रशासनिक कार्रवाई पर चिंता व्यक्त करते हुए राहुल गांधी ने कहा, "मोदी सरकार की नीति ही युवाओं की आवाज़ दबाना है।" उन्होंने आरोप लगाया कि जब छात्र सवाल पूछते हैं तो उन पर लाठियां चलाई जाती हैं, विरोध दर्ज कराने पर पुलिस केस दर्ज किए जाते हैं और अपनी आवाज उठाने पर पेलेट गन का सामना करना पड़ता है।
'पूर्व का ऑक्सफोर्ड' इलाहाबाद विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
इलाहाबाद विश्वविद्यालय भारत का एक प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक केंद्रीय विश्वविद्यालय है। इसकी स्थापना 1887 में सर एल्फ्रेड लायर की प्रेरणा से हुई थी। आधुनिक भारत के सबसे पुराने उच्च शिक्षण संस्थानों में शामिल होने के कारण इसे ऐतिहासिक रूप से 'पूर्व का ऑक्सफोर्ड' कहा जाता है।
इस ऐतिहासिक संस्थान के मुख्य परिसर की भव्य वास्तुकला का खाका प्रसिद्ध अंग्रेज वास्तुविद इमरसन ने तैयार किया था। अपनी समृद्ध शैक्षणिक परंपरा के लिए जाने जाने वाले इस संस्थान में हालिया फीस वृद्धि और प्रशासनिक विवादों ने छात्र अधिकारों और सस्ती शिक्षा की सुलभता पर बड़ी बहस छेड़ दी है।
जनता और सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के इस घटनाक्रम और उस पर आई राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस छिड़ गई है। बड़ी संख्या में लोगों ने छात्रों का समर्थन करते हुए शिक्षा के बढ़ते व्यापारीकरण और पुलिस कार्रवाई की आलोचना की, जबकि कुछ उपयोगकर्ताओं ने शांतिपूर्ण समाधान और कानून व्यवस्था बनाए रखने की वकालत की।



























