नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच कूटनीतिक मोर्चे पर एक बार फिर सरगर्मी बढ़ गई है और दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिशों को नई गति मिल रही है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल और चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई है, जिसके बाद ड्रैगन की तरफ से एक महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। इस चर्चा के दौरान दोनों देशों के आपसी संबंधों को पटरी पर लाने और पूर्व में बनी सहमतियों को आगे बढ़ाने पर गंभीर मंथन किया गया है।
शी जिनपिंग और नरेंद्र मोदी की बैठकों का जिक्र
चीनी उपराष्ट्रपति हान झेंग ने बातचीत के दौरान पिछले दो वर्षों के घटनाक्रम का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस अवधि के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच कजान और तियानजिन में दो अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णायक बैठकें हो चुकी हैं। इन दोनों शीर्ष नेताओं के बीच हुई मुलाकातों के दौरान सीमा विवाद को सुलझाने और लंबे समय से ठप पड़े द्विपक्षीय संबंधों को फिर से पटरी पर लाने को लेकर कई अहम और दूरगामी सहमतियां बनी थीं, जिनका असर अब जमीन पर दिखना चाहिए।
रिश्तों को रणनीतिक नजरिए से देखने की अपील
चीनी पक्ष की ओर से इस बात पर विशेष बल दिया गया कि भारत और दोनों पड़ोसी देशों को अपने आपसी संबंधों को किसी तात्कालिक घटना के बजाय रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखने की आवश्यकता है। हान झेंग ने स्पष्ट किया कि दोनों नेताओं की बैठकों में जो आपसी समझ विकसित हुई है, उसने द्विपक्षीय रिश्तों को सुधार और स्थिरता के मार्ग पर वापस लाने में एक बहुत बड़ी और सकारात्मक भूमिका निभाई है, जिसे आगे भी बरकरार रखा जाना चाहिए।
समझौतों को जमीन पर उतारने का वक्त
बैठक के अंत में चीनी उपराष्ट्रपति ने आह्वान किया कि अब केवल सैद्धांतिक सहमति तक सीमित रहने का समय नहीं है, बल्कि दोनों देशों को मिलकर शीर्ष स्तर पर तय किए गए समझौतों को संयुक्त रूप से जमीन पर लागू करना चाहिए। उनका मानना है कि ऐसा करने से दोनों पड़ोसी देशों के बीच आपसी विश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और सीमावर्ती क्षेत्रों तथा व्यापक स्तर पर दीर्घकालिक शांति की बहाली सुनिश्चित हो सकेगी।




















