नेशनल सीलिएक अवेयरनेस डे पर जानें इस बीमारी के लक्षण और बचाव के उपाय जहां साधारण रोटी भी बन जाती है सेहत की दुश्मनसरकारी सहायता से वंचित कोटा के मलखंभ कलाकारों ने बिखेरी चमक, टीवी शो 'इंडिया गॉट टैलेंट' के सेमीफाइनल में पहुंचेड्रेसिंग रूम लीक मामला: पाकिस्तान के मोहम्मद रिजवान और इमाम उल हक से साइबर क्राइम एजेंसी ने की 4 घंटे पूछताछमूलांक 2 राशिफल 12 सितंबर 2026 को संवेदनशीलता पर रखें काबू और जानें अपना करियर सेहत तथा आर्थिक भविष्यफलमीन राशिफल 12 सितंबर: पार्टनर का मिलेगा सहयोग, करियर और आर्थिक मोर्चे पर होगा फायदाजयपुर बांदीकुई एक्सप्रेसवे पर प्रतिबंधित बाइकर्स का हुड़दंग, रोकने पर टोलकर्मी को टक्कर मार हुए फराररांची की कंचन का नया कमाल: 'वृक्षा' ब्रांड के तहत AI से फेस स्कैन कर तैयार हो रहे पर्सनल ब्यूटी प्रोडक्ट्स, हर ग्राहक के नाम पर लगेगा एक पेड़पूर्व सहयोगी पर ईडी की कार्रवाई के बाद हरीश रावत का बड़ा कदम, कांग्रेस के सभी पदों से दिया इस्तीफाबेहोशी, बर्बर यातना और बदली हुई पहचान: इज़राइल के सबसे खतरनाक खुफिया एजेंट एली कोहेन के जासूस बनने की अनसुनी दास्तानखैबर की पहाड़ियों से निकलकर रजाउल्लाह खान ने टेस्ट क्रिकेट में मचाया तहलका, डेब्यू मैच में ही बने हीरो
बच्चों की पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ाने के लिए अपनाएं 6 साइंटिफिक उपायपेरेंटिंग
26 अग॰ 2026, 10:30 am (17 दिन पहले)· 3

बच्चों की पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ाने के लिए अपनाएं 6 साइंटिफिक उपाय

यदि आपका बच्चा पढ़ाई के समय बहाने बनाता है, तो डांटने के बजाय साइंटिफिक तरीकों की मदद लें। जानिए बच्चों के अटेंशन स्पैन को समझकर उनकी एकाग्रता और याददाश्त बढ़ाने के आसान उपाय।

अक्सर देखा जाता है कि किताब खोलते ही बच्चों को अचानक भूख लगने लगती है, नींद आने लगती है या वे शौचालय जाने का बहाना बनाने लगते हैं। भारत भर में लगभग हर दूसरे माता-पिता को रोजाना इस स्थिति का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में ज्यादातर पेरेंट्स बच्चे पर गुस्सा करते हैं या उसे डांटकर पढ़ाने का प्रयास करते हैं। हालांकि, बाल विकास और मस्तिष्क विज्ञान के विशेषज्ञों के अनुसार, डांट-फटकार लगाने से बच्चे का ध्यान केंद्रित नहीं होता, बल्कि उसका मन पढ़ाई से पूरी तरह उचाट हो जाता है। बच्चों का दिमाग बड़ों की तुलना में बिल्कुल अलग प्रक्रिया के तहत काम करता है। वैज्ञानिक तकनीकों और सही दैनिक आदतों को अपनाकर बच्चों की याददाश्त और एकाग्रता दोनों में अभूतपूर्व सुधार किया जा सकता है।

बच्चों के स्वाभाविक अटेंशन स्पैन को समझना है जरूरी

चाइल्ड डेवलपमेंट रिसर्च के आंकड़े बताते हैं कि बच्चों की ध्यान लगाने की क्षमता उनकी उम्र के अनुसार सीमित होती है। यदि कोई 8 साल का बच्चा 20 मिनट तक लगातार पढ़ने के बाद ध्यान भटका रहा है, तो इसे उसकी लापरवाही या बदमाशी नहीं माना जाना चाहिए। यह उसका एक स्वाभाविक बायोलॉजिकल पैटर्न होता है। विभिन्न आयु वर्ग के बच्चों का औसतन अटेंशन स्पैन इस प्रकार होता है

