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बीके हरिप्रसाद के बयान से गरमाई राजनीति: दिल्ली दंगा आरोपी उमर खालिद को 'राष्ट्रवादी' कहने पर उठा विवादराजनीति
16 सित॰ 2026, 5:52 pm (40 दिन पहले)· 1

बीके हरिप्रसाद के बयान से गरमाई राजनीति: दिल्ली दंगा आरोपी उमर खालिद को 'राष्ट्रवादी' कहने पर उठा विवाद

कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद द्वारा दिल्ली दंगे के आरोपी उमर खालिद को 'राष्ट्रवादी' बताए जाने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। उमर खालिद फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों की कथित साजिश के सिलसिले में UAPA के तहत सितंबर 2020 से जेल में बंद हैं।

कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद के एक ताजा बयान ने देश के राजनीतिक हलकों में नया विवाद खड़ा कर दिया है। बीके हरिप्रसाद ने दिल्ली दंगों के मुख्य आरोपियों में शामिल उमर खालिद को 'राष्ट्रवादी' करार दिया है। इस टिप्पणी के सामने आने के बाद राजनीतिक बहसों का दौर तेज हो गया है और आलोचक इसे देश की न्यायिक प्रक्रिया तथा राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल उठाने वाला कदम बता रहे हैं।

अदालती फैसलों और जमानत याचिकाओं का इतिहास

उमर खालिद पिछले छह सालों से जेल में बंद हैं। पुलिस जांच और न्यायिक कार्यवाही के दौरान निचली अदालत से लेकर दिल्ली हाईकोर्ट तक ने उनकी जमानत याचिकाओं को खारिज किया है। अदालतों ने पुलिस द्वारा पेश किए गए रिकॉर्ड और साक्ष्यों का अवलोकन करते हुए माना कि दिल्ली दंगों के पीछे एक पूर्व-नियोजित और सुनियोजित साजिश की मजबूत संभावना दिखाई देती है।

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देश की शीर्ष अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट से भी उमर खालिद को कोई तात्कालिक कानूनी राहत नहीं मिल सकी, जिसके बाद उन्हें अपनी याचिकाएं वापस लेनी पड़ी थीं। संवैधानिक अदालतों द्वारा साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया आरोपों की गंभीरता स्वीकार किए जाने के बावजूद राजनीतिक मंच से उन्हें देशभक्ति का प्रमाणपत्र दिए जाने पर कानूनी और राजनीतिक विशेषज्ञों ने कड़ा एतराज जताया है।

2020 के दिल्ली दंगे और जांच एजेंसियों के दावे

फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा में कुल 53 बेकसूर लोगों की जान चली गई थी, जबकि 700 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस हिंसा के दौरान करोड़ों रुपये की संपत्ति, घर और दुकानें जलाकर खाक कर दी गई थीं। दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा ने इस पूरे घटनाक्रम की गहन जांच के बाद सितंबर 2020 में उमर खालिद को गिरफ्तार किया था।

जांच एजेंसियों द्वारा अदालत में दाखिल की गई चार्जशीट के अनुसार, यह हिंसा अचानक भड़का कोई उपद्रव नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक गहरी साजिश रची गई थी। पुलिस के पास मौजूद कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स, खुफिया बैठकों के ब्योरे और कई प्रत्यक्षदर्शियों व गवाहों के बयानों में यह दावा किया गया है कि CAA और NRC के विरोध प्रदर्शनों की आड़ में सड़कों को बंद करने तथा एक वर्ग विशेष को उकसाने की योजना बनाई गई थी।

अंतरराष्ट्रीय ध्यान और जेएनयू का पुराना इतिहास

जांच रिपोर्टों में यह उल्लेख भी किया गया है कि जब अमेरिकी राष्ट्रपति भारत की आधिकारिक यात्रा पर थे, ठीक उसी समय दिल्ली में व्यापक अशांति फैलाने की योजना बनाई गई ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि को प्रभावित किया जा सके। इसके अलावा उमर खालिद का नाम जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के उस दौर से भी जोड़ा जाता रहा है, जब कैंपस के भीतर विवादास्पद और देशविरोधी नारेबाजी की घटनाएं हुई थीं।

