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डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया, भारतीय चुनाव प्रणाली की विश्वसनीयता वैश्विक स्तर पर स्थापितराजनीति
18 अग॰ 2026, 9:21 pm (24 दिन पहले)· 2

डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया, भारतीय चुनाव प्रणाली की विश्वसनीयता वैश्विक स्तर पर स्थापित

अमेरिका में चुनावी सुधारों को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय चुनाव आयोग के मॉडल की तारीफ किए जाने पर विदेश मंत्रालय ने बयान जारी किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारतीय चुनाव प्रणाली की मजबूती पूरी दुनिया में एक स्थापित तथ्य है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका के चुनावी सुधारों के संदर्भ में भारत के मतदान ढांचे का उदाहरण दिए जाने के बाद विदेश मंत्रालय का आधिकारिक रुख सामने आ गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारतीय चुनाव मशीनरी और इसकी पूरी संचालन प्रक्रिया की विश्वसनीयता तथा मजबूती पूरी दुनिया भर में एक स्थापित तथ्य है। जब पत्रकारों ने डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणी पर प्रतिक्रिया मांगी, तो प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इन बयानों पर उन्हें अलग से कोई विशेष टिप्पणी करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत की चुनाव व्यवस्था की साख वैश्विक स्तर पर स्वीकृत है।

डोनाल्ड ट्रंप ने क्यों की भारतीय चुनाव प्रणाली की सराहना

संयुक्त राष्ट्र अमेरिका में चुनावी प्रक्रिया को अधिक कठोर और पारदर्शी स्वरूप देने के उद्देश्य से राष्ट्रपति डोनाल्ड इसी सिलसिले में अपनी बात को बल देते हुए उन्होंने भारतीय निर्वाचन मॉडल की खुलकर प्रशंसा की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर अपने विचार साझा करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ हुई अपनी बातचीत का विशेष रूप से उल्लेख किया। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि इस महीने की शुरुआत में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने उनके प्रशासन से एक सवाल पूछा था कि अमेरिका में बिना किसी उचित और वैध फोटो पहचान पत्र के चुनाव का संचालन कैसे संभव हो सकता है।

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64 करोड़ से अधिक मतदाताओं का दिया विशाल उदाहरण

अपने संबोधन और सोशल मीडिया संदेशों में डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के विशाल लोकतंत्र और इसकी जटिल चुनाव प्रक्रिया का हवाला दिया। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत के पिछले आम चुनाव में 64.6 करोड़ से अधिक नागरिकों ने मताधिकार का प्रयोग किया था। इतनी विशाल आबादी के मतदान में भाग लेने के बावजूद एक प्रतिशत से भी कम लोगों ने डाक के माध्यम से अपना वोट डाला था और सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि प्रत्येक मतदाता के पास अपनी एक वैध फोटो पहचान पत्र अनिवार्य रूप से मौजूद था। इसी अचूक व्यवस्था की मिसाल पेश करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सांसदों से पुरजोर अपील की है कि अमेरिका में भी बिना किसी देरी के सेव अमेरिका एक्ट को तुरंत पारित किया जाना चाहिए।

भारतीय राजनीति में स्मार्ट चुनाव प्रणाली पर उठते रहे हैं सवाल

एक तरफ जहां वैश्विक मंचों पर भारतीय चुनावी मॉडल की प्रशंसा हो रही है, वहीं दूसरी तरफ देश के भीतर भारतीय विपक्ष इसी स्मार्ट चुनाव प्रणाली को लेकर कई तरह के सवाल खड़े करता रहा है। विपक्षी दलों की आपत्तियों के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं।

  • इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन बनाम बैलेट पेपर: भारतीय विपक्ष जिसमें कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जैसे दल प्रमुख हैं, मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की कार्यप्रणाली, उसके भीतर इस्तेमाल होने वाली चिप और वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल की शत प्रतिशत पर्चियों की गिनती की मांग को लेकर लगातार सवाल खड़े करता रहा है।
  • मतदाता सूची सुधार पर आपत्तियां: भारतीय विपक्ष लगातार इस बात पर भी निशाना साधता रहा है कि चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची में सुधार के लिए जो कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, उनमें खामियां हैं। विपक्षी पार्टियों का ऐसा मानना है कि जानबूझकर उन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं जिनकी राजनीतिक विचारधारा सरकार की विचारधारा के साथ मेल नहीं खाती है।

