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तारिक रहमान के भारत दौरे से पहले शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर अटका पेच, दिल्ली और ढाका में तेज हुई कूटनीतिक हलचलराजनीति
17 अग॰ 2026, 11:36 am (2 घंटे पहले)· 1

तारिक रहमान के भारत दौरे से पहले शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर अटका पेच, दिल्ली और ढाका में तेज हुई कूटनीतिक हलचल

बांग्लादेश ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान की प्रस्तावित भारत यात्रा को लेकर साफ कर दिया है कि शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर भारत के रुख के बाद ही आगे की बात बढ़ेगी।

भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक संबंधों में इन दिनों एक नया तनाव उभर कर सामने आया है, जो सीधे तौर पर बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की संभावित भारत यात्रा से जुड़ा हुआ है। ढाका की ओर से स्पष्ट संकेत दिए गए हैं कि इस उच्च स्तरीय दौरे की राह तभी साफ हो सकेगी जब भारत कुछ संवेदनशील और अहम मामलों पर तेजी से स्पष्ट रुख अपनाएगा। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय द्वारा रविवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, भारत से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और अन्य फरार चल रहे आरोपियों के प्रत्यर्पण के अनुरोध पर बिना देरी किए कड़े कदम उठाने की अपेक्षा की जा रही है। इसके साथ ही, शहीद शरीफ उस्मान हादी की हत्या के मामलों में नामजद आरोपियों को भी दोनों पड़ोसी देशों के बीच पहले से तय प्रत्यर्पण समझौते के तहत ढाका को सौंपने की जोरदार मांग की गई है।

नई दिल्ली और ढाका के बीच खींची गई कूटनीतिक रेड लाइन

ढाका के सत्ता गलियारों में इन सभी मांगों को भारत के साथ भविष्य के द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से एक प्रकार की कूटनीतिक सीमा या रेड लाइन के रूप में देखा जा रहा है। दूसरी तरफ, नई दिल्ली के नीति निर्माताओं का यह मानना है कि बांग्लादेश सरकार द्वारा उठाए गए इन प्रत्यर्पण अनुरोधों पर भारत को अपना अगला कदम और प्रशासनिक रुख बेहद स्पष्ट रूप से सामने रखना होगा। ज्ञात हो कि शेख हसीना के प्रत्यर्पण की यह मांग सबसे पहले वर्ष 2024 के दौरान तब उठी थी जब अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस देश की कमान संभाल रहे थे। इसके बाद, फरवरी 2026 में सत्ता में आई बीएनपी सरकार ने भी इस पुरानी मांग को पूरी दृढ़ता के साथ फिर से दोहराया है।

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शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस से बिगड़ा आपसी संवाद का माहौल

सूत्रों के अनुसार, शुरुआती योजना के तहत भारत की तरफ से तारिक रहमान की यात्रा के लिए 21 अगस्त की तारीख पर विचार किया जा रहा था। हालांकि, 5 अगस्त को शेख हसीना द्वारा आयोजित की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद दोनों देशों की सरकारों के बीच चल रही बातचीत का माहौल अचानक काफी प्रभावित हुआ। इस घटनाक्रम के बाद अब तारिक रहमान के प्रशासन ने यह बिल्कुल साफ कर दिया है कि वे नई दिल्ली की ओर से प्रत्यर्पण के इस संवेदनशील मुद्दे पर ठोस जवाब मिलने का इंतजार कर रहे हैं। इस पूरी स्थिति के बीच, भारत सरकार ने शेख हसीना के उस मीडिया संवाद से खुद को पूरी तरह अलग करते हुए यह स्पष्ट किया है कि इस प्रकार की किसी भी बातचीत में उसकी कोई भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी और न ही उसने हसीना द्वारा व्यक्त किए गए विचारों का किसी भी स्तर पर समर्थन किया था।

दिसंबर वापसी की योजना और हत्या की आशंका

उल्लेखनीय है कि अपनी उस मीडिया बातचीत के दौरान शेख हसीना ने इसी साल दिसंबर के महीने में बांग्लादेश वापस लौटने की अपनी योजना का सार्वजनिक रूप से जिक्र किया था। इसके साथ ही उन्होंने यह गंभीर आशंका भी जताई थी कि स्वदेश लौटने पर उनकी हत्या की जा सकती है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में दोहराया है कि दोनों पड़ोसी देशों के सक्षम अधिकारियों के बीच संभावित द्विपक्षीय दौरे की संभावनाओं को लेकर पिछले कई हफ्तों से लगातार संपर्क बना हुआ है। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि पांच अगस्त को नई दिल्ली में शेख हसीना की तरफ से मीडिया के सामने की गई खुली चर्चा ने पूरी प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाया है। मंत्रालय ने यह भी याद दिलाया कि इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल द्वारा हसीना को मानवता के खिलाफ गंभीर अपराधों का दोषी ठहराया जा चुका है और बांग्लादेश की अदालतों ने उन्हें मौत की सजा सुनाई है, जबकि उनकी पार्टी अवामी लीग पर पहले ही प्रतिबंध लगाया जा चुका है।

