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चुनाव आयोग के कामकाज की समीक्षा हो, शीर्ष अदालत में PIL दाखिल कर उठी मांगराजनीति
24 अक्तू॰ 2026, 5:21 pm (3 दिन पहले)· 2

चुनाव आयोग के कामकाज की समीक्षा हो, शीर्ष अदालत में PIL दाखिल कर उठी मांग

सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल कर निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली की जांच की मांग की गई है। याचिका में चुनाव प्रचार के दौरान धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल पर रोक लगाने और पूर्व मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति गठित करने का आग्रह किया गया है।

देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनाव संचालन प्रक्रिया को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में एक नई कानूनी अर्जी लगाई गई है। भारतीय निर्वाचन आयोग के कामकाज में कथित कमियों को दुरुस्त करने और चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया गया है। इस जनहित याचिका के जरिए न्यायपालिका से आग्रह किया गया है कि वह देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के वास्ते तुरंत कदम उठाए।

पूर्व मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व में हो उच्चस्तरीय जांच

याचिकाकर्ता और वकील विशाल तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई है कि निर्वाचन आयोग की कार्यशैली की गहराई से जांच के लिए एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाए। इस प्रस्तावित कमेटी की कमान भारत के किसी पूर्व मुख्य न्यायाधीश या शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को सौंपे जाने का प्रस्ताव रखा गया है। याचिका के अनुसार, लोकतंत्र की रीढ़ मजबूत बनाए रखने के लिए नागरिकों का चुनाव निकाय पर पूरा भरोसा होना बेहद जरूरी है और यह न्यायिक समीक्षा उसी भरोसे को पुख्ता करेगी।

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चुनावी रैलियों में धर्म के इस्तेमाल पर लगे पूर्ण प्रतिबंध

इस कानूनी अर्जी का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा चुनाव प्रचार के दौरान बढ़ते सांप्रदायिक तनाव और धार्मिक ध्रुवीकरण को रोकना है। याचिका में अदालत से मांग की गई है कि राजनीतिक दलों और उनके उम्मीदवारों को प्रचार के वक्त धार्मिक पहचान भुनाने, प्रतीकों का प्रदर्शन करने या आस्था से जुड़ी भावुक अपील करने से सख्त रूप से रोका जाए। चुनाव के दौरान वोटों के ध्रुवीकरण के लिए अक्सर धार्मिक भावनाओं को आहत किया जाता है, जिससे समाज में दरार पैदा होती है।

हेट स्पीच और भड़काऊ बयानों पर सख्त कार्रवाई का आग्रह

याचिका में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि नफरती भाषणों के माध्यम से जनमानस को उकसाने वालों पर आयोग को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। चुनाव प्रचार का आधार केवल विकास कार्य, नीतियां और जनता से जुड़े मुद्दे होने चाहिए, न कि किसी तरह का संकीर्ण एजेंडा। जनप्रतिनिधित्व कानून के नियमों को ताक पर रखने वालों के खिलाफ कड़े कदम उठाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों की आवश्यकता जताई गई है, और आने वाले दिनों में शीर्ष अदालत इस मामले पर सुनवाई कर सकती है।

सवाल-जवाब

यह जनहित याचिका किसने दायर की है?
यह जनहित याचिका अधिवक्ता विशाल तिवारी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है।
याचिका में किस मुख्य समिति के गठन की मांग की गई है?
याचिका में निर्वाचन आयोग के कामकाज की जांच के लिए पूर्व मुख्य न्यायाधीश या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति बनाने का आग्रह किया गया है।
याचिका का चुनाव प्रचार से जुड़ा मुख्य मुद्दा क्या है?
याचिका में चुनाव प्रचार के दौरान धार्मिक प्रतीकों के प्रदर्शन, धार्मिक पहचान के इस्तेमाल और सांप्रदायिक अपील पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की गई है।
हेट स्पीच को लेकर याचिका में क्या कहा गया है?
याचिका में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग को नफरती भाषणों के जरिए धार्मिक भावनाओं को भड़काने की कोशिशों पर तत्काल और प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।
इस याचिका पर आगे क्या होने की संभावना है?
शीर्ष अदालत आने वाले दिनों में इस जनहित याचिका पर सुनवाई कर सकती है।
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टिप्पणियाँ 5

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·2 दिन पहले

चुनाव के वक्त धर्म का इस्तेमाल और नफरत भरे भाषण सचमुच चिंता की बात हैं। लोकतंत्र को बचाने के लिए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पारदर्शी और सख्त होनी चाहिए ताकि निष्पक्ष चुनाव हो सकें।

Ravikash Gupta@ravikash·2 दिन पहले

पिछले चुनाव के दौरान मैंने खुद देखा था कि कैसे एक रैली में धार्मिक नारों से माहौल तनावपूर्ण हो गया था। धर्म का इस्तेमाल राजनीति में रुकना ही चाहिए।

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·2 दिन पहले

रविकेश जी, आपकी बात बिल्कुल सही है। पर क्या सच में कोई पूर्व जज इस समिति की कमान संभालेंगे और राजनीतिक दल कभी मानेंगे?

Rohan Verma@rohan-verma·2 दिन पहले

चुनाव में धर्म के इस्तेमाल और प्रतीकों पर रोक की बात सही है, लेकिन क्या अकेले याचिका से नेता मान जाएंगे?

Karan Malhotra@karan-malhotra·2 दिन पहले

रोहन भाई, नेताओं का तो पता नहीं पर पिछली बार जब मैं एक चुनावी रैली कवर कर रहा था, तो धार्मिक नारों से माहौल इतना बिगड़ गया था कि पुलिस को बीच-बचराव करना पड़ा था।

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