मुंबई में नगर निगम प्रशासन द्वारा आधिकारिक मेयर बंगले के सौंदर्यीकरण और नवीनीकरण पर ₹2.9 करोड़ अतिरिक्त खर्च करने का नया प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। यह नया वित्तीय प्रस्ताव ऐसे समय पर सामने आया है जब महज चार महीने पहले ही इस ऐतिहासिक बंगले की मरम्मत पर ₹2.4 करोड़ खर्च किए जा चुके थे। विपक्षी दलों ने सार्वजनिक धन के इस तरह बार-बार हो रहे इस्तेमाल पर कड़ा ऐतराज जताते हुए नगर निकाय की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
एक साल से कम समय में ₹5.3 करोड़ तक पहुंचेगा खर्च
भायखला स्थित यह आधिकारिक मेयर बंगला लगभग 6,000 वर्ग फुट में फैला हुआ एक ऐतिहासिक हेरिटेज भवन है, जो भायखला जू और उद्यान परिसर के भीतर बना हुआ है। हाल ही में हुए नवीनीकरण के बाद भी बीएमसी ने एक बार फिर मरम्मत और नए अपडेट का प्रस्ताव तैयार किया है। यदि इस नए प्रस्ताव को हरी झंडी मिल जाती है, तो एक साल से भी कम अवधि के भीतर इस अकेले बंगले के रखरखाव और जीर्णोद्धार पर कुल खर्च ₹5.3 करोड़ (₹2.4 करोड़ पुराना खर्च और ₹2.9 करोड़ नया प्रस्ताव) हो जाएगा।
आदित्य ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने बीएमसी पर साधा निशाना
शिवसेना विधायक आदित्य ठाकरे ने मुंबई के आम नागरिकों के पैसे की बर्बादी का आरोप लगाते हुए बीएमसी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि नगर निगम द्वारा मुंबईकरों की गाढ़ी कमाई का पैसा बीजेपी मेयर की मर्जी पर पानी की तरह बहाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले बंगले की मरम्मत पर करोड़ों रुपये फूंक दिए जाते हैं, फिर नई आधिकारिक गाड़ियों की मांग रखी जाती है और अब महज चार महीने बाद दोबारा रिनोवेशन का प्रस्ताव ला दिया गया है। वहीं उद्धव ठाकरे ने भी लग्जरी गाड़ियों की खरीद और बंगले के बार-बार जीर्णोद्धार पर सवाल उठाते हुए इसे करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग करार दिया।
रिनोवेशन का तकनीकी खाका और टेंडर की शर्तें
प्रस्तावित ₹2.9 करोड़ के रिनोवेशन कार्य में कई प्रमुख कार्य शामिल किए गए हैं। इसके तहत हेरिटेज भवन के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण के साथ-साथ संपूर्ण विद्युत एवं प्लंबिंग से जुड़े नए काम किए जाएंगे। इसके अलावा शोर को कम करने के लिए बायो-एब्जॉर्बेंट नॉइज बैरियर पैनल लगाने का विशेष प्रावधान भी रखा गया है। बीएमसी ने इस पूरे काम के लिए आधिकारिक टेंडर जारी कर दिया है। ठेके की शर्तों के अनुसार यह निर्माण कार्य मानसून के तीन महीनों की अवधि के भीतर पूरा किया जाना है। साथ ही बोली लगाने वाली इच्छुक कंपनियों को अपनी बिड जमा करने से पहले स्थल का भौतिक निरीक्षण करना अनिवार्य किया गया है।
नेताओं की गाड़ियों और सुविधाओं पर पहले भी हो चुका है विवाद
बीएमसी में जनप्रतिनिधियों की सुविधाओं पर होने वाले खर्च का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले जनप्रतिनिधियों के लिए पुरानी स्कॉर्पियो एन गाड़ियों को हटाकर नई इनोवा क्रिस्टा गाड़ियां खरीदने के प्रस्ताव पर भी भारी बवाल हुआ था। उस समय तर्क दिया गया था कि स्कॉर्पियो एन गाड़ी में लंबे समय तक बैठने से नेताओं को कमर में दर्द की शिकायत हो रही है। गाड़ियों के उस विवाद के ठीक बाद अब बंगले के पुनरुद्धार का यह नया प्रस्ताव सामने आने से प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर सवाल गहरा गए हैं।



















