दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए तय जगहों की सूची से हटाए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके ने इस कदम को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के विरोध प्रदर्शन की खुलकर सराहना की और सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए।
हिंगोली में दिया गया बयान
महाराष्ट्र के हिंगोली में 13 अक्टूबर को एक कार्यक्रम के दौरान अभिजीत दिपके ने कहा कि सरकार की कार्रवाई से उसकी घबराहट साफ नजर आती है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को लगता है कि जंतर-मंतर को बंद करने से आवाजें दबाई जा सकेंगी, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं होगा। उनके मुताबिक आने वाले समय में देश के कोने-कोने में जंतर-मंतर जैसी अनगिनत जगहें तैयार हो जाएंगी और विरोध के सुर थमने वाले नहीं हैं।
विरोध प्रदर्शन के अधिकार पर बहस
अभिजीत दिपके का यह तीखा बयान ऐसे वक्त में आया है जब विपक्षी दलों के गठबंधन और प्रदर्शन स्थलों के नियमों को लेकर देश भर में गहमागहमी बनी हुई है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि प्रशासन को मूल समस्या जंतर-मंतर की लोकेशन से नहीं, बल्कि आम जनता और विपक्षी दलों द्वारा उठाए जाने वाले विरोध के स्वरों से है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच जंतर-मंतर को प्रतिबंधित करने के प्रशासनिक फैसलों और दावों को लेकर अभी आधिकारिक और विस्तृत पुष्टि की प्रतीक्षा है, जबकि विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों की ओर से इस पर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
























