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विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ चलना संभव, वैश्विक मंच पर बोले नरेंद्र मोदीनेता जी
19 सित॰ 2026, 11:27 am (18 मिनट पहले)· 0

विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ चलना संभव, वैश्विक मंच पर बोले नरेंद्र मोदी

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में नरेंद्र मोदी ने भारत के विकास मॉडल को रेखांकित करते हुए कहा कि आर्थिक तरक्की और प्रकृति की सुरक्षा एक साथ आगे बढ़ सकती हैं।

तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं के सामने औद्योगिक विस्तार के साथ प्रकृति के संतुलन को बनाए रखना हमेशा एक बड़ी चुनौती माना जाता रहा है। इसी विमर्श के बीच नरेंद्र मोदी ने एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि बुनियादी ढांचे का निर्माण और पर्यावरण संरक्षण परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि एक दूसरे के पूरक हैं। नई दिल्ली में आयोजित सम्मेलन में उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत दोनों प्राथमिकताओं को एक साथ साधने का व्यावहारिक मॉडल दुनिया के सामने पेश कर रहा है।

सतत विकास और जलवायु गतिशीलता पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन

पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता के भविष्य पर आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दुनिया भर के विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और पर्यावरणविदों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान चर्चा इस बात पर केंद्रित रही कि उभरते देश अपनी ऊर्जा जरूरतों, रोजगार सृजन और विनिर्माण लक्ष्यों को बिना पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचाए कैसे पूरा कर सकते हैं। सम्मेलन के मंच से भारतीय पहलों, जैसे सौर ऊर्जा का विस्तार, सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा और हरित गलियारों के निर्माण की समीक्षा भी की गई।

नरेंद्र मोदी का वक्तव्य

सम्मेलन में अपने संबोधन के मुख्य संदेश को साझा करते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत दुनिया को यह दिखा रहा है कि तेज विकास और पर्यावरण की स्थिरता दोनों एक साथ संभव हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि आर्थिक प्रगति हासिल करने के लिए प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन की पुरानी धारणा को अब बदलने का वक्त आ चुका है। भारत वैश्विक जलवायु वार्ताओं, ब्रिक्स मंचों और सर्कुलर इकोनॉमी की पहलों में इसी संतुलनकारी सोच को लगातार आगे बढ़ा रहा है।

वैश्विक विमर्श और घरेलू नीतियां

वैश्विक मंचों पर जहां भारत नवीकरणीय ऊर्जा, स्वच्छ मोबिलिटी और अपशिष्ट प्रबंधन के मॉडल साझा कर रहा है, वहीं राष्ट्रीय स्तर पर भी कई वैधानिक बदलावों पर चर्चा तेज रही है। देश में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, वन संरक्षण कानून, वन्यजीव संरक्षण और जल प्रदूषण रोकथाम जैसे बुनियादी नियमों के तहत औद्योगिक अनुपालन और पारिस्थितिक सुरक्षा के बीच संतुलन साधने के प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ते शहरों का टिकाऊ प्रबंधन ही आने वाले दशकों में देश के पर्यावरण का भविष्य तय करेगा।

जनता की प्रतिक्रिया

इस संबोधन के सार्वजनिक होने के बाद आम नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई लोगों ने सौर ऊर्जा विस्तार और हरित आवरण के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे विकासशील देशों के लिए प्रेरक बताया, जबकि कुछ विश्लेषकों ने पर्यावरण कानूनों में हालिया संशोधनों और औद्योगिक परियोजनाओं से जुड़े पारिस्थितिक प्रभावों पर गहन निगरानी की जरूरत जताई।

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सवाल-जवाब

नरेंद्र मोदी ने किस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया?
उन्होंने पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता के भविष्य (The Future of Environment and Climate Dynamics) पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया।
सम्मेलन में मुख्य संदेश क्या था?
मुख्य संदेश यह था कि आर्थिक विकास और पर्यावरण की स्थिरता दोनों एक दूसरे के पूरक हैं और इन्हें एक साथ आगे बढ़ाया जा सकता है।
सम्मेलन में किन प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा हुई?
इसमें नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार, सर्कुलर इकोनॉमी, स्वच्छ गतिशीलता और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने पर विस्तार से चर्चा हुई।
आम जनता की इस संबोधन पर क्या प्रतिक्रिया रही?
नागरिकों ने सौर ऊर्जा और हरित विकास की पहलों की सराहना की, जबकि कुछ विश्लेषकों ने पर्यावरण कानूनों के सख्त क्रियान्वयन पर जोर दिया।
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