बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने इस मैदान को जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। पिछले कई दिनों से भारतीय जनता पार्टी ने अपने तमाम दिग्गज नेताओं को इस चुनावी समर में उतार रखा है, जहां पार्टी के बड़े नेता दिन-रात पसीना बहा रहे हैं। दूसरी ओर, राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख नेता विदेश यात्रा से लौटने के बाद सीधे इस मुकाबले में कूद पड़े हैं। जन सुराज के संस्थापक और उम्मीदवार भी लगातार इलाकों में घूमकर समर्थन जुटा रहे हैं। हालांकि, 30 जुलाई 2026 को होने वाले मतदान से ठीक पहले चुनावी हवा किस दिशा में बहेगी, यह बड़ा सवाल बना हुआ है। जब 3 अगस्त को मतों की गिनती होगी, तब क्या कोई बड़ा उलटफेर देखने को मिलेगा या फिर सत्तारूढ़ दल अपना पुराना किला बचाने में कामयाब रहेगा, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
चुनावी मैदान में दिग्गजों की फौज और प्रचार की आंधी
प्रचार के अंतिम चरण में भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और जन सुराज पार्टी ने अपनी पूरी ऊर्जा झोंक दी है। हालांकि नेताओं के लंबे-चौड़े वादों और रैलियों के शोर के बीच जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। आम मतदाताओं के मन में छिपा असंतोष और स्थानीय मुद्दे किसी भी बड़े प्रत्याशी का चुनावी समीकरण बिगाड़ने की ताकत रखते हैं। चुनाव के इन अंतिम दिनों में स्थानीय सड़कों पर नेताओं के काफिले और समर्थकों की भारी भीड़ नजर आ रही है। हाल ही में सत्तारूढ़ गठबंधन और विरोधी दलों के कई वरिष्ठ नेताओं ने बांकीपुर के विभिन्न हिस्सों में रोड-शो कर शक्ति प्रदर्शन किया।
बांकीपुर में 30 जुलाई को मतदान संपन्न होना है।
भारतीय जनता पार्टी ने अपने उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा के पक्ष में प्रचार करने के लिए 40 स्टार प्रचारकों की एक बड़ी फौज मैदान में उतार दी है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, नित्यानंद राय के साथ-साथ प्रसिद्ध कलाकार और सांसद मनोज तिवारी ने बोरिंग रोड, जाखनपुर और दरियापुर गोला जैसे प्रमुख इलाकों में रोड शो के जरिए माहौल बनाने की पूरी कोशिश की है। वहीं दूसरी तरफ, राजनीतिक रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर जन सुराज के मुख्य चेहरे के तौर पर खुद गलियों में घूमकर चाय पर चर्चा और पैदल यात्राएं कर रहे हैं। वे अकेले ही अपने पूरे अभियान की कमान संभाले हुए हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय जनता दल की उम्मीदवार रेखा गुप्ता के समर्थन में तेजस्वी यादव और महागठबंधन के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने शहरी मध्यवर्ग के इलाकों और दलित-अल्पसंख्यक बस्तियों में कई जनसभाओं को संबोधित किया है।
वे 5 मुख्य मुद्दे, जिन पर पार्टियां मांग रही हैं वोट
भारतीय जनता पार्टी (राष्ट्रवाद और कैडर वोट): पार्टी अपने पारंपरिक कायस्थ बहुल मतदाता वर्ग, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे और अब तक हुए विकास कार्यों के आधार पर जनता से समर्थन मांग रही है।
जन सुराज (व्यवस्था परिवर्तन): प्रशांत किशोर पारंपरिक दलों के विकल्प का नारा बुलंद करते हुए सत्तारूढ़ दल और मुख्य विपक्षी दल दोनों पर तीखे हमले कर रहे हैं। वे मुख्य रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य और युवाओं के पलायन जैसे गंभीर मुद्दों पर वोट मांग रहे हैं।
राष्ट्रीय जनता दल (रोजगार और स्थानीय मुद्दे): पार्टी बेरोजगारी, बढ़ती महंगाई और शासन व्यवस्था के अंतर को मुद्दा बना रही है। वे सामाजिक न्याय और बदलाव की बयार के नाम पर जनता से वोट की अपील कर रहे हैं।
कानून व्यवस्था: शहरी पटना के भीतर अपराध का ग्राफ और आम नागरिकों की सुरक्षा का विषय सभी प्रमुख दलों के भाषणों और चर्चाओं का अहम हिस्सा बना हुआ है।
बांकीपुर में आखिरी दौर का घमासान तेज हो चुका है।
ग्राउंड जीरो पर क्या हैं असल हालात?
एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी पटना को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने का दावा कर रही है, वहीं विपक्षी दल इसे सिर्फ कागजी विकास करार दे रहे हैं। हालांकि राजनीतिक मंचों के शोरगुल से दूर जब बोरिंग रोड, नाला रोड, दरियापुर गोला, कदमकुआं और यारपुर के आम नागरिकों से बात की गई, तो धरातल की समस्याएं पूरी तरह अलग नजर आईं।
सबसे बड़ी समस्या भीषण जलजमाव और जल निकासी की विफलता है। बांकीपुर के कई इलाकों में हल्की सी बारिश होते ही नाला रोड और राजेंद्र नगर से सटे रिहायशी क्षेत्रों में पानी भर जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नेता सिर्फ चुनाव के वक्त नजर आते हैं, लेकिन नालियों की सफाई का कोई स्थायी समाधान आज तक नहीं निकाला गया है।
इसके अलावा, ट्रैफिक जाम और पार्किंग की भारी किल्लत आम जनजीवन को प्रभावित कर रही है। बोरिंग रोड और हथुआ मार्केट जैसे व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्रों में गाड़ियों को पार्क करने की कोई ढंग की व्यवस्था न होने के कारण दिनभर लगने वाला जाम मध्यम वर्ग और दुकानदारों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुका है।
साथ ही, पारंपरिक कैडर का साइलेंट गुस्सा भी चुनाव को प्रभावित कर सकता है। जिसे लंबे समय से बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है, वहां के कार्यकर्ताओं और मतदाताओं का एक वर्ग स्थानीय नेताओं की सुस्ती से नाराज चल रहा है। जन सुराज इसी खामोश असंतोष के सहारे अपनी पैठ बनाने की पुरजोर कोशिश में जुटा हुआ है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो बांकीपुर का यह उपचुनाव महज एक विधानसभा सीट की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह बीजेपी के इस अजेय दुर्ग में प्रशांत किशोर की सीधी अग्निपरीक्षा भी साबित हो रही है। यदि धरातल की समस्याओं से त्रस्त जनता ने मतदान के दिन अपनी पसंद बदली, तो 3 अगस्त को आने वाले चुनाव परिणाम बड़े-बड़े सूरमाओं को चौंका सकते हैं।



