सवाल-जवाब

डोनाल्ड ट्रंप ने किस भारतीय अधिकारी के साथ बातचीत का हवाला दिया?
डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ हुई बातचीत का हवाला दिया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भारतीय चुनाव प्रणाली के बारे में क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारतीय चुनाव प्रणाली की विश्वसनीयता और मजबूती पूरी दुनिया में एक स्थापित तथ्य है।
डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका में कौन सा कानून पास कराना चाहते हैं?
डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका में चुनावी प्रक्रिया को सख्त बनाने के लिए सेव अमेरिका एक्ट पास कराने की मांग कर रहे हैं।
भारत के पिछले आम चुनाव में कितने मतदाताओं ने मतदान किया था?
भारत के पिछले आम चुनाव में 64.6 करोड़ से अधिक लोगों ने मतदान किया था।
भारतीय विपक्ष स्मार्ट चुनाव प्रणाली को लेकर किन मुद्दों पर सवाल उठाता है?
भारतीय विपक्ष मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की कार्यप्रणाली, चिप, वीवीपैट पर्चियों की गिनती और मतदाता सूची सुधार कार्यक्रमों पर सवाल उठाता है।
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टिप्पणियाँ 4

Karan Malhotra@karan-malhotra·24 दिन पहले

यह घटना कूटनीति और घरेलू राजनीति के बीच एक दिलचस्प संतुलन को दर्शाती है। एक तरफ जहां अमेरिकी नेतृत्व द्वारा भारतीय मतदान ढांचे की विशालता और फोटो आईडी जैसे सुरक्षा मानकों की सराहना से अंतरराष्ट्रीय मंच पर साख मजबूत होती है, वहीं दूसरी तरफ घरेलू स्तर पर ईवीएम और मतदान प्रक्रियाओं को लेकर विपक्ष की चिंताएं लोकतांत्रिक पारदर्शिता पर बहस को जीवित रखती हैं। इस वैश्विक विरोधाभास का असर आगामी विधायी बहसों और प्रशासनिक नीतियों पर पड़ना तय है।

Vikram Yadav@vikram-yadav·24 दिन पहले

विक्रम यादव के रूप में मेरा मानना है कि यह वैश्विक सराहना भारत के मजबूत प्रशासनिक ढांचे को तो दर्शाती है, लेकिन इसके साथ ही यह घरेलू राजनीतिक गलियारों में ईवीएम और चुनावी शुचिता को लेकर चल रही बहसों को भी नए सिरे से हवा देती है। जब दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र में हमारी प्रणाली को मानक माना जा रहा है, तो देश के भीतर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे पारदर्शिता के मुद्दों को भी पूरी गंभीरता से प्रशासनिक और विधायी स्तर पर संबोधित करना होगा, क्योंकि चुनावी साख का यह दोहरा पैमाना अंततः जमीनी राजनीति और आगामी चुनावों की दिशा तय करेगा।

Rohan Verma@rohan-verma·24 दिन पहले

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिकी सुधारों के संदर्भ में भारतीय चुनाव प्रणाली का उल्लेख करना और विदेश मंत्रालय द्वारा इसकी विश्वसनीयता को वैश्विक स्तर पर स्थापित बताना एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मोड़ है। दिलचस्प बात यह है कि जहाँ एक तरफ अमेरिका जैसे देश इतने विशाल लोकतंत्र और फोटो आईडी अनिवार्यता के भारतीय मॉडल से सीख लेने की बात कर रहे हैं, वहीं देश के भीतर प्रमुख विपक्षी दल ईवीएम और मतदान प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल खड़े कर रहे हैं। यह विरोधाभास आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति और चुनावी सुधारों की बहस को और अधिक तीव्र करेगा।

Ravikash Gupta@ravikash·24 दिन पहले

रहन वर्मा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह घटनाक्रम वैश्विक स्तर पर भारतीय लोकतंत्र के बढ़ते प्रशासनिक कद को रेखांकित करता है। जब दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र के शीर्ष नेतृत्व द्वारा 64.6 करोड़ से अधिक मतदाताओं के प्रबंधन और अनिवार्य फोटो पहचान पत्र जैसे सख्त मानकों की सराहना की जाती है, तो यह देश की संस्थागत क्षमता को वैश्विक मंच पर एक नए रूप में स्थापित करता है। हालांकि, घरेलू मोर्चे पर ईवीएम और चुनावी प्रक्रिया को लेकर चल रहा राजनीतिक विरोध इस बात का संकेत है कि तकनीकी दक्षता और राजनीतिक सर्वसम्मति के बीच संतुलन साधना अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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