ये भी पढ़ें
  • 6 से 8 वर्ष के बच्चे: 10 से 15 मिनट
  • 9 से 11 वर्ष के बच्चे: 15 से 20 मिनट
  • 12 वर्ष से अधिक आयु के बच्चे: 25 मिनट

जब माता-पिता अपने बच्चों से उनकी जैविक क्षमता से अधिक समय तक लगातार ध्यान केंद्रित करने की उम्मीद करते हैं, तो बच्चे मानसिक रूप से थक जाते हैं और पढ़ाई से दूर भागने के रास्ते तलाशने लगते हैं।

गहरी नींद और स्क्रीन टाइम का मस्तिष्क पर सीधा असर

बच्चों की स्मरण शक्ति और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता का गहरा संबंध उनकी नींद और डिजिटल डिवाइस के इस्तेमाल से जुड़ा हुआ है।

पर्याप्त नींद की आवश्यकता: 5 से 13 वर्ष के बच्चों के लिए रोजाना 9 से 11 घंटे की निर्बाध नींद बेहद जरूरी मानी गई है। जब बच्चा सो रहा होता है, उसी दौरान मस्तिष्क दिनभर की शॉर्ट-टर्म यादों को स्थायी यानी लॉन्ग-टर्म मेमोरी में परिवर्तित करता है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, जो बच्चे रोजाना 9 घंटे से कम सोते हैं, उनके दिमाग में ध्यान और याददाश्त को नियंत्रित करने वाले 'ग्रे मैटर' की मात्रा में कमी आने लगती है।

स्क्रीन टाइम के नुकसान: लगातार टेलीविजन, स्मार्टफोन या टैबलेट देखने से बच्चों का अटेंशन स्पैन बुरी तरह प्रभावित होता है और यह घटकर महज कुछ सेकंड्स का रह जाता है। इसलिए बच्चों की पढ़ाई में सुधार करने के लिए सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम उनके स्क्रीन टाइम पर सख्त सीमा तय करना है।

बच्चों का फोकस बढ़ाने के 6 प्रामाणिक वैज्ञानिक तरीके

1. पोमोडोरो तकनीक का प्रयोग करें

बच्चे को एक ही बैठक में लगातार 1 से 2 घंटे तक पढ़ने के लिए दबाव बिल्कुल न दें। इसके बजाय, उनकी उम्र के अनुसार पढ़ाई के छोटे-छोटे स्लॉट्स तैयार करें

  • 6 से 8 साल: 10 से 15 मिनट पढ़ाई के बाद 5 मिनट का ब्रेक दें।
  • 9 से 11 साल: 15 से 20 मिनट पढ़ाई के बाद 5 मिनट का ब्रेक दें।
  • 12 साल या उससे अधिक: 25 मिनट पढ़ाई के बाद 5 मिनट का ब्रेक दें।

ब्रेक की अवधि के दौरान बच्चे को हल्की स्ट्रेचिंग करने दें, पानी पीने दें या केवल आंखें बंद करके शांत बैठने दें। इससे मस्तिष्क को रीचार्ज होने का अवसर मिलता है।

2. पढ़ाई को खेल और विजुअल लर्निंग से जोड़ें

पज़ल्स और मेमोरी गेम्स खेलने से बच्चों की वर्किंग मेमोरी काफी तेज होती है। उदाहरण के लिए, आप बच्चे को सामने रखी 4 से 5 वस्तुएं दिखाएं और फिर उन्हें छिपाकर उल्टे क्रम में उनके नाम पूछने वाला खेल खिला सकते हैं। इसके अतिरिक्त, केवल किताबों तक सीमित रहने के बजाय विजुअल लर्निंग का सहारा लें, जिसमें चित्रों, साइंस म्यूजियम के भ्रमण और शैक्षणिक वीडियो का उपयोग शामिल है।

