एंथ्रोपिक के आईपीओ दस्तावेजों से खुलासे, जानें कैसे बना रही है अपने कस्टमर्स को लॉयलबाराबंकी का पौराणिक पारिजात वृक्ष बना शिव भक्तों का केंद्र, भगवान शिव को चढ़ाए जाते हैं इसके सुनहरे फूलवर्ल्ड अंडर-19 बॉक्सिंग में आदित्य का कमाल, खिताबी मुकाबले में पक्की की जगहऐप्पल का फोल्डेबल फोन मार्केट में आते ही विवादों में, स्क्रीन टूटने की शिकायतों के बीच आईफिक्सिट ने खोली सच्चाईअनुराधा पौडवाल ने चरम कामयाबी के बीच क्यों छोड़ दी थी फिल्मी दुनियामौत के बाद अब खाद बनेगा इंसानी शरीर, ऑस्ट्रेलिया के इस राज्य ने दी अनोखी कानूनी मंजूरीसोने की चाल 4,000 डॉलर के पास अटकी, सिस्टमैटिक बिकवाली के बीच केंद्रीय बैंकों की खरीदारी ने संभाला मोर्चाईसीबी की नीतिगत बैठक और फ्रांस के बॉन्ड संकट के बीच वैश्विक मुद्रा बाजारों में हलचलरजनीकांत की 'जेलर 2' ने 12वें दिन पार किया 400 करोड़ का आंकड़ा, बनी सबसे बड़ी तमिल फिल्मअरुणाचल सीमा विवाद पर बीजिंग की प्रतिक्रिया, भारत से सहयोग की अपील
ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में लूला दा सिल्वा की जीत पर पिनराई विजयन ने भरी हुंकार, वामपंथ की ताकत पर दिया जोरराजनीति
26 अक्तू॰ 2026, 2:55 pm (14 घंटे पहले)· 3

ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में लूला दा सिल्वा की जीत पर पिनराई विजयन ने भरी हुंकार, वामपंथ की ताकत पर दिया जोर

केरल के नेता पिनराई विजयन ने ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा की जीत पर बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह जीत दक्षिणपंथी राजनीति का मुकाबला करने का रास्ता दिखाती है।

केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने 26 अक्टूबर को ब्राजील के राष्ट्रपति पद के लिए चौथी बार ऐतिहासिक जीत हासिल करने वाले लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा को अपनी शुभकामनाएं दी हैं। इस मौके पर उन्होंने कहा कि यह शानदार जीत इस बात की पक्की गवाही देती है कि वामपंथी राजनीति आज भी उतनी ही प्रासंगिक है और जनता के बीच इसकी जड़ें गहरी हैं। विजयन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी और कहा कि लूला दा सिल्वा की लगातार मिल रही चुनावी सफलताएं इस बात का पुख्ता सबूत पेश करती हैं कि मेहनतकश कामगार वर्ग अपने आने वाले कल को खुद गढ़ने में बहुत बड़ी भूमिका अदा कर सकता है।

श्रमिक अधिकारों और समानता पर जोर

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए मार्क्सवादी नेता ने दुनिया भर के वामपंथी समर्थकों को संदेश दिया कि ब्राजील से लेकर भारत तक के राजनीतिक हालात से एक बहुत साफ सबक मिलता है। उनका कहना था कि दक्षिणपंथी ताकतों और उनकी राजनीति का डटकर मुकाबला करने के लिए केवल विरोध काफी नहीं है, बल्कि श्रमिकों के पुख्ता अधिकारों, सामाजिक न्याय और बराबरी पर आधारित एक मजबूत व्यवस्था का विकल्प खड़ा करने की जरूरत है। विजयन ने इस बात पर भी जोर दिया कि इस वैश्विक बदलाव और लूला की सफलता से देश में भी एक नई उम्मीद जगती है।

ये भी पढ़ें

विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ संघर्ष

विजयन के मुताबिक, ब्राजील के नेता की यह ऐतिहासिक सफलता देश में संघ परिवार की कथित विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ चल रहे संघर्ष को नई ताकत देती है। इससे एक ज्यादा न्यायपूर्ण, समतावादी और लोकतांत्रिक देश के निर्माण की उम्मीदें फिर से मजबूत होती हैं। दूसरी ओर, ब्राजील के निर्वाचन कार्यालय की ओर से जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सभी मतों की गिनती का काम पूरा होने के बाद वर्कर्स पार्टी के नेता लूला को उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी फ्लावियो बोल्सोनारो के मुकाबले करीब 44 लाख ज्यादा वोट हासिल हुए। इस तरह लूला दा सिल्वा ने कुल पड़े मतों में से 51.8 प्रतिशत हिस्सा अपने नाम किया।

सवाल-जवाब

पिनराई विजयन ने किस नेता को बधाई दी?
पिनराई विजयन ने ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा को बधाई दी।
लूला दा सिल्वा ने कौन सा चुनाव जीता है?
उन्होंने ब्राजील के राष्ट्रपति पद के लिए चौथी बार ऐतिहासिक जीत हासिल की है।
लूला दा सिल्वा को कितने प्रतिशत वोट मिले?
लूला को कुल मतों में 51.8 प्रतिशत मत हासिल हुए।
लूला दा सिल्वा के प्रतिद्वंद्वी का क्या नाम था?
उनके प्रतिद्वंद्वी का नाम फ्लावियो बोल्सोनारो था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Amit Patel@amit-patel·2 घंटे पहले

चौथी बार जीतना अपने आप में बड़ी बात है, लूला का जलवा अभी भी कायम है।

Ravikash Gupta@ravikash·10 घंटे पहले

लूला की इस जीत से दुनिया भर के वामपंथी दलों में एक नया जोश आ गया है। भारत के मोर्चे पर भी इसका असर दिख सकता है।

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·10 घंटे पहले

रविकेश, फलावी बोल्सोनारो के मुकाबले 44 लाख ज्यादा वोटों का अंतर वाकई बहुत बड़ा है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·10 घंटे पहले

ब्राजील के चुनाव नतीजों का असर दूर तक दिखता है। जब वहां अदालत और चुनाव आयोग के फैसले के बाद सरकार बदलती है, तो हमारी अदालतों और चुनावी बहसों में भी इन उदाहरणों का जिक्र होने लगता है।

Rohan Verma@rohan-verma·10 घंटे पहले

करण भाई, बाहर की जीत का असर यहाँ सिर्फ चुनावी बहसों तक ही सीमित रहता है, ज़मीन पर असल मुकाबला तो यहाँ की लोकल राजनीति से ही लड़ना पड़ता है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp