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जयपुर के धारव हाई स्कूल की प्रिंसिपल की सलाह, केवल रिपोर्ट कार्ड देखने की जगह पीटीएम में पूछें ये जरूरी सवालपेरेंटिंग
10 अग॰ 2026, 5:17 pm (33 दिन पहले)· 0

जयपुर के धारव हाई स्कूल की प्रिंसिपल की सलाह, केवल रिपोर्ट कार्ड देखने की जगह पीटीएम में पूछें ये जरूरी सवाल

स्कूलों में होने वाली पेरेंट्स-टीचर्स मीटिंग (पीटीएम) को केवल अंक देखने का जरिया न बनाएं। जानिए जयपुर के धारव हाई स्कूल की प्रिंसिपल निशि धंजल के अनुसार बच्चों के समग्र विकास के लिए किन बातों पर चर्चा जरूरी है।

अधिकांश विद्यालयों में आयोजित होने वाली पेरेंट्स-टीचर्स मीटिंग (पीटीएम) को अभिभावक अक्सर रिपोर्ट कार्ड की समीक्षा करने और परीक्षा के प्राप्तांक आंकने का एक औपचारिक माध्यम मान लेते हैं। आमतौर पर माता-पिता शिक्षक के पास जाते हैं, विभिन्न विषयों के अंक पूछते हैं और परिणाम उम्मीद के मुताबिक न होने पर बच्चे को तुरंत टोकने या सुधारने लगते हैं। हालांकि, शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पीटीएम का दायरा केवल रिपोर्ट कार्ड तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह मंच अभिभावकों को यह गहराई से समझने का अवसर प्रदान करता है कि उनका बच्चा कक्षा के माहौल में किस तरह ढल रहा है, सहपाठियों के साथ उसकी कैसी पटरी बैठ रही है और उसकी अंतर्निहित क्षमताएं या व्यक्तिगत परेशानियां क्या हैं।

केवल अंक ही नहीं, बच्चे की समझ और सीखने की प्रक्रिया को जानें

कक्षा में पढ़ाई के दौरान बच्चा किस प्रकार सीख रहा है, यह जानना परीक्षा के अंकों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होता है। अभिभावकों को शिक्षकों से यह समझने का प्रयास करना चाहिए कि बच्चा उत्तरों को केवल याद करके लिख रहा है या वह विषय की मूल अवधारणाओं और कॉन्सेप्ट को गहराई से समझ पा रहा है। बैठक के दौरान यह जरूर पूछें कि किन विषयों में बच्चे की पकड़ स्वाभाविक रूप से मजबूत है और किन क्षेत्रों में उसे अतिरिक्त मार्गदर्शन या सहायता की आवश्यकता है। यदि बच्चा कक्षा में प्रश्न पूछने, अपनी शंकाएं व्यक्त करने या समूह चर्चाओं में भाग लेने से कतराता है या झिझकता है, तो शिक्षक से उन व्यावहारिक तरीकों पर चर्चा करें जिन्हें घर पर अपनाकर बच्चे का झिझक दूर किया जा सके और उसका आत्मविश्वास बढ़ाया जा सके।

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सामाजिक व्यवहार और मानसिक स्थिति का मूल्यांकन भी है जरूरी

किसी भी बच्चे के समग्र विकास के लिए उसकी सामाजिक और भावनात्मक स्थिति उतनी ही महत्वपूर्ण होती है जितनी कि उसकी शैक्षणिक प्रदर्शन। शिक्षकों से बातचीत करते समय यह जानने का प्रयास करें कि बच्चा कक्षा के माहौल में अन्य छात्रों के साथ कैसा व्यवहार करता है। क्या वह सभी के साथ आसानी से घुल-मिल जाता है या अलग-थलग रहने की प्रवृत्ति रखता है? इसके अलावा, स्कूल में आयोजित होने वाली टीम गतिविधियों और ग्रुप प्रोजेक्ट्स में उसकी सहभागिता और टीमवर्क की भावना कैसी है, इस पर भी ध्यान देना आवश्यक है। यदि बच्चा घर पर स्कूल से जुड़ी किसी समस्या का जिक्र करता है या स्कूल जाने में अनिच्छा व्यक्त करता है, तो इस बात की जानकारी तुरंत शिक्षक के साथ साझा करनी चाहिए ताकि समय रहते समस्या का समाधान किया जा सके।

बच्चे की स्वाभाविक प्रतिभा और विशिष्ट क्षमताओं को पहचानें

प्रत्येक बच्चे की सीखने की क्षमता, रुचियां और प्रतिभाएं एक जैसी नहीं होतीं, और न ही हर छात्र केवल किताबी पढ़ाई में अव्वल आ सकता है। इसलिए पीटीएम के दौरान अभिभावकों को शिक्षक से यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि पढ़ाई से इतर खेलकूद, कला, संगीत, नेतृत्व क्षमता या विज्ञान जैसी गतिविधियों में बच्चे की रुचि किस ओर अधिक है। जब शिक्षक और अभिभावक मिलकर बच्चे के इस विशेष हुनर और रुचि को पहचान लेते हैं, तो घर और विद्यालय दोनों ही स्तरों पर उसे सही प्रोत्साहन और मंच प्रदान करना आसान हो जाता है, जिससे बच्चे के व्यक्तित्व का संतुलित विकास होता है।

