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विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर नरेंद्र मोदी ने 1947 के पीड़ितों को दी श्रद्धांजलि, सद्भावना और राष्ट्रीय एकजुटता का दिया संदेशनेता जी
14 अग॰ 2026, 8:00 am (53 मिनट पहले)· 2

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर नरेंद्र मोदी ने 1947 के पीड़ितों को दी श्रद्धांजलि, सद्भावना और राष्ट्रीय एकजुटता का दिया संदेश

14 अगस्त को आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर देश के नेतृत्व ने 1947 के बंटवारे में जान गंवाने वालों और विस्थापित हुए करोड़ों नागरिकों के साहस को नमन किया।

14 अगस्त को देश भर में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य 1947 के बंटवारे के समय घटी मानवीय त्रासदी और लाखों लोगों के बलिदान को याद करना है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 1947 की विस्थापन पीड़ा झेलने वाले सभी नागरिकों के प्रति गहरी संवेदना और नमन व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उस कठिन दौर की भीषण परिस्थितियों से निकलकर देशवासियों ने जिस साहस और सामर्थ्य का परिचय दिया, उसी के बल पर आज का मजबूत और प्रगतिशील भारत निर्मित हुआ है।

विभाजन की मानवीय विभीषिका और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

वर्ष 1947 में भारत के विभाजन के दौरान देश ने मानव इतिहास का सबसे बड़ा विस्थापन देखा था। इस दौरान हिंसा, संपत्ति के विनाश और लाखों परिवारों के उजड़ने से देश को गहरा आघात पहुंचा था। विभाजन के उस दौर में लाखों लोगों को अपनी मातृभूमि छोड़कर नए सिरे से जीवन शुरू करना पड़ा था। इतिहास के इस दर्दनाक अध्याय, घृणा के दुष्प्रभावों और राष्ट्रीय एकता के महत्व से भावी पीढ़ियों को अवगत कराने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2021 में 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस घोषित किया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश

सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म X पर अपने संदेश में नरेंद्र मोदी ने विभाजन प्रभावित परिवारों के अदम्य संकल्प की सराहना की। उन्होंने लिखा, "विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर उन सभी देशवासियों का हृदय से नमन, जिन्होंने उस वीभत्स दौर से निकलकर देश की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया।" प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि कठिन परिस्थितियों में भी दृढ़ संकल्प से सफलता हासिल की जा सकती है। उन्होंने देशवासियों से आपसी सद्भावना, भाईचारे और राष्ट्रीय एकजुटता को और मजबूत करने का आह्वान किया।

विभिन्न राज्यों में आयोजन और प्रशासनिक पहल

देश के कई राज्यों में इस दिवस के अवसर पर विशेष स्मृति कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विभाजन का दर्द भारतीय इतिहास की एक ऐसी घटना है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी विभाजन के पीड़ितों के त्याग को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। पश्चिम बंगाल में राज्यपाल ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों को 14 अगस्त को स्मृति कार्यक्रम आयोजित करने का परामर्श दिया ताकि युवा पीढ़ी इतिहास के इस सत्य से परिचित हो सके। हरियाणा के गुरुग्राम में आयोजित कार्यक्रम में हजारों लोगों की सहभागिता दर्ज की गई। दूसरी ओर, केरल सरकार ने आधिकारिक परिसरों में ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन पर असहमति व्यक्त की।

सद्भावना और भावी पीढ़ियों के लिए सीख

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस केवल अतीत के दर्द को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह समाज में विभाजनकारी ताकतों से बचने का संकल्प लेने का दिन भी है। सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि इतिहास की गलतियों और त्रासदियों से सीख लेकर ही एक समावेशी समाज का निर्माण संभव है। लाखों विस्थापित परिवारों ने शून्य से शुरुआत करके उद्योग, कृषि, जनसेवा और संस्कृति के क्षेत्रों में भारत को सशक्त बनाया है।

जनता की प्रतिक्रिया

आम जनता ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर प्रधानमंत्री के इस संदेश का स्वागत किया तथा बंटवारे की त्रासदी सहने वाले पूर्वजों को नमन किया। लोगों ने कहा कि यह दिन राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भावना को बनाए रखने की प्रेरणा देता है, वहीं कुछ नागरिकों ने प्रशासनिक मामलों से जुड़ी अपनी बातें भी साझा कीं।

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सवाल-जवाब

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कब मनाया जाता है?
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस हर साल 14 अगस्त को मनाया जाता है।
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस की शुरुआत कब और किसने की थी?
केंद्र सरकार ने वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 14 अगस्त को इस दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी।
इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य 1947 के बंटवारे में जान गंवाने वालों और विस्थापित हुए लोगों के त्याग को याद करना तथा देश में सद्भावना और एकता को बढ़ावा देना है।
विभाजन के दौरान प्रभावित लोगों के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री ने कहा कि विभाजन की विभीषिका झेलने वाले लोगों ने अपने अदम्य साहस और मेहनत से भारत की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया है।
विभिन्न राज्यों में इस अवसर पर क्या कार्यक्रम आयोजित किए गए?
उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और हरियाणा जैसे राज्यों में श्रद्धांजलि सभाएं, विश्वविद्यालयी कार्यक्रम और जन-सहभागिता समारोह आयोजित किए गए।
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