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रामविलास पासवान की जयंती पर अमित शाह की भावुक श्रद्धांजलि, याद किया आपातकाल का संघर्षनेता जी
5 जुल॰ 2026, 9:04 am (45 दिन पहले)· 2

रामविलास पासवान की जयंती पर अमित शाह की भावुक श्रद्धांजलि, याद किया आपातकाल का संघर्ष

गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया पर रामविलास पासवान को श्रद्धांजलि देते हुए आपातकाल के दौरान उनके संघर्ष और लोकतंत्र में योगदान को याद किया।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के जरिए दिवंगत नेता रामविलास पासवान को श्रद्धांजलि दी है। इस पोस्ट में उन्होंने रामविलास पासवान के जीवन को गरीबों और वंचितों के कल्याण के लिए समर्पित बताया और आपातकाल के दौर में उनके संघर्ष को खास तौर पर याद किया।

अमित शाह ने पोस्ट में क्या लिखा

रामविलास पासवान जी का पूरा जीवन गरीबों के कल्याण के लिए समर्पित रहा। आपातकाल के दौरान उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए लंबा संघर्ष किया तथा अनेक यातनाएं सहीं। लोकतंत्र और राष्ट्रनिर्माण में उनका योगदान सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।

अमित शाह के इस संदेश में आपातकाल के दिनों का खास तौर पर जिक्र किया गया, जब रामविलास पासवान ने नागरिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए कठिन दौर झेला था। इस पोस्ट को लोकतंत्र निर्माण में उनकी भूमिका को रेखांकित करने वाला बताया जा रहा है।

पुलिस की नौकरी छोड़कर चुनी राजनीति

रामविलास पासवान का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। खबरों के मुताबिक उन्होंने अपने पिता की इच्छा के खिलाफ जाकर एक दोस्त की सलाह पर डीएसपी की नौकरी छोड़ दी थी और पूरी तरह राजनीति में उतर आए थे। आगे चलकर वे कई बार सांसद बने और केंद्र में मंत्री पद तक पहुंचे। एक दौर ऐसा भी आया जब वे बिहार का मुख्यमंत्री बनने से बेहद करीब पहुंचकर चूक गए थे।

विरासत को लेकर चिराग और पशुपति पारस के बीच खींचतान

रामविलास पासवान के निधन के बाद उनकी राजनीतिक विरासत को लेकर परिवार में मतभेद सामने आए। खबरों के अनुसार चिराग पासवान और पशुपति पारस दोनों ही खुद को उनका असली उत्तराधिकारी बताते रहे हैं और इसे लेकर अलग-अलग रणनीतियां भी बनाई गई हैं। इसके अलावा रांची में लोक जनशक्ति पार्टी का स्थापना दिवस मनाते हुए कार्यकर्ताओं ने रामविलास पासवान के सपनों को पूरा करने का संकल्प भी लिया था।

प्रधानमंत्री मोदी की भावुक चिट्ठी और प्रतिमा का अनावरण

रामविलास पासवान की पहली पुण्यतिथि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक भावुक चिट्ठी लिखी थी, जिसके जवाब में उनके बेटे चिराग पासवान ने कहा था कि उनका आशीर्वाद हमेशा बना रहे। इसके अलावा एक कार्यक्रम में रामविलास पासवान की आदमकद प्रतिमा का भी अनावरण किया गया था, जिसमें चिराग पासवान ने कहा था कि उन्होंने अंतिम समय तक गरीबों के लिए काम किया।

जनता की प्रतिक्रिया

अमित शाह की इस श्रद्धांजलि पोस्ट पर लोगों ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी। कुछ लोगों ने रामविलास पासवान के सामाजिक न्याय और गरीबों के उत्थान के लिए किए गए कार्यों की सराहना की, वहीं कुछ यूजर्स ने इस मौके का इस्तेमाल पेट्रोल की कीमतों और अन्य सरकारी नीतियों पर सवाल उठाने के लिए भी किया।

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सवाल-जवाब

अमित शाह ने सोशल मीडिया पर क्या पोस्ट किया?
अमित शाह ने एक्स पर रामविलास पासवान को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि उनका पूरा जीवन गरीबों के कल्याण के लिए समर्पित रहा और आपातकाल में उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए संघर्ष किया।
रामविलास पासवान ने आपातकाल में क्या किया था?
आपातकाल के दौरान उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए लंबा संघर्ष किया और कई यातनाएं सहीं।
रामविलास पासवान ने डीएसपी की नौकरी क्यों छोड़ी थी?
खबरों के मुताबिक उन्होंने अपने पिता की इच्छा के खिलाफ जाकर एक दोस्त की सलाह पर डीएसपी की नौकरी छोड़कर राजनीति में कदम रखा था।
रामविलास पासवान की राजनीतिक विरासत को लेकर विवाद किसके बीच है?
उनकी राजनीतिक विरासत को लेकर बेटे चिराग पासवान और भाई पशुपति पारस के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं।
पीएम मोदी ने रामविलास पासवान को कैसे याद किया था?
उनकी पहली पुण्यतिथि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक भावुक चिट्ठी लिखी थी, जिसका जवाब चिराग पासवान ने दिया था।
क्या रामविलास पासवान बिहार के मुख्यमंत्री बने थे?
नहीं, खबरों के अनुसार वे एक मौके पर बिहार का मुख्यमंत्री बनने से बेहद करीब पहुंचकर चूक गए थे।
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