जापान का केंद्रीय बैंक अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने के लिए एक बेहद संवेदनशील और संतुलित मार्ग तलाश रहा है। वित्तीय संस्थान आईएनजी के विश्लेषकों क्रिस टर्नर और पैड्रिक गार्वे के अनुसार, बैंक ऑफ जापान (BoJ) ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट्स की वृद्धि करके इसे 1.25% पर ले जा सकता है, जिसके बाद वह बेहद सावधानीपूर्वक कदम बढ़ाएगा। हालांकि, केंद्रीय बैंक की इस राह में घरेलू राजनीतिक मोर्चे पर बाधाएं खड़ी हो सकती हैं, क्योंकि जापान सरकार आर्थिक नीतियों को बहुत तेजी से कड़ा करने के पक्ष में नहीं है। वर्तमान अनुमानों के मुताबिक, अगले साल जनवरी और अप्रैल में 25-25 बेसिस पॉइंट्स की दो और बढ़ोतरी की जा सकती है, जिससे मुख्य नीतिगत दर बढ़कर 1.75% पर पहुंच जाएगी, जिसे एक तटस्थ स्तर के करीब माना जा रहा है।
नीतिगत दरों को तेजी से बढ़ाने की राह में राजनीतिक अड़चनें
जापान सरकार वर्तमान में देश के भीतर आर्थिक विकास को बढ़ावा देने वाली नीतियों पर मजबूती से काम कर रही है। विकास-केंद्रित इस नजरिए के कारण सरकारी अधिकारी ब्याज दरों को आक्रामक तरीके से बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। इसलिए, इस बात की पूरी संभावना है कि सरकार केंद्रीय बैंक के आक्रामक रवैये का विरोध करेगी। हालांकि बाजार में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन इसकी उम्मीद बेहद कम है कि सरकारी अधिकारी दरों को तेजी से बढ़ाने के किसी भी फैसले का समर्थन करेंगे। ऐसे में सितंबर में 50 बेसिस पॉइंट्स की बड़ी बढ़ोतरी या फिर सितंबर और अक्टूबर में लगातार दरें बढ़ाने जैसे कदमों की संभावना नहीं दिखती है। इसके बजाय, नीतिगत दरों में बदलाव का एक धीमा और क्रमिक रास्ता अपनाया जा सकता है। आईएनजी के अनुमान के मुताबिक, BoJ अगले साल जनवरी और अप्रैल में दरों में 25-25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर सकता है, जिससे यह दर 1.75% तक पहुंच जाएगी ताकि अर्थव्यवस्था पर अचानक कोई विपरीत असर न पड़े।
अप्रैल में होने वाली उपभोग कर कटौती और महंगाई का गणित
अगले साल अप्रैल तक नीतिगत दर को 1.75% पर ले जाना एक रणनीतिक लक्ष्य हो सकता है, क्योंकि इसी महीने देश में एक बड़ा वित्तीय बदलाव होने जा रहा है। अप्रैल में जापान सरकार भोजन और गैर-मादक पेय पदार्थों पर लगने वाले उपभोग कर (कंजम्पशन टैक्स) को 8% से घटाकर केवल 1% करने वाली है, और यह कटौती दो साल के लिए लागू रहेगी। इस कदम से मुख्य महंगाई दर में भारी गिरावट आने की उम्मीद है, जो अगले दो वर्षों तक बनी रह सकती है। BoJ के लिए यह स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण होगी। जब महंगाई कृत्रिम रूप से निचले स्तर पर होगी, तो ऐसी स्थिति में दरों को और अधिक बढ़ाने या कड़े कदम उठाने का कोई मजबूत आधार नहीं बचेगा। यही वजह है कि अप्रैल से पहले दरों को 1.75% के तटस्थ स्तर पर पहुंचाना केंद्रीय बैंक के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।
महंगाई के बदलते रुख और कॉरपोरेट जगत की उम्मीदें
महंगाई को लेकर BoJ के रुख में अब एक स्पष्ट बदलाव देखने को मिल रहा है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि देश में महंगाई अब एक स्थायी और टिकाऊ रास्ते पर आगे बढ़ रही है। इस बदलाव का एक बड़ा कारण यह है कि उत्पादक और इनपुट लागतों में होने वाली बढ़ोतरी का असर अब सीधे तौर पर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में दिखाई दे रहा है। इस बात की पुष्टि हाल ही में आए व्यावसायिक आंकड़ों से भी होती है। जापानी कंपनियों के बीच किए गए नवीनतम टंकन (Tankan) बिजनेस सर्वे से पता चलता है कि कंपनियां भविष्य में अपने उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की उम्मीद कर रही हैं। इसके अलावा, नीति निर्माता कॉरपोरेट स्तर पर वस्तुओं की कीमतों में होने वाली सालाना 7% की बढ़ोतरी पर भी करीब से नजर रख रहे हैं, जो इस बात का संकेत है कि महंगाई का दबाव अब केवल अस्थायी नहीं रह गया है।
विदेशी मुद्रा बाजार में हलचल और येन की स्थिति
मौद्रिक नीतियों में आ रहे इन बदलावों का असर वैश्विक मुद्रा बाजार पर भी साफ देखा जा रहा है। शुक्रवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान AUD/USD जोड़ी में स्थिरता देखी गई और यह 0.7100 के मध्य स्तर के आसपास बनी रही। इससे पहले गुरुवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में बड़ी गिरावट आई थी, जिससे यह एक सप्ताह से अधिक के निचले स्तर पर पहुंच गया था। अमेरिकी डॉलर में आई इस तेजी के पीछे अगस्त महीने के प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) के आंकड़े थे, जिसने फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं को हवा दी थी। हालांकि, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) के कड़े रुख की उम्मीदों ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की गिरावट को सीमित कर दिया। विदेशी मुद्रा बाजार के निवेशक अब नए सौदे करने से पहले अमेरिका के उपभोक्ता महंगाई आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं।
दूसरी ओर, USD/JPY की विनिमय दर शुक्रवार के एशियाई सत्र में निचले स्तरों पर बनी रही और यह 154.00 के स्तर के आसपास कारोबार कर रही थी। जापान के मजबूत PPI आंकड़ों के बाद येन को काफी समर्थन मिला है, जिससे BoJ द्वारा कड़े कदम उठाने की उम्मीदों बढ़ गई हैं। हालांकि, अमेरिकी डॉलर ने कल की बढ़त को बनाए रखा है, जिससे येन की मजबूती को एक सीमित सीमा तक ही बढ़ावा मिल सका क्योंकि बाजार की नजरें अमेरिका के आगामी महंगाई आंकड़ों पर टिकी हैं।
डॉलर के उतार-चढ़ाव के बीच सोने की कीमतों में सुधार
कमोडिटी बाजार में सोने ने शुक्रवार को फिर से वापसी की है और इसमें अच्छी बढ़त दर्ज की गई है। इस सुधार के साथ सोने की कीमतें एक बार फिर 4,440 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर की ओर बढ़ती दिख रही हैं। इस तेजी से सोने ने गुरुवार को हुई गिरावट की भरपाई कर ली है। सोने की कीमतों में यह बदलाव अमेरिकी डॉलर में आ रहे उतार-चढ़ाव के सीधे प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है।



