पीटीएम के दौरान अभिभावकों को किन गलतियों से बचना चाहिए

पेरेंट्स-टीचर्स मीटिंग के दौरान माता-पिता द्वारा की गई कुछ सामान्य गलतियां बच्चे के मनोबल को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए शिक्षकों से बातचीत के दौरान निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए

  • अन्य बच्चों से तुलना न करें: अपने बच्चे के अंकों या व्यवहार की तुलना कभी भी उसके भाई-बहनों या कक्षा के अन्य टॉपर छात्रों से न करें। इससे बच्चे में हीन भावना पैदा हो सकती है।
  • प्रतिक्रिया मिलने पर तुरंत भड़कने से बचें: यदि शिक्षक बच्चे की किसी कमी या व्यवहारिक समस्या की ओर इशारा करते हैं, तो उसे एक सकारात्मक सुधार के अवसर के रूप में स्वीकार करें, न कि शिक्षक से बहस करने या उन्हें गलत ठहराने का मुद्दा बनाएं।
  • शिक्षक के सामने बच्चे को शर्मिंदा न करें: मीटिंग के दौरान शिक्षक या अन्य लोगों की मौजूदगी में बच्चे पर चिल्लाने, उसे डांटने या नीचा दिखाने से बचना चाहिए। इससे बच्चे का आत्मसम्मान प्रभावित होता है।

औपचारिक बातचीत से आगे बढ़कर अनौपचारिक संवाद की आवश्यकता

राजस्थान में अजमेर रोड, जयपुर स्थित धारव हाई स्कूल की प्रिंसिपल निशि धंजल के अनुसार, पीटीएम केवल नंबरों का जोड़-घटाव करने या शिकायतें दर्ज कराने की कोई औपचारिक प्रक्रिया नहीं है। यह अभिभावकों और शिक्षकों के बीच एक मजबूत साझेदारी का निर्माण करने का एक बेहतरीन मंच है। उनके अनुसार, अभिभावकों को केवल पढ़ाई और ग्रेड्स तक सीमित रहने के बजाय बच्चे के व्यवहार, मानसिक स्थिति, सामाजिक दृष्टिकोण और आत्मविश्वास से जुड़े पहलुओं पर भी शिक्षकों से खुलकर बात करनी चाहिए।

धारव हाई स्कूल जैसे शैक्षणिक संस्थानों का मानना है कि स्कूल और अभिभावकों के बीच संवाद केवल पारंपरिक और औपचारिक पीटीएम तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसके लिए 'कॉफी एंड कन्वर्सेशन्स' जैसे अनौपचारिक सत्रों का आयोजन किया जाना चाहिए। इस प्रकार के सहज और कैजुअल माहौल में अभिभावक और शिक्षक एक साथ बैठकर बच्चों के सामने आ रही आधुनिक चुनौतियों, उनकी बदलती रुचियों और मानसिक स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर बिना किसी झिझक के विचार-विमर्श कर सकते हैं। जब घर और विद्यालय एक साथ मिलकर काम करते हैं, तभी बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव तैयार होती है।

सवाल-जवाब

पीटीएम (PTM) में सिर्फ नंबर पूछने के बजाय किन बातों पर ध्यान देना चाहिए?
अभिभावकों को केवल अंकों तक सीमित रहने के बजाय बच्चे की कॉन्सेप्ट समझ, सामाजिक व्यवहार, मानसिक स्वास्थ्य, सहपाठियों संग जुड़ाव और उसकी विशेष प्रतिभाओं के बारे में शिक्षकों से चर्चा करनी चाहिए।
जयपुर के धारव हाई स्कूल की प्रिंसिपल निशि धंजल की पीटीएम पर क्या राय है?
प्रिंसिपल निशि धंजल के अनुसार, पीटीएम केवल रिपोर्ट कार्ड देखने या नंबरों का हिसाब लगाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह माता-पिता और शिक्षकों के बीच साझेदारी बनाने का अवसर है।
पीटीएम के दौरान अभिभावकों को किन गलतियों से बचना चाहिए?
माता-पिता को बच्चे की तुलना दूसरों से नहीं करनी चाहिए, शिक्षक द्वारा कमी बताए जाने पर तुरंत भड़कना नहीं चाहिए और बैठक में बच्चे को डांटकर शर्मिंदा करने से बचना चाहिए।
'कॉफी एंड कन्वर्सेशन्स' पहल क्या है?
यह एक अनौपचारिक सत्र की अवधारणा है जहां पेरेंट्स और टीचर्स कैजुअल माहौल में बैठकर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, बदलती रुचियों और चुनौतियों पर बिना किसी झिझक के खुलकर चर्चा कर सकते हैं।
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