आलोचकों का कहना है कि बाटला हाउस एनकाउंटर से लेकर JNU की घटनाओं तक राजनीतिक तुष्टिकरण के लिए सुरक्षा एजेंसियों के कदमों पर सवाल उठाने की परिपाटी रही है। इस तरह के बयानों से उन सुरक्षाकर्मियों का भी अपमान होता है जिन्होंने अपनी ड्यूटी के दौरान अपनी जान गवाएं।

शहीद जवानों के परिजनों के दर्द पर सवाल

दिल्ली दंगों की इस भयानक हिंसा में दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल रतन लाल और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा की दुखद मौत हो गई थी। इसके साथ ही दर्जनों बेकसूर नागरिकों को अपनी जान और संपत्ति का नुकसान सहना पड़ा था।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब किसी गंभीर आतंकी कानून (UAPA) के तहत विचाराधीन आरोपी को महिमामंडित किया जाता है, तो यह हिंसा का शिकार हुए आम नागरिकों और शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाता है। राष्ट्रवाद और देशभक्ति जैसे विषयों पर राजनीतिक रोटियां सेकने के बजाय देश के कानून और न्यायपालिका के फैसलों का सम्मान किया जाना चाहिए।

सवाल-जवाब

बीके हरिप्रसाद ने उमर खालिद के बारे में क्या बयान दिया है?
कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद ने दिल्ली दंगा मामले के आरोपी उमर खालिद को 'राष्ट्रवादी' करार दिया है, जिससे राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
उमर खालिद किस मामले में और कब से जेल में बंद हैं?
उमर खालिद फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के आरोप में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत सितंबर 2020 से जेल में बंद हैं।
2020 के दिल्ली दंगों में कितना नुकसान हुआ था?
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए इन दंगों में 53 लोगों की जान चली गई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे, साथ ही भारी संपत्ति का नुकसान हुआ था।
क्या उमर खालिद को अदालतों से जमानत मिली है?
नहीं, निचली अदालत, दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से उमर खालिद को जमानत की राहत नहीं मिल सकी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Ravikash Gupta@ravikash·40 दिन पहले

संवेदनशील राष्ट्रीय सुरक्षा और न्यायिक मामलों पर राजनीतिक बयानबाजी भारत की वैश्विक छवि को प्रभावित करती है। अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और व्यवसायों के लिए देश की राजनीतिक स्थिरता और कानून का शासन बेहद महत्वपूर्ण कारक होते हैं। जब राजनेता दंगों जैसे गंभीर मामलों में अदालती फैसलों और जांच एजेंसियों की कार्रवाई को राजनीतिक रंग देते हैं, तो इससे संस्थागत विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं। वैश्विक बाजार देश के जोखिम मूल्यांकन को बारीकी से देखते हैं, ऐसे में सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर स्पष्ट रुख आर्थिक स्थिरता और निवेश के लिए आवश्यक है।

Rohan Verma@rohan-verma·40 दिन पहले

सांप्रदायिक हिंसा के संवेदनशील मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को चुनौती देने वाली राजनीतिक बयानबाजी सीधे तौर पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के प्रशासनिक प्रयासों को कमजोर करती है। जब क्षेत्रीय नेता राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े उप-विचाराधीन मामलों का राजनीतिकरण करते हैं, तो इससे जमीनी स्तर पर ध्रुवीकरण बढ़ता है और पुलिस व न्यायपालिका जैसी संस्थाओं पर जनता का भरोसा डगमगाता है। उत्तर प्रदेश जैसे संवेदनशील राज्यों में, जहां कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना शासन की सबसे बड़ी चुनौती है, ऐसे बयानों से क्षेत्रीय सुरक्षा प्रभावित होती है और जमीनी स्तर पर विकास नीतियां बाधित होती हैं।

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