पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के बेलेघाटा इलाके में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तृणमूल कांग्रेस नेता राजू नस्कर को हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया है। कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने यह सख्त कदम जबरन वसूली करने और लोगों को डराने-धमकाने से जुड़ी कई संगीन प्राथमिकियों पर आगे बढ़ते हुए उठाया है। राज्य की राजधानी में सत्ताधारी पार्टी से जुड़े नेता पर इस कार्रवाई के बाद से पश्चिम बंगाल के सियासी माहौल में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। पुलिस प्रशासन की एक विशेष जांच टीम फिलहाल आरोपी नेता से जुड़े मामले के सभी कानूनी और व्यावहारिक पहलुओं की गहराई से पड़ताल कर रही है।
गैर-कानूनी संपत्ति और रंगदारी के मामलों की पड़ताल
राजू नस्कर के खिलाफ शुरू हुई कानूनी कार्रवाई की जड़ें पिछले कुछ समय से जारी राजनीतिक विवादों से जुड़ी हुई हैं। लगभग डेढ़ महीने पहले मुख्य मंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सार्वजनिक तौर पर राजू नस्कर के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए गंभीर आरोप मढ़े थे। उन्होंने कहा था कि तृणमूल कांग्रेस का यह नेता अनुचित साधनों का सहारा लेकर अवैध रूप से संपत्ति बटोरने के काम में लिप्त रहा है। इन बयानों के सामने आने के बाद से ही क्षेत्रीय राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया था।
अब पुलिस की ओर से रंगदारी मांगने, जबरन धनराशि वसूलने और स्थानीय नागरिकों को धमकियां देने के आधार पर राजू नस्कर की औपचारिक गिरफ्तारी की जा चुकी है। पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि दर्ज शिकायतों के आधार पर पर्याप्त साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं और मामले की निष्पक्ष जांच प्रक्रिया को बिना किसी पक्षपात के पूरा किया जाएगा।
पूर्व बर्धमान के मेमारी-1 में मृण्मय घोष पर हुई पुलिस कार्रवाई
तृणमूल कांग्रेस से ताल्लुक रखने वाले जनप्रतिनिधियों या नेताओं के खिलाफ पुलिस द्वारा सख्त कदम उठाए जाने का यह कोई अकेला मामला नहीं है। इससे पहले राज्य के पूर्व बर्धमान जिले में स्थित मेमारी इलाके से भी ऐसी ही एक बड़ी कार्रवाई सामने आ चुकी है। वहां टीएमसी के प्रभावशाली नेता और मेमारी-1 ब्लॉक पंचायत समिति में शिक्षा कर्माध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे मृण्मय घोष को पुलिस ने आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार किया था।
मृण्मय घोष के ऊपर तोलाबाजी यानी गैर-कानूनी वसूली करने तथा हत्या के प्रयास जैसी अत्यंत गंभीर धाराएं लगाई गई थीं। जिस समय पुलिस दस्ता आरोपी नेता को न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत में पेश करने ले जा रहा था, उस वक्त कोर्ट परिसर के बाहर एकत्रित लोगों ने उनके खिलाफ तीखी नारेबाजी की थी। हालांकि, मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान मृण्मय घोष ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह मनगढ़ंत करार दिया था। उन्होंने दावा किया था कि उन्हें राजनीतिक षड्यंत्र के तहत झूठे केस में फंसाया गया है और वे पूरी तरह बेगुनाह हैं।
कूचबिहार और उत्तर बंगाल में उदयन गुहा से जुड़े विवाद
पश्चिम बंगाल के राजनीतिक घटनाक्रमों में कई अन्य चर्चित चेहरे भी समय-समय पर गंभीर विवादों और आरोपों से घिरे रहे हैं। कूचबिहार और पूरे उत्तर बंगाल क्षेत्र की राजनीति में एक जाना-पहचाना नाम उदयन गुहा का माना जाता है। उदयन गुहा पर भी अतीत में मंचों से भड़काऊ बयानबाजी करने, हिंसा व मारपीट में शामिल रहने और चुनाव के दौरान गड़बड़ी व हिंसा भड़काने के संगीन आरोप दर्ज हो चुके हैं।
राजू नस्कर और मृण्मय घोष जैसे नेताओं पर दर्ज आपराधिक मामलों तथा हालिया गिरफ्तारियों ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति और नेताओं की जवाबदेही पर नए सिरे से बहस छेड़ दी है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि कानून के मुताबिक हर मामले में निष्पक्ष रूप से जांच आगे बढ़ाई जा रही है।



















