मणिपुर में बिगड़ती कानून-व्यवस्था और सुरक्षा संकट के बीच विपक्षी दलों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह से मुलाकात की। इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान नेताओं ने राज्य में हाल ही में हुई तीन नागरिकों की हत्याओं पर गंभीर चिंता जताई और सरकार से एक सर्वदलीय बैठक आयोजित करने की मांग की।
मुख्यमंत्री सचिवालय में हुई अहम बैठक
यह प्रतिनिधिमंडल राजधानी के मुख्यमंत्री सचिवालय पहुंचा था, जिसकी अगुवाई कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य पार्टी प्रमुख ओकराम इबोबी सिंह ने की। इस समूह में कांग्रेस विधायक दल के नेता के. मेघचंद्र सिंह, लोकसभा सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम, विधायक ओकराम सुरजकुमार और विपक्षी गठबंधन से जुड़े कई अन्य प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल थे। सभी नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा हालात से निपटने के लिए सभी दलों को मिलकर ठोस रणनीति बनानी होगी।
हालिया हिंसा और सुरक्षा समीक्षा
हाल ही में इंफाल पूर्व के नोंग्शुम इलाके में सशस्त्र हमलावरों द्वारा तीन निर्दोष नागरिकों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद से राज्यभर में तनाव और असुरक्षा का माहौल गहरा गया है। बैठक के दौरान इसी सनसनीखेज घटना के बाद उत्पन्न हुए संपूर्ण सुरक्षा हालातों की गहन समीक्षा की गई। विपक्षी नेताओं का साफ कहना था कि इस तरह की वारदातों को रोकने और राज्य में शांति बहाली के लिए सामूहिक प्रयासों की सख्त आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री का आश्वासन और सोशल मीडिया संदेश
मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा करते हुए जानकारी दी कि उन्होंने विपक्षी प्रतिनिधियों की बात को पूरी गंभीरता और धैर्य के साथ सुना है। मुख्यमंत्री ने @YKhemchandSingh हैंडल से पोस्ट करते हुए लिखा कि वह सभी मांगों और सुझावों पर उचित विचार करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि बैठक के दौरान राज्य में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई।
विपक्ष की दो टूक और सहयोग का प्रस्ताव
बैठक संपन्न होने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए ओकराम इबोबी सिंह ने मौजूदा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन किसी भी समुदाय के लोगों को सुरक्षा देने में नाकाम साबित हुआ है, चाहे पीड़ित कुकी, नागा या मेइती समुदाय से ताल्लुक रखते हों। ओकराम इबोबी सिंह ने जोर देकर कहा कि इस संकट से पार पाने के लिए सभी सियासी दलों का एक मंच पर आना अनिवार्य हो गया है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विपक्ष इस मामले में सरकार का पूरा सहयोग करने को तैयार है और जरूरत पड़ने पर केंद्रीय नेतृत्व से भी हस्तक्षेप की गुहार लगाई जाएगी।



