3. रटने की जगह समझकर पढ़ने की आदत डालें

विषयों को बिना समझे रटने के बजाय बच्चों को अध्यायों की कहानियां बनाना और निमोनिक्स (Mnemonics) यानी शॉर्ट फॉर्म बनाकर याद रखना सिखाएं। इसके साथ ही, रोज शाम को केवल 5 मिनट का समय निकालकर पूरे दिन में पढ़ी गई बातों का त्वरित रिवीजन करने की नियमित आदत विकसित करें।

4. न्यूट्रिशन और पोषक आहार पर ध्यान दें

मानव दिमाग का लगभग 60% हिस्सा फैट से निर्मित होता है। यही कारण है कि बच्चे के दैनिक आहार में ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करना आवश्यक है। इसके लिए अखरोट, अलसी और सूखे मेवे बेहतरीन विकल्प हैं, जो ब्रेन सेल्स के बीच सिग्नल संचार को तेज करते हैं। साथ ही, बच्चों को अत्यधिक चीनी वाले खान-पान और जंक फूड से दूर रखना चाहिए।

5. रोजाना 60 मिनट की शारीरिक गतिविधि सुनिश्चित करें

मैदान में खेलना, दौड़ना या साइकिल चलाना सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि मानसिक विकास के लिए भी अनिवार्य है। रोजाना कम से कम 60 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी करने से दिमाग में रक्त का संचार और ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ती है, जिससे ध्यान केंद्रित करने की क्षमता सुधरती है।

6. शांत माहौल और इमोशनल सपोर्ट प्रदान करें

बच्चे के अध्ययन कक्ष और स्टडी टेबल को हमेशा साफ तथा व्यवस्थित रखें। रात को सोने से पहले बच्चों को कहानियां सुनाने की आदत डालें। यह प्रक्रिया दिमाग के प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स हिस्से को सक्रिय करती है, जो वर्किंग मेमोरी को मजबूत बनाने का काम करता है।

धैर्य और सकारात्मक प्रोत्साहन है सबसे बड़ी कुंजी

प्रत्येक बच्चा अपनी गति और क्षमताओं में अनोखा होता है, इसलिए कभी भी अपने बच्चे की तुलना किसी अन्य बच्चे से न करें। यदि आपका बच्चा आज 15 मिनट पूरी एकाग्रता से पढ़ पा रहा है, तो आपके सही मार्गदर्शन और शाबाशी से वह कल 20 मिनट भी ध्यान लगा पाएगा। आपका धैर्य और स्नेही व्यवहार ही बच्चे के मन से पढ़ाई के भय को पूरी तरह दूर कर सकता है।

सवाल-जवाब

6 से 8 साल के बच्चों के लिए पढ़ाई का सही समय क्या है?
6 से 8 वर्ष के बच्चों का अटेंशन स्पैन 10 से 15 मिनट होता है। इसलिए उन्हें 10-15 मिनट की पढ़ाई के बाद 5 मिनट का ब्रेक देना चाहिए।
कम नींद लेने से बच्चों के दिमाग पर क्या असर पड़ता है?
रोजाना 9 घंटे से कम सोने वाले बच्चों के दिमाग में ध्यान और याददाश्त नियंत्रित करने वाला 'ग्रे मैटर' घटने लगता है।
बच्चों की वर्किंग मेमोरी तेज करने के लिए आहार में क्या शामिल करें?
दिमाग का 60% हिस्सा फैट से बना होता है, इसलिए ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर अखरोट, अलसी और सूखे मेवे बच्चे की डाइट में शामिल करने चाहिए।
बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करना क्यों जरूरी है?
लगातार टीवी या मोबाइल देखने से बच्चों की एकाग्रता क्षमता घटकर महज कुछ सेकंड्स की रह जाती है।
पोमोडोरो तकनीक बच्चों की पढ़ाई में कैसे मदद करती है?
यह तकनीक बच्चों को एक साथ लगातार पढ़ने के बजाय उम्र के अनुसार छोटे स्लॉट्स में पढ़ाई और बीच में 5 मिनट का ब्रेक लेने की सुविधा देती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR