अरविंद केजरीवाल के अयोध्या पहुंचते ही उनके दौरे पर सियासी और धार्मिक विरोध तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जैसे ही अयोध्या पहुंचे, संत समाज, पुरोहित समाज और सनातन रक्षक दल के कुछ पदाधिकारियों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। विरोध करने वालों का साफ कहना है कि जिन लोगों ने कभी भगवान राम और राम मंदिर पर सवाल खड़े किए थे, उन्हें अब अयोध्या आने का कोई नैतिक हक नहीं है।
संतों ने खोला मोर्चा, बैठक में लिया फैसला
केजरीवाल के दौरे को लेकर संत समाज का एक वर्ग खुलकर सामने आ गया है। सनातन रक्षक दल, पांडा पुरोहित समाज और कुछ संतों ने आपस में बैठक की और इस बैठक में केजरीवाल को काला झंडा दिखाने तथा उनका पुतला दहन करने का ऐलान किया गया। इन संगठनों ने कहा है कि वे अपना प्रदर्शन राम मंदिर परिसर के गेट नंबर 11 पर करेंगे।
'विवादित बयानों' का हवाला
सनातन रक्षक दल के अध्यक्ष मुकुंद माधव त्रिपाठी ने बताया कि संतों और पुरोहित समाज की बैठक में यह तय हुआ कि अरविंद केजरीवाल का विरोध किया जाएगा। उनका आरोप है कि केजरीवाल ने बीते समय में राम मंदिर और भगवान राम को लेकर विवादित बयान दिए थे, और यही वजह है कि अब उनके अयोध्या दौरे का विरोध हो रहा है।
पांडा पुरोहित समाज के अध्यक्ष राजेश महाराज ने भी केजरीवाल के इस दौरे पर सीधे सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति पहले भगवान राम के अस्तित्व और अयोध्या को लेकर सवाल उठाता रहा, वह आखिर अब दर्शन के लिए क्यों आ रहा है। उनका कहना है कि संत समाज और पुरोहित समाज मिलकर उनके दौरे का विरोध करेंगे।
मंदिर की जगह स्कूल और शौचालय का आरोप
संत सीताराम दास ने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल ने पहले राम मंदिर की जरूरत पर ही सवाल उठाए थे और मंदिर की जगह स्कूल तथा शौचालय बनाने की बात कही थी। उनका कहना है कि अब केजरीवाल सिर्फ राजनीतिक कारणों से अयोध्या आ रहे हैं, इसलिए उनका विरोध किया जाएगा। संत समाज ने केजरीवाल को काला झंडा दिखाने, नारेबाजी करने और पुतला दहन करने की घोषणा की है।













