बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दिसंबर में अपने स्वदेश लौटने का ऐलान कर राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। एक वर्चुअल कार्यक्रम में जुड़ते हुए 79 वर्षीय नेता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें मौत या गिरफ्तारी का कोई डर नहीं है। ढाका में उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट और कोर्ट से मृत्युदंड का फरमान जारी होने के बावजूद उनके इस तेवर ने सभी को चौंका दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनकी मौत लिखी है, तो वह उसी भूमि पर आनी चाहिए जहां उनके माता-पिता की हत्या की गई थी और उनका खून बहा था।
माता-पिता की शहादत और मातृभूमि से जुड़ाव
कार्यक्रम के दौरान शेख हसीना ने अपने देश लौटने के इरादे को पूरी दृढ़ता से सामने रखा। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का पूरा अहसास है कि स्वदेश लौटने पर उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है, प्रताड़ित किया जा सकता है या जान से भी मारा जा सकता है, लेकिन इसके बावजूद उनके मन में कोई भय नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि वह पहले भी गिरफ्तारी और यातनाओं का सामना कर चुकी हैं। उनके अनुसार, जब उनके प्यारे देशवासी कठिनाइयों और दुखों का सामना कर रहे हैं, तो ऐसे समय में उनसे दूर रहना उनके लिए संभव नहीं है। उन्होंने पांच अगस्त 2024 को हुए छात्र आंदोलन के बाद सत्ता छोड़ने की स्थिति के बाद से भारत में शरण ले रखी है, लेकिन अब वह हर खतरे को पार कर अपनी मातृभूमि वापस जाना चाहती हैं।
राजनीतिक उद्देश्य और अमेरिका की नीतियों की सराहना
शेख हसीना ने यह साफ किया कि उनकी और अवामी लीग की दिसंबर में संभावित वापसी का मकसद दोबारा से सत्ता हासिल करना नहीं है। उनका मुख्य उद्देश्य देश में विकास के पहिए को फिर से गति देना, धर्मनिरपेक्षता को बचाना और राजनीतिक स्थिरता को बहाल करना है। इस वर्चुअल संवाद के दौरान उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासनिक निर्णयों की भी प्रशंसा की और USAID की फंडिंग रोकने के फैसले का समर्थन किया। इसके साथ ही उन्होंने तारिक रहमान के नेतृत्व वाली वर्तमान बांग्लादेशी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए उसे भ्रष्ट करार दिया और आरोप लगाया कि इस शासन में बेरोजगारी बढ़ी है, महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार हो रहा है और जबरन वसूली का दौर चल रहा है।
कानूनी शिकंजा और प्रत्यर्पण का मुद्दा
शेख हसीना के सामने गंभीर कानूनी चुनौतियां खड़ी हैं। बांग्लादेश के अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने नवंबर 2025 में साल 2024 के प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और कार्रवाइयों के सिलसिले में उनकी अनुपस्थिति में उन्हें मृत्युदंड यानी फांसी की सजा सुनाई है। इसके अलावा ढाका की तरफ से भारत सरकार के पास उनके प्रत्यर्पण की आधिकारिक मांग भी भेजी जा चुकी है। इस प्रत्यर्पण अनुरोध पर नई दिल्ली का रुख यह है कि वह अपने देश के आंतरिक कानूनी और न्यायिक प्रावधानों के दायरे में इस मामले की समीक्षा कर रहा है। वहीं, शेख हसीना इन तमाम मुकदमों और फैसलों को पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित करार दे चुकी हैं।























