बिहार के राजनीतिक गलियारों में उस समय हलचल मच गई जब बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी द्वारा मैदान में उतारे गए प्रत्याशी अभिषेक कुमार बंटी ने अपनी उम्मीदवारी वापस लेने का निर्णय लिया। इस अचानक आए घटनाक्रम को पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
नामांकन वापसी की वजह
अभिषेक कुमार बंटी ने अपने फैसले की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि वे पारिवारिक कारणों के चलते इस चुनावी मुकाबले का हिस्सा नहीं बन सकते। उन्होंने पार्टी के राज्य अध्यक्ष संजय सरावगी को एक औपचारिक पत्र लिखकर सूचित किया कि यद्यपि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें NDA उम्मीदवार के रूप में बांकीपुर सीट से चुना था, लेकिन व्यक्तिगत पारिवारिक परिस्थितियों के कारण वे चुनाव लड़ने में असमर्थ हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे एक निष्ठावान कार्यकर्ता के रूप में पार्टी की सेवा करना जारी रखेंगे और नेतृत्व का भरोसा जीतने के लिए आभार भी प्रकट किया।
चुनावी समीकरण और दावेदारी
भाजपा ने बांकीपुर सीट पर जीत का सिलसिला जारी रखने के लिए अभिषेक कुमार बंटी पर दांव खेला था। उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का करीबी माना जाता है और पार्टी ने इस चयन के जरिए पारंपरिक वोट बैंक के साथ-साथ कायस्थ मतदाताओं को साधने की सोची थी। इससे पहले, नामांकन के दौरान एक विशेष सभा का भी आयोजन किया गया था, जिसमें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और NDA के अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे। उस वक्त उन्हें नीतीश कुमार का भी समर्थन प्राप्त था, जिससे सीट पर भाजपा की पकड़ मजबूत दिखाई दे रही थी।
बांकीपुर में सियासी घमासान
बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र को भाजपा का अभेद्य किला माना जाता है। नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद रिक्त हुई इस सीट पर जीत दर्ज करना पार्टी की प्रतिष्ठा का प्रश्न है। यह उपचुनाव काफी रोचक हो गया है क्योंकि विपक्ष की ओर से राष्ट्रीय जनता दल ने अपना प्रत्याशी उतारा है, साथ ही जनसुराज के सुप्रीमो प्रशांत किशोर भी चुनाव मैदान में अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। अब देखना यह है कि भाजपा इस स्थिति में नया प्रत्याशी चुनकर अपनी पकड़ बनाए रखने में कैसे सफल होती है।











