उत्तर प्रदेश में रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर महिलाओं के लिए घोषित मुफ्त बस यात्रा योजना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राज्य की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि त्यौहार पर बहनों को मुफ्त यात्रा का तोहफा देने के बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन जमीनी हकीकत में सड़कों से बसें ही नदारद कर दी गईं, जिससे महिला यात्रियों को आवाजाही के दौरान काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
रक्षाबंधन पर मुफ्त यात्रा की घोषणा और जमीनी स्थिति
रक्षाबंधन के पावन पर्व को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में महिलाओं और बेटियों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था का ऐलान किया था। प्रशासनिक आदेशों के अनुसार, 27 से 29 अगस्त 2026 तक महिलाओं के लिए उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी गई थी। मुख्यमंत्री ने आम लोगों से बहनों और बेटियों के सम्मान तथा सुरक्षा का संकल्प लेने की अपील भी की थी। हालांकि, पर्व के दौरान राज्य के कई शहरों और ग्रामीण इलाकों में बस अड्डों पर भारी भीड़ देखी गई और पर्याप्त संख्या में बसें उपलब्ध न होने के कारण यात्रियों में असंतोष की स्थिति बनी।
अखिलेश यादव का राजनीतिक हमला और बयान
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने आधिकारिक एक्स खाते से पोस्ट साझा करते हुए सरकार के दावों पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने लिखा कि रक्षाबंधन के पावन मौके पर मुफ्त बस सेवा का वादा तो किया गया, लेकिन वादे के बाद बसें ही हटवा दी गईं। उन्होंने तंज कसते हुए महिला यात्रियों की स्थिति को बेबस बताया। इसके साथ ही अखिलेश यादव ने प्राचीन नैतिक मूल्यों का संदर्भ देते हुए कहा कि जो लोग अपनी बात पर टिके रहने की परंपरा की दुहाई देते हैं, वे आम नागरिकों से किए गए वचनों को निभाने में विफल साबित हो रहे हैं। उनके इस बयान ने राज्य में परिवहन सेवाओं की तैयारियों पर बहस छेड़ दी है।
परिवहन व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों पर उठे सवाल
त्यौहार के मौसम में हर साल यात्रियों की संख्या में काफी इजाफा होता है। इस वर्ष मुफ्त बस सेवा की घोषणा के बाद बस अड्डों पर महिलाओं और उनके परिवारों की खासी भीड़ उमड़ी। विपक्षी नेताओं का तर्क है कि इस तरह की बड़ी कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा से पहले बस बेड़े की क्षमता और रूट प्रबंधन का उचित आकलन किया जाना चाहिए था। पर्याप्त अतिरिक्त बसों का प्रबंध न होने से महिला यात्रियों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा, जिससे त्यौहार के दौरान उनकी यात्रा प्रभावित हुई।
जनता की प्रतिक्रिया
इस राजनीतिक बहस के बीच आम जनता और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं की ओर से भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ यात्रियों ने त्यौहार के दौरान बस अड्डों पर अव्यवस्था और लंबी कतारों की शिकायत की, वहीं दूसरी ओर कई लोगों ने सरकार द्वारा सुरक्षा और मुफ्त यात्रा की पहल का समर्थन किया।



























