मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राहुल गांधी के नेतृत्व में किए गए प्रदर्शन के बाद राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। इस पूरे घटनाक्रम पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को यह समझ लेना चाहिए कि लोकतंत्र का अर्थ देश में अराजकता फैलाना या भारत के विकास के मार्ग में रुकावटें पैदा करना बिल्कुल नहीं है।
राजनाथ सिंह और अनुराग ठाकुर के तीखे तेवर
इस विरोध प्रदर्शन और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेताओं ने आक्रामक तेवर अपनाए हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा। नेताओं का कहना है कि भारतीय लोकतंत्र में सरकार या नीतियों के विरोध का अधिकार हर नागरिक को मिला हुआ है, लेकिन इस अधिकार की आड़ में जनादेश को बदनाम करने या व्यवस्था को चुनौती देने का लाइसेंस किसी के पास नहीं है। भाजपा ने इसे भीड़तंत्र की हार और राजनीतिक हताशा करार दिया है।
वोट चोरी के आरोपों और विरोध प्रदर्शनों पर सियासत
हाल के दिनों में चुनावी प्रणाली और संस्थाओं को लेकर विपक्षी दलों द्वारा उठाए गए सवालों पर भी सत्ता पक्ष ने पलटवार किया है। नेताओं ने सवाल उठाया है कि चुनावों में हार के बाद इस तरह के प्रदर्शन और निराधार आरोप लगाना केवल जनता के जनादेश का अनादर करना है। भाजपा नेताओं ने तंज कसते हुए कहा कि जब चुनाव परिणाम मनमुताबिक नहीं आते हैं, तब संस्थाओं पर सवाल उठाए जाते हैं और अराजक माहौल तैयार करने की कोशिश की जाती है, जिसे देश की जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और राजनीतिक सरगर्मी
इस पूरे विवाद के बीच अदालत में भी कई मामलों पर सुनवाई जारी है, जिसके चलते सियासी दलों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक और अधिक तूल पकड़ सकता है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संस्थाओं की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक मर्यादाओं को लेकर छिड़ी यह बहस फिलहाल थमने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं।