बांग्लादेश की विदेश नीति और चीन का दौरा

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए यह भी कहा कि देश अपनी घोषित बांग्लादेश फर्स्ट की नीति पर पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ता रहेगा। इस कूटनीतिक दृष्टिकोण का मुख्य उद्देश्य अपने सभी पड़ोसी देशों और अन्य वैश्विक साझेदारों के साथ पूरी तरह दोस्ताना द्विपक्षीय संबंध स्थापित करना है, जो आपसी संप्रभुता की समानता, राष्ट्रीय सम्मान, एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में अहस्तक्षेप और साझा फायदों पर पूरी तरह टिके हों। उल्लेखनीय है कि जून महीने की शुरुआत से ही नई दिल्ली और ढाका के बीच तारिक रहमान की यात्रा को लेकर चर्चाएं चल रही थीं, लेकिन उस दौरान बांग्लादेशी अवैध प्रवासियों को हिरासत में लिए जाने और उन्हें वापस भेजने से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स ने दोनों तरफ के माहौल को और अधिक जटिल बना दिया था। इसके बाद, तारिक रहमान ने अपनी पहली आधिकारिक द्विपक्षीय यात्रा के रूप में चीन का रुख किया था, जिसे राजनीतिक विश्लेषकों द्वारा नई दिल्ली के लिए भी एक बड़े कूटनीतिक संकेत के रूप में देखा गया था।

शीर्ष अधिकारियों के बीच बैठकों का दौर और कूटनीतिक प्रयास

मीडिया में आई विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, जिस समय 21 अगस्त की संभावित तारीख को लेकर दोनों तरफ से बातचीत चल रही थी, उसी दौरान ढाका को इस बात की भनक लगी कि शेख हसीना नई दिल्ली स्थित फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया में प्रेस को संबोधित करने वाली हैं। इस घटनाक्रम के सामने आते ही बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने तुरंत भारत के एनएसए अजीत डोभाल को फोन मिलाकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया था। इसके अलावा, बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने भी भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी से मुलाकात कर इस गंभीर मुद्दे को पूरी प्रमुखता से उठाया था। अंततः वह बातचीत संपन्न हुई जिसमें देश-विदेश के कई पत्रकारों ने हिस्सा लिया, जिसके चलते ढाका की ओर से बेहद तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। बांग्लादेश ने हसीना को मीडिया से रूबरू होने की अनुमति मिलने को भारतीय हुक्मरानों की मौन सहमति के रूप में देखा, जबकि भारत का लगातार यह पक्ष रहा कि उस आयोजन में उसकी कोई भूमिका नहीं थी।

भविष्य की रणनीतियां और खुफिया प्रमुख का दौरा

इस घटनाक्रम के तुरंत बाद तारिक रहमान ने भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी से फिर मुलाकात की और यह बात पूरी तरह स्पष्ट कर दी कि शेख हसीना का प्रत्यर्पण वर्तमान बांग्लादेश सरकार के लिए सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। ढाका ने यह संदेश दे दिया है कि जब तक नई दिल्ली इस कानूनी प्रक्रिया पर अपने अगले कदमों के बारे में कोई संतोषजनक और ठोस उत्तर नहीं देती, तब तक प्रधानमंत्री रहमान के लिए भारत का दौरा करना व्यावहारिक रूप से बहुत कठिन होगा। इस बीच कूटनीतिक दूरियों को पाटने के लिए भारत की खुफिया एजेंसी आरएंडएडब्ल्यू के प्रमुख पराग जैन ने 9 अगस्त को ढाका का दौरा किया और वहां के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों से लंबी चर्चा की। बांग्लादेशी पक्ष ने भारतीय प्रतिनिधि से आग्रह किया कि नई दिल्ली को ढाका की सुरक्षा चिंताओं के प्रति पूरी संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। वर्तमान परिस्थितियों में दोनों देश किसी स्वीकार्य कूटनीतिक समाधान तक पहुंचने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, हालांकि 21 अगस्त की निर्धारित समय-सीमा अब किसी ठोस समझौते के लिहाज से काफी कम नजर आ रही है।

सवाल-जवाब

तारिक रहमान की प्रस्तावित भारत यात्रा की तारीख क्या तय की गई थी?
भारत की ओर से तारिक रहमान की यात्रा के लिए 21 अगस्त की तारीख प्रस्तावित की गई थी।
बांग्लादेश सरकार मुख्य रूप से भारत से क्या मांग कर रही है?
बांग्लादेश सरकार पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और अन्य फरार आरोपियों के प्रत्यर्पण की मांग कर रही है।
शेख हसीना ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कब लौटने की योजना बताई थी?
शेख हसीना ने इस साल दिसंबर में बांग्लादेश लौटने की योजना बताई थी।
भारत की किस खुफिया एजेंसी के प्रमुख ने अगस्त में ढाका का दौरा किया था?
भारत की बाहरी खुफिया एजेंसी आरएंडएडब्ल्यू के प्रमुख पराग जैन ने 9 अगस्त को ढाका का दौरा किया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·41 मिनट पहले

यह कूटनीतिक गतिरोध केवल भारत-बांग्लादेश द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर सीमावर्ती राज्यों के आंतरिक सुरक्षा और क्षेत्रीय व्यापार पर भी पड़ना तय है। जब तक नई दिल्ली प्रत्यर्पण और सुरक्षा चिंताओं पर अपना प्रशासनिक रुख स्पष्ट नहीं करती, तब तक उच्च स्तरीय कूटनीतिक संवाद बहाल होना मुश्किल है। इस स्थिति से क्षेत्रीय स्थिरता और सामरिक संतुलन प्रभावित हो सकता है, जिस पर नीति निर्माताओं को बेहद सावधानी से आगे बढ़ना होगा।

Ravikash Gupta@ravikash·40 मिनट पहले

यह घटनाक्रम भारत-बांग्लादेश के बीच आर्थिक और व्यापारिक साझेदारी के लिए भी एक बड़ी परीक्षा है। यदि राजनीतिक गतिरोध लंबा खिंचता है, तो सीमा पार आपूर्ति श्रृंखला, विशेष रूप से ऊर्जा और कपड़ा क्षेत्र के आयात-निर्यात पर असर पड़ सकता है। निवेशकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नई दिल्ली कूटनीतिक संतुलन बनाते हुए अपनी वित्तीय और रणनीतिक प्राथमिकताओं को कैसे साधती है।

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