खैबर पख्तूनख्वा के हंगू जिले में स्थित एक पुलिस चेकपोस्ट पर अतिवादियों ने अचानक अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। इस भीषण हमले में एक डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी) सहित सात पुलिस जवानों की मौत हो गई, जबकि 22 अन्य सुरक्षाकर्मी बुरी तरह घायल हो गए। घटना खजीना बांदा इलाके की है, जहां बड़ी संख्या में आए आधुनिक हथियारों से लैस हमलावरों ने पुलिस चौकी को घेरकर निशाना बनाया। हमला होते ही सुरक्षा बलों ने मुस्तैदी से मोर्चा संभाला और जवाबी कार्रवाई शुरू की। दोनों तरफ से हुई भारी गोलीबारी में आठ हमलावरों को मार गिराया गया। फिलहाल पूरे इलाके की घेराबंदी कर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
खजीना बांदा चौकी पर मुठभेड़ और राहत कार्य
अचानक हुए इस हमले के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घायल हुए 22 पुलिसकर्मियों को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां कई जवानों की हालत गंभीर बताई जा रही है। जिला पुलिस अधिकारी तारिक हबीब ने स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस की प्रभावी जवाबी कार्रवाई में आठ हमलावर ढेर कर दिए गए, जबकि छह अन्य हमलावर भी घायल हुए हैं। उन्होंने बताया कि मौके से भागे बाकी हमलावरों को पकड़ने और पूरे इलाके को सुरक्षित करने के लिए सुरक्षा बलों का व्यापक तलाशी अभियान लगातार जारी है। पुलिस और सुरक्षा बल क्षेत्र में संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रहे हैं।
टीटीपी पर शक और हालिया हमलों का सिलसिला
इस हमले की जिम्मेदारी अभी तक किसी भी चरमपंथी संगठन ने आधिकारिक तौर पर नहीं ली है। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि इस वारदात के पीछे तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) का हाथ हो सकता है। पिछले कुछ महीनों के दौरान खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में सुरक्षा बलों और पुलिस प्रतिष्ठानों पर टीटीपी के हमलों में तेजी आई है। गौरतलब है कि कुछ ही दिनों पहले इसी प्रांत के टैंक जिले में भी एक सुरक्षा चौकी पर हमला किया गया था, जिसमें कई सुरक्षाकर्मियों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। लगातार हो रहे इन हमलों ने क्षेत्र में तैनात पुलिस बलों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पाकिस्तान में गहराता आंतरिक सुरक्षा संकट
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब पाकिस्तान अंदरूनी स्तर पर गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पिछले एक महीने से अधिक समय से जनाक्रोश देखने को मिल रहा है, जहां नागरिक प्रदर्शनों पर सेना की गोलीबारी के कारण स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। दूसरी ओर, बलूचिस्तान में विद्रोही समूह लगातार सैन्य और पुलिस चौकियों को निशाना बना रहे हैं। बलूचिस्तान की बिगड़ती स्थिति पर चिंता जताते हुए एक पाकिस्तानी सांसद ने चेतावनी दी थी कि अगर यही हालात रहे तो बलूचिस्तान देश से अलग हो सकता है। खैबर पख्तूनख्वा में टीटीपी का बढ़ता प्रभाव और जगह-जगह हो रहे हिंसक हमले पाकिस्तान की कानून व्यवस्था और सुरक्षा प्रणाली के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं।



















