उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत के पूर्व निजी सचिव के परिसरों पर प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई से राज्य के सियासी गलियारों में भारी हलचल पैदा हो गई है। वर्ष 2016 में हुए ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती घोटाले से जुड़ी जांच के सिलसिले में केंद्रीय एजेंसी ने देहरादून स्थित ठिकानों पर छापेमारी कर बेनामी संपत्ति बरामद की। इस पूरी घटना के बाद हरीश रावत ने कांग्रेस पार्टी के सभी सांगठनिक दायित्वों से त्यागपत्र देने की पेशकश की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे नहीं चाहते कि उन पर लग रहे आरोपों का असर उनकी पार्टी के राष्ट्रीय अभियानों पर पड़े।
नकदी, सोना और लग्जरी घड़ियों की जब्ती
केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा जारी विवरण के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री के लंबे समय से सहयोगी रहे चंदन सिंह जीना के देहरादून आवास पर गहन तलाशी ली गई। चंदन सिंह जीना बीते लगभग 40 वर्षों से हरीश रावत के साथ विभिन्न पदों पर कार्य कर चुके हैं। छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने 32 लाख रुपये की अघोषित नकदी जब्त की। इसके अतिरिक्त, 200.5 ग्राम वजन के सोने के सिक्के व सोने की चेन तथा 12 महंगी लग्जरी कलाई घड़ियां भी बरामद की गईं। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जब्त और फ्रीज की गई पूरी चल संपत्ति का अनुमानित मूल्य लगभग 1.28 करोड़ रुपये आंका गया है।
2016 भर्ती परीक्षा में ओएमआर शीट धांधली
उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) द्वारा 2016 में आयोजित की गई ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई थीं। जांच में खुलासा हुआ कि आयोग की सुरक्षित हिरासत में रखी गई अभ्यर्थियों की ओएमआर उत्तर पुस्तिकाओं में सुनियोजित तरीके से फेरबदल किया गया था। बिचौलियों के माध्यम से अभ्यर्थियों से भारी रकम वसूली गई और अधूरी छोड़ी गई उत्तर पुस्तिकाओं को एक निजी कंप्यूटर एजेंसी के पास भेजा गया। वहां ओएमआर शीट में मनचाहे बदलाव करने के बाद उन्हें दोबारा सील कर दिया गया। इसी फर्जीवाड़े के वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने के लिए यह छापेमारी की गई है।
हरीश रावत की सफाई और सांगठनिक पदों से इस्तीफा
इस बड़े खुलासे के बाद हरीश रावत ने कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य पद के साथ-साथ उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी से भी हटने का निर्णय लिया। सोशल मीडिया पर एक विस्तृत संदेश साझा करते हुए उन्होंने अपने सहयोगी के साथ लंबे कार्यसंबंधों को स्वीकार किया, हालांकि उन्होंने आरोपों पर आश्चर्य भी जताया। उन्होंने अपनी बात रखते हुए लिखा,
"अगर ग्राम सेवकों की भर्ती में OMR शीट के साथ कोई छेड़छाड़ हुई है और उनकी तरफ से ऐसी गलती का कोई सबूत है, तो मैं उनके इस दुस्साहस से शर्मिंदा हूं।"
हरीश रावत ने अपने 3 साल के मुख्यमंत्री कार्यकाल का बचाव करते हुए कहा कि उनके शासन में युवाओं को रोजगार देने के उद्देश्य से ही चयन आयोग का गठन हुआ था और 42,000 से अधिक पारदर्शी सरकारी नियुक्तियां की गई थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक नैरेटिव गढ़ने के लिए उनके सहयोगियों को निशाना बनाया जा रहा है।
राहुल गांधी के अभियानों और कांग्रेस की राजनीति पर असर
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी देश भर में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के तहत युवाओं, रोजगार और पेपर लीक के मामलों को लेकर केंद्र व राज्य सरकारों को लगातार घेर रहे थे। इससे पहले झारखंड में भी भर्ती परीक्षा के प्रश्नों के लीक होने पर विवाद उत्पन्न हुआ था, जहां राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार पर सवाल उठाए थे। अब उत्तराखंड में कांग्रेस के शीर्ष नेता के नजदीकी सहयोगी का नाम सीधे भर्ती घोटाले से जुड़ने के कारण पार्टी को रक्षात्मक रणनीति अपनाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी को भी इस मुद्दे पर हमलावर होने का नया अवसर मिल गया है।



















