विश्व संस्कृत दिवस और श्रावण पूर्णिमा के पावन अवसर पर नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विशेष संदेश साझा किया है। उन्होंने प्राचीन भाषा संस्कृत के चिरंतन महत्व, उसकी सांस्कृतिक समृद्धि और भारतीय चिंतन परंपरा पर पड़े उसके गहरे प्रभाव को रेखांकित किया। इस अवसर पर नरेंद्र मोदी ने संपूर्ण संदेश संस्कृत भाषा में ही लिखा और देशवासियों को इस विशिष्ट दिन की बधाई देते हुए भाषा के ऐतिहासिक व वर्तमान योगदान को याद किया।
भारत के ज्ञान और रचनात्मकता की संवाहिका
नरेंद्र मोदी ने अपनी पोस्ट के माध्यम से कहा कि श्रावण पूर्णिमा का यह विशेष दिन संस्कृत की अटूट और समृद्ध परंपरा का उत्सव मनाने का अवसर है। उन्होंने संस्कृत को भारत की ज्ञान परंपरा, वैचारिक दर्शन और रचनात्मक अभिव्यक्ति की निरंतर संवाहिका करार दिया। उनके अनुसार, इस प्राचीन भाषा ने सदियों से भारत की बौद्धिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान को संजोकर रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
अपने संदेश में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संस्कृत का सकारात्मक प्रभाव केवल अतीत तक सीमित नहीं है, बल्कि आज भी ज्ञान-विज्ञान और कला के अनेक क्षेत्रों में इसका प्रभाव प्रत्यक्ष रूप से देखा जा सकता है। इस विशिष्ट अवसर पर उन्होंने भाषा की उपयोगिता और उसके कालजयी स्वरूप को नमन करते हुए लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का संदेश दिया।
जनता की प्रतिक्रिया और सोशल मीडिया पर समर्थन
नरेंद्र मोदी की इस पोस्ट पर सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने उत्साहजनक प्रतिक्रियाएं व्यक्त कीं। कई उपयोगकर्ताओं ने संस्कृत भाषा के महत्व पर चर्चा करते हुए इसे भारत के स्वाभिमान और प्राचीन संस्कारों का प्राण बताया। इसके साथ ही, लोगों ने श्रावण पूर्णिमा एवं रक्षाबंधन के पावन पर्व की शुभकामनाएं दीं और देववाणी संस्कृत के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए निरंतर कार्य करने की प्रतिबद्धता जताई।



























