प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 अगस्त को सुबह 11 बजे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेंगे। इस ऐतिहासिक और भव्य आयोजन के दौरान वह संस्थान से डिग्री प्राप्त करने वाले 3,036 मेधावी विद्यार्थियों को संबोधित करेंगे। इसके साथ ही भारत की डिजिटल और वैज्ञानिक क्षमताओं को और सशक्त बनाने के उद्देश्य से 'परम प्रज्ञा' नामक अत्याधुनिक सुपरकंप्यूटर का औपचारिक उद्घाटन भी प्रधानमंत्री द्वारा किया जाएगा।
दीक्षांत समारोह की तैयारियां और 'परम प्रज्ञा' का महत्व
आईआईटी दिल्ली का 57वां दीक्षांत समारोह शिक्षा और तकनीकी जगत के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। इस समारोह में कुल 3,036 विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर और विद्या वाचस्पति (पीएचडी) की उपाधियां सौंपी जाएंगी। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के तहत स्थापित 'परम प्रज्ञा' सुपरकंप्यूटर का लोकार्पण है। यह उच्च क्षमता वाली सुपरकंप्यूटिंग प्रणाली शोधकर्ताओं और संकाय सदस्यों को जटिल वैज्ञानिक गणनाओं, क्वांटम कंप्यूटिंग, बायोटेक्नोलॉजी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में गहन अनुसंधान करने की सुविधा प्रदान करेगी।
सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश
दीक्षांत समारोह से ठीक एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने आधिकारिक हैंडल से एक पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा कि 8 अगस्त को सुबह 11 बजे वह आईआईटी दिल्ली के दीक्षांत समारोह में शामिल होंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह इस अग्रणी संस्थान के प्रतिभावान विद्यार्थियों और सम्मानित शिक्षकों के बीच उपस्थित होने के लिए बेहद उत्सुक हैं। अपने संदेश में उन्होंने यह भी कहा कि आईआईटी दिल्ली ने शोध, नवाचार और तकनीकी विकास के क्षेत्र में हमेशा से एक समृद्ध और अनुकरणीय योगदान दिया है।
उच्च शिक्षा, शोध और विकसित भारत का दृष्टिकोण
आईआईटी दिल्ली भारत के उन शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों में शामिल है जिन्होंने वैश्विक स्तर पर देश का मान बढ़ाया है। संस्थान के शोधकर्ताओं ने स्वास्थ्य सेवा, स्वच्छ ऊर्जा, अंतरिक्ष विज्ञान और रोबोटिक्स जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में क्रांतिकारी समाधान विकसित किए हैं। 'परम प्रज्ञा' जैसे उच्च प्रदर्शन वाले सुपरकंप्यूटर के जुड़ने से संस्थान के शोध बुनियादी ढांचे को अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी। इससे भारतीय शोधकर्ताओं को विदेशी कंप्यूटिंग संसाधनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और देश में ही स्वदेशी तकनीक से बड़े वैज्ञानिक शोध संभव हो सकेंगे, जो आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सहायक सिद्ध होगा।
जनता की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री के इस कार्यक्रम की जानकारी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर नागरिकों ने अपनी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं। एक तरफ जहां अनेक लोगों ने डिग्री हासिल करने वाले युवाओं को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं और तकनीक के क्षेत्र में देश की प्रगति की सराहना की, वहीं दूसरी ओर कुछ नागरिकों ने देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों को लेकर अपनी राय व्यक्त की।

























