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बेगूसराय कोर्ट का बड़ा फैसला, पूर्व मंत्री मंजू वर्मा और उनके पति को आर्म्स एक्ट में 7 साल की सजाराजनीति
2 अग॰ 2026, 12:00 am (86 दिन पहले)· 2

बेगूसराय कोर्ट का बड़ा फैसला, पूर्व मंत्री मंजू वर्मा और उनके पति को आर्म्स एक्ट में 7 साल की सजा

बेगूसराय की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने वर्ष 2018 के आर्म्स एक्ट मामले में बिहार की पूर्व मंत्री मंजू वर्मा और उनके पति चंद्रशेखर वर्मा को दोषी ठहराते हुए सात साल की जेल की सजा सुनाई है।

बिहार की राजनीति से जुड़ी एक बड़ी कानूनी खबर में बेगूसराय की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने पूर्व समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा और उनके पति चंद्रशेखर वर्मा को आर्म्स एक्ट के मुकदमे में दोषी करार देते हुए सात साल की कैद की सजा सुनाई है। जज ब्रजेश कुमार सिंह की अदालत ने आठ वर्षों तक चली लंबी सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। सजा का ऐलान होते ही अदालत परिसर से ही दोनों दोषियों को न्यायिक हिरासत में लेकर बेगूसराय जेल भेज दिया गया।

सजा का पूरा ब्योरा और आर्थिक जुर्माना

अदालत ने मंजू वर्मा और उनके पति चंद्रशेखर वर्मा को आर्म्स एक्ट की अलग-अलग धाराओं के तहत दोषी पाया है। धारा 25-1(A) के अंतर्गत न्यायालय ने दोनों को सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई और साथ ही 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। यदि दोषी यह जुर्माना अदा नहीं करते हैं तो उन्हें एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा धारा 26 के तहत अदालत ने दोनों को पांच साल की जेल और 40 हजार रुपये जुर्माने का आदेश दिया, जिसमें जुर्माना न देने पर 10 महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया गया है। कानून के मुताबिक दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी। आपको बता दें कि मंजू वर्मा और चंद्रशेखर वर्मा चेरियाबरियारपुर से जदयू विधायक अभिषेक आनंद के माता-पिता हैं।

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वर्ष 2018 की छापेमारी और अवैध कारतूसों की बरामदगी

इस पूरे मामले की जड़ें वर्ष 2018 के बहुचर्चित मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड से जुड़ी हुई हैं। उस समय मंजू वर्मा बिहार सरकार में समाज कल्याण मंत्री के पद पर कार्यरत थीं। बालिका गृह मामले की जांच के दौरान जब उनका नाम सामने आया, तो केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपनी पड़ताल तेज कर दी। इसी कड़ी में 17 अगस्त 2018 को सीबीआई की टीम ने बेगूसराय जिले के श्रीपुर अर्जुन टोला स्थित मंजू वर्मा के पैतृक आवास पर जोरदार छापेमारी की थी।

तलाशी के दौरान जांच अधिकारियों को मकान के भीतर एक बंद कमरे में रखे बॉक्स से भारी मात्रा में अवैध कारतूस मिले। सीबीआई टीम ने वहां से कुल 50 जिंदा कारतूस जब्त किए थे। इस बरामदगी का ब्योरा बेहद चौंकाने वाला था, जिसमें.323 बोर की 18 गोलियां, 8 एमएम बोर की 10 गोलियां, 7.62 बोर की 19 गोलियां और.303 बोर के 6 कारतूस शामिल थे। मंत्री के आवास से इतनी बड़ी संख्या में प्रतिबंधित बोर के कारतूस मिलने से पूरे राज्य में हड़कंप मच गया था।

आठ साल लंबी कानूनी लड़ाई और फैसले का असर

अवैध कारतूसों की बरामदगी के तुरंत बाद सीबीआई के तत्कालीन पुलिस उप अधीक्षक (डीएसपी) उमेश प्रसाद ने चेरियाबरियारपुर थाने में आर्म्स एक्ट की धारा 143/2018 के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसके बाद मामले की जांच पूरी कर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल सात गवाहों को अदालत के समक्ष पेश किया गया, जिनकी गवाहियों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोनों को दोषी पाया। आठ साल तक चले इस चर्चित मामले में आए फैसले से बिहार के राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

सवाल-जवाब

मंजू वर्मा और उनके पति को अदालत ने कितनी सजा सुनाई है?
बेगूसराय एमपी-एमएलए कोर्ट ने मंजू वर्मा और उनके पति चंद्रशेखर वर्मा दोनों को सात साल के कारावास की सजा सुनाई है।
यह मामला किस घटना और किस वर्ष से संबंधित है?
यह मामला वर्ष 2018 के चर्चित मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड की जांच के दौरान दर्ज किया गया था।
सीबीआई की छापेमारी में क्या सामग्री बरामद हुई थी?
छापेमारी के दौरान उनके पैतृक आवास से विभिन्न बोर के कुल 50 अवैध जिंदा कारतूस बरामद हुए थे।
अदालत ने दोषियों पर कितना जुर्माना लगाया है?
अदालत ने धारा 25-1(A) में 50,000 रुपये और धारा 26 में 40,000 रुपये का जुर्माना लगाया है, जिसे न देने पर अतिरिक्त जेल काटनी होगी।
मंजू वर्मा का राजनीतिक परिचय क्या है?
मंजू वर्मा बिहार सरकार में पूर्व समाज कल्याण मंत्री रह चुकी हैं और उनके बेटे अभिषेक आनंद चेरियाबरियारपुर से जदयू विधायक हैं।
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