अक्सर रोजाना दाल, रोटी और साधारण सब्जी खाते-खाते भोजन का स्वाद एकरस लगने लगता है। ऐसे समय में थाली का जायका बदलने के लिए किसी चटपटे और तीखे व्यंजन की तलाश होती है। राजस्थान की पारंपरिक रसोई से निकली डुमरी तड़का चटनी इस कमी को बखूबी पूरा करती है। इस चटनी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे तैयार करने के लिए न तो मिक्सी या ब्लेंडर चलाने का झंझट है और न ही रसोई के चूल्हे के सामने देर तक खड़े रहने की जरूरत पड़ती है। घर में आसानी से मिलने वाली सब्जियों और मसालों के मेल से बनने वाली यह चटनी मिनटों में तैयार होकर साधारण भोजन को भी खास बना देती है।
रसोई में मौजूद सामान्य सामग्री से होती है तैयार
डुमरी तड़का चटनी बनाने के लिए किसी दुर्लभ सामग्री की आवश्यकता नहीं होती। इसके लिए घर में उपलब्ध बारीक कटा हुआ प्याज, लाल टमाटर और ताजा हरा धनिया मुख्य आधार बनते हैं। इनके साथ ही कुटा हुआ ताजा लहसुन और दरदरी पिसी हुई भुनी मूंगफली स्वाद और बनावट के लिए इस्तेमाल की जाती है। मसालों में तीखापन लाने के लिए लाल मिर्च पाउडर, स्वादानुसार सादा नमक और छौंक लगाने के लिए थोड़ा सा कुकिंग तेल चाहिए होता है। जो लोग तीखा खाना अधिक पसंद करते हैं, वे अपनी पसंद के अनुसार इसमें बारीक कटी हरी मिर्च भी शामिल कर सकते हैं।
बारीक कटाई और सही संतुलन है पहली सीढ़ी
इस चटनी को बनाने की शुरुआत सब्जियों की सही तैयारी से होती है। एक फैले हुए गहरे कटोरे में बारीक कटा प्याज और टमाटर डाला जाता है। प्याज और टमाटर को बहुत बड़ा काटने के बजाय जितना संभव हो बारीक काटना चाहिए, ताकि चटनी का हर चम्मच मुंह में घुलनशील महसूस हो और सभी अवयव आपस में अच्छी तरह मिल जाएं। इसके बाद इसमें ताजा कटा हरा धनिया डाला जाता है, जो चटनी को ताजगी भरी महक देता है। फिर इसमें कुटा हुआ लहसुन और भुनी हुई मूंगफली को दरदरा कूटकर मिलाया जाता है। लहसुन चटनी को एक तीखा और देसी फ्लेवर देता है, जबकि मूंगफली हर निवाले में एक सुखद क्रंच पैदा करती है। अंत में आवश्यकतानुसार लाल मिर्च पाउडर और नमक डालकर चम्मच से सभी सूखी चीजों को मिला लिया जाता है।
गर्म तेल का छौंक लाता है चटनी में असली जान
डुमरी तड़का चटनी का सबसे महत्वपूर्ण और निर्णायक चरण इसका तड़का है। एक छोटे तड़का पैन में थोड़ा सा तेल लेकर उसे तेज आंच पर अच्छी तरह गर्म किया जाता है। जब तेल से हल्का धुआं उठने लगे और वह पूरी तरह खौल जाए, तब गैस बंद करके उस गर्म तेल को सीधे कटोरे में रखे प्याज, टमाटर, लहसुन और मसालों के ऊपर उड़ेला जाता है। खौलता हुआ तेल पड़ते ही लहसुन और मसालों में तेज छनछनाहट होती है और पूरे रसोईघर में सौंधी सुगंध फैल जाती है। यह गर्म तेल प्याज और लहसुन के तीखे कच्चेपन को हल्का सा पका देता है, जिससे उनका तीखापन संतुलित हो जाता है और सारे मसाले आपस में एकसार हो जाते हैं। इसके तुरंत बाद चम्मच की मदद से पूरे मिश्रण को अच्छी तरह मिला लिया जाता है।
झटपट बनने वाला यह विकल्प हर थाली के लिए मुफीद
कभी-कभी जब व्यस्त दिनचर्या के कारण सब्जी पकाने का मन न हो या घर पर अचानक बिना बताए मेहमान आ जाएं, तब यह चटनी एक संपूर्ण साइड डिश का काम करती है। इसे बनाने में बमुश्किल पांच से सात मिनट का समय लगता है। यह चटनी स्वाद में जितनी चटपटी है, उतनी ही यह देखने में भी आकर्षक लगती है। फीके या सादे खाने के साथ यह चटनी एक नया उत्साह जोड़ देती है, जिससे खाने वाले की भूख खुद-ब-खुद बढ़ जाती है।
पारंपरिक रोटियों और सादे भोजन के साथ बेहतरीन संगम
राजस्थान में इस चटनी को अक्सर पारंपरिक बाजरे की गर्म रोटी या मक्के की रोटी के साथ परोसा जाता है। बाजरे की सोंधी रोटी पर मक्खन या घी लगाकर जब इस तीखी और क्रंची चटनी के साथ खाया जाता है, तो इसका स्वाद लाजवाब हो जाता है। इसके अलावा सामान्य दिनों में इसे गेहूं के सादे या अजवाइन वाले पराठे, पूरी अथवा सादी दाल और चावल के साथ भी आसानी से परोसा जा सकता है। हर तरह के भोजन के साथ यह अपना अलग और विशिष्ट प्रभाव छोड़ती है।


















