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चुनाव नतीजों पर सवाल उठाने पर भड़के शिवराज चौहान, मल्लिकार्जुन खरगे और कांग्रेस पर साधा तीखा निशानाराजनीति
4 अक्तू॰ 2026, 11:30 am (23 दिन पहले)· 1

चुनाव नतीजों पर सवाल उठाने पर भड़के शिवराज चौहान, मल्लिकार्जुन खरगे और कांग्रेस पर साधा तीखा निशाना

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पर हार के बाद जनादेश और चुनाव आयोग का अपमान करने का आरोप लगाते हुए कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कर्नाटक और तेलंगाना की जीत का हवाला देकर कांग्रेस के दोहरे रवैये पर सवाल खड़े किए।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और मुख्य विपक्षी दल पर तीखे प्रहार करते हुए आरोप लगाया है कि चुनावी शिकस्त मिलने के बाद जनादेश को खारिज करना पार्टी की पुरानी फितरत बन चुका है। चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और मतदान प्रक्रिया को लेकर विपक्षी खेमे की तरफ से उठाए जा रहे सवालों पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि जब भी चुनावी नतीजे कांग्रेस के खिलाफ जाते हैं, पार्टी संवैधानिक संस्थाओं पर ठीकरा फोड़ने लगती है।

जीत पर आयोग सही, हार पर गलत: तीन राज्यों का दिया हवाला

शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस के दोहरे मानदंड पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी जब कहीं विजय हासिल करती है तब उसे चुनाव आयोग की निष्पक्षता में कोई खोट नजर नहीं आता। उन्होंने पूछा कि अगर देश की चुनावी व्यवस्था में ही कोई गड़बड़ी है, तो कांग्रेस कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में सरकार बनाने में कैसे सफल रही? केंद्रीय मंत्री के अनुसार, जीत का सेहरा खुद बांधना और पराजय मिलते ही आयोग को कटघरे में खड़ा करना विपक्ष के गैर-जिम्मेदाराना रवैये को उजागर करता है।

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बैलेट पेपर की मांग पर घेरा, तकनीकी सुधारों का किया बचाव

मतपत्रों के जरिए चुनाव कराने की विपक्ष की लगातार उठ रही मांग को आड़े हाथों लेते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि कांग्रेस देश की चुनावी प्रक्रिया को 80 और 90 के दशक के दौर में पीछे धकेलना चाहती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक तकनीक के समावेश ने मतदान और मतगणना की पूरी प्रणाली को बेहद पारदर्शी बना दिया है। ऐसे में पारदर्शी व्यवस्था को नकारते हुए पुराने ढर्रे पर लौटने की मांग करना समझ से परे है और यह प्रगतिशील भारत की सोच के खिलाफ है।

आपातकाल की याद दिलाते हुए संवैधानिक संस्थाओं पर हमले का आरोप

संवैधानिक मर्यादाओं का जिक्र करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने आरोप लगाया कि हार का सामना करने पर चुनाव आयोग को बदनाम करना और स्वायत्त संस्थाओं के ढांचे को चोट पहुंचाना कांग्रेस के डीएनए का हिस्सा है। उन्होंने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए कहा कि कांग्रेस पहले भी आपातकाल थोपकर देश के लोकतंत्र को गहरी चोट पहुंचा चुकी है। वर्तमान समय में भी संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करके एक बेहद खतरनाक राजनीतिक खेल खेला जा रहा है।

अराजकता की राह पर जाने की चेतावनी

केंद्रीय मंत्री ने चेताया कि देश की स्थापित संस्थाओं और प्रक्रियाओं को बार-बार कटघरे में खड़ा करके उन्हें ध्वस्त करने का प्रयास राष्ट्रहित के लिए बेहद घातक साबित हो सकता है। यह रवैया समाज और राजनीति को अराजकता की तरफ धकेलने जैसा है। उन्होंने भरोसा जताया कि कांग्रेस के इस प्रकार के मंसूबे और नापाक इरादे कभी सफल नहीं हो पाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए सभी राजनीतिक दलों से परिपक्वता और जिम्मेदारी भरा आचरण करने की अपील की।

सवाल-जवाब

शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस और मल्लिकार्जुन खरगे पर क्या आरोप लगाए?
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव हारने के बाद जनादेश का अपमान करना और संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करना कांग्रेस की पुरानी आदत है।
केंद्रीय मंत्री ने कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश का जिक्र क्यों किया?
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर चुनाव आयोग की व्यवस्था गलत थी, तो कांग्रेस इन तीनों राज्यों में चुनाव कैसे जीत गई।
मतपत्र से चुनाव कराने की मांग पर शिवराज चौहान का क्या रुख रहा?
उन्होंने कहा कि मतपत्रों की मांग करके कांग्रेस देश को 80 और 90 के दशक में वापस धकेलना चाहती है, जबकि तकनीक ने व्यवस्था में पारदर्शिता लाई है।
शिवराज सिंह चौहान ने आपातकाल का उल्लेख किस संदर्भ में किया?
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने आपातकाल लगाकर पहले भी लोकतंत्र को कमजोर किया था और अब वह संस्थाओं पर सवाल उठाकर खतरनाक खेल खेल रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·22 दिन पहले

हारने पर ईवीएम और जीतने पर वही सिस्टम सही, ये गणितीय विरोधाभास समझ से बाहर है। राजनीति में भी अंकों का संतुलन और ईमानदारी होना बहुत जरूरी है, वरना विश्वास कैसे बनेगा?

Ravikash Gupta@ravikash·22 दिन पहले

शिवराज जी का यह कहना सही है कि कांग्रेस जीत पर ईवीएम या आयोग को नहीं कोसती, पर इसका मतलब यह तो नहीं कि विपक्ष कभी किसी तकनीकी या प्रक्रियागत कमी पर सवाल भी न उठा सके। लोकतंत्र में कमियों पर बात करना गलत नहीं है।

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·22 दिन पहले

रविकान्त जी, आपकी बात तो ठीक है पर क्या वाकई बैलेट पेपर पर लौटना सही रहेगा?

Karan Malhotra@karan-malhotra·22 दिन पहले

हार के बाद चुनाव आयोग पर सवाल उठाना गलत है, पर ईवीएम पर पूरी तरह से आंख मूंद लेना भी तो ठीक नहीं है।

Rohan Verma@rohan-verma·22 दिन पहले

करण जी, यूपी के हालिया उपचुनावों में भी हारते ही यही खेल शुरू हो गया था। ईवीएम और आयोग पर ठीकरा फोड़ने से ज़मीनी हक़ीक़त थोड़ी बदल जाएगी।

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