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दिल्ली में जंतर मंतर को प्रदर्शन स्थल से हटाने पर भड़का विवाद, सीजेपी ने सरकार को घेराराजनीति
12 अक्तू॰ 2026, 6:54 pm (22 मिनट पहले)· 0

दिल्ली में जंतर मंतर को प्रदर्शन स्थल से हटाने पर भड़का विवाद, सीजेपी ने सरकार को घेरा

दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाकर तीन नए स्थान तय किए हैं, जिस पर सीजेपी नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ऐतिहासिक धरना स्थल जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से बाहर किए जाने के फैसले पर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। दिल्ली पुलिस द्वारा जारी इस नए आदेश की कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने तीखी आलोचना की है। पार्टी नेतृत्व का आरोप है कि केंद्र सरकार नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध जताने के अधिकार को छीनने और असहमति की आवाजों को दबाने का प्रयास कर रही है।

सीजेपी का तीखा हमला और लोकतांत्रिक अधिकारों पर चिंता

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने इस प्रशासनिक फैसले पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जंतर-मंतर को आधिकारिक सूची से हटाकर सरकार विरोध की सोच को खत्म नहीं कर सकती। दिपके ने लिखा, "अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा!" उनका तर्क था कि इस स्थान को पहले ही अत्यधिक प्रतिबंधों के जरिए आम लोगों से दूर करने की कोशिश की गई थी और अब इस तरह के कदम उठाकर लोकतंत्र के बुनियादी सिद्धांतों पर प्रहार किया जा रहा है।

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इसी कड़ी में पार्टी के वरिष्ठ नेता सौरव दास ने भी फैसले के औचित्य पर सवाल उठाए। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर उंगली उठाते हुए पूछा कि क्या इस निर्णय को लागू करने से पहले आम नागरिकों, नागरिक संगठनों या अन्य हितधारकों से कोई सलाह-मशविरा किया गया था। दास ने आरोप लगाया कि यह एकतरफा और मनमाना फैसला है जो नागरिकों के मौलिक अधिकार को प्रभावित करता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार विरोध प्रदर्शन के विचार से ही असहज महसूस कर रही है।

वहीं, पार्टी नेता आशुतोष रांका ने प्रशासन द्वारा तय किए गए वैकल्पिक स्थानों पर तंज कसा। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि अगर इसी तरह प्रदर्शन स्थलों को मुख्य शहर से दूर किया जाता रहा, तो एक दिन माउंट एवरेस्ट को भी निर्धारित प्रदर्शन स्थल घोषित कर दिया जाएगा।

तीन नए वैकल्पिक स्थल और प्रशासनिक संशोधन

दिल्ली पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, जंतर-मंतर के स्थान पर अब तीन नए स्थलों को आधिकारिक विरोध प्रदर्शन के लिए नामित किया गया है। ये नए स्थान हैं

  • रामलीला मैदान
  • बुराड़ी मैदान
  • पूर्वी दिल्ली स्थित CBD मैदान

यह फैसला केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा गठित एक विशेष समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। इस समिति को दिल्ली में प्रदर्शनों के लिए अधिक उपयुक्त और व्यवस्थित स्थानों की पहचान करने का काम सौंपा गया था। दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार की ओर से जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि इन नए स्थलों पर सभाएं आयोजित करने के लिए एक संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) अलग से जारी की जाएगी। यह नया आदेश 28 अप्रैल 2022 को लागू किए गए पुराने स्थायी आदेश में आंशिक संशोधन करता है।

चुनाव आयोग के विरोध के बीच आया आदेश

यह महत्वपूर्ण फैसला ऐसे समय में आया है जब देश में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष और विभिन्न सामाजिक संगठन विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और प्रक्रियात्मक अनियमितताओं के आरोपों को लेकर लुटियंस दिल्ली में लगातार प्रदर्शन की योजनाएं बनाई जा रही थीं।

प्रशासन का तर्क है कि मध्य दिल्ली में बार-बार होने वाले धरने-प्रदर्शनों से आम जनता को भारी यातायात जाम और सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। इसी के समाधान के रूप में नए बड़े मैदानों को चिन्हित किया गया है। हालांकि, विपक्षी दल और अधिकार समूह इसे मुख्य धारा से विरोध को दूर करने की रणनीति मान रहे हैं, जिससे राजधानी में राजनीतिक बहस गरमा गई है।

सवाल-जवाब

जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से क्यों हटाया गया है?
गृह मंत्रालय की समिति की सिफारिशों के आधार पर सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस ने यह निर्णय लिया है।
अब दिल्ली में प्रदर्शन के लिए कौन सी तीन जगहें तय की गई हैं?
दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली स्थित CBD मैदान को प्रदर्शन के लिए नए स्थल घोषित किया है।
सीजेपी नेताओं ने इस फैसले पर क्या प्रतिक्रिया दी?
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापकों और नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए सरकार के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया।
यह आदेश किस पुराने आदेश में संशोधन करता है?
दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार द्वारा जारी यह नया नोटिस 28 अप्रैल 2022 के स्थायी आदेश में आंशिक संशोधन करता है।
यह फैसला किस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच आया है?
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच यह फैसला लिया गया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Ravikash Gupta@ravikash·5 मिनट पहले

जंतर-मंतर पर दोस्तों के साथ कितनी ही बार चाय पी है और प्रदर्शन देखे हैं। उसे शहर से बाहर भेजना मतलब आवाज़ को ही छिपा देना है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·4 मिनट पहले

रविकेश भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। मैंने खुद वहाँ कई बार कवरेज के दौरान देखा है कि लोग कितनी आसानी से अपनी बात रख पाते थे, अब बुराड़ी जाना बहुत मुश्किल होगा।

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