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एंटी-चीटिंग बिल और फ्लोर रणनीति पर एनडीए का मंथन, 'मंगल मिलन' बैठक में शामिल हुए एनसीपीआई सांसदराजनीति
28 जुल॰ 2026, 12:40 pm (91 दिन पहले)· 1

एंटी-चीटिंग बिल और फ्लोर रणनीति पर एनडीए का मंथन, 'मंगल मिलन' बैठक में शामिल हुए एनसीपीआई सांसद

संसद में एंटी-चीटिंग संशोधन विधेयक पेश होने के बाद एनडीए ने 'मंगल मिलन' रणनीति बैठक का आयोजन किया, जिसमें हाल ही में पाला बदलने वाले सांसद भी शामिल हुए।

लोकसभा में 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पेश किए जाने के ठीक अगले दिन मंगलवार को संसद परिसर के लाइब्रेरी भवन स्थित जीएमसी बालयोगी ऑडिटोरियम में सत्तारूढ़ गठबंधन की महत्वपूर्ण रणनीति बैठक हुई। 'मंगल मिलन' नाम से आयोजित नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) संसदीय दल की इस बैठक में सियासी तस्वीर बदली हुई नजर आई। इस बैठक में पहली बार एनसीपीआई की सांसद काकोली घोष, शताब्दी रॉय और सायनी घोष शामिल हुईं, जो इससे पहले तृणमूल कांग्रेस का हिस्सा थीं।

शीर्ष नेताओं की मौजूदगी और बदलती राजनीतिक स्थिति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित इस मंथन में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, अर्जुन राम मेघवाल, प्रह्लाद जोशी और जितेंद्र सिंह समेत एनडीए के विभिन्न घटक दलों के कई सांसद मौजूद रहे। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब केंद्र सरकार प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित करने वाले कड़े कानून को संसद में आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। दूसरी ओर, विपक्षी दल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर सरकार को घेरने की योजना बना रहे हैं।

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तृणमूल कांग्रेस की पूर्व बागी नेताओं का एनसीपीआई सांसद के रूप में इस बैठक में शामिल होना संसदीय समीकरणों में आ रहे बदलाव को दर्शाता है। काकोली घोष, शताब्दी रॉय और सायनी घोष की मौजूदगी ने एनडीए के भीतर बढ़ते समन्वय और समर्थन के दायरे को उजागर किया है।

एंटी-चीटिंग बिल के कड़े प्रावधान और कानूनी शिकंजा

रणनीतिक चर्चा के केंद्र में वह विधेयक रहा जिसे सोमवार को विपक्षी दलों की भारी नारेबाजी के बीच राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने निचले सदन में प्रस्तुत किया था। यह नया विधेयक दरअसल 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024' में संशोधन का प्रस्ताव करता है। इसका मुख्य उद्देश्य देश की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाना और लाखों युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करना है।

प्रस्तावित कानून में गड़बड़ी करने वालों और पेपर लीक में शामिल तत्वों के खिलाफ सख्त सजा के प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसके तहत दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की कैद और 10 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, अपराध से जुड़ी संपत्तियों को जब्त करने का प्रावधान भी जोड़ा गया है। मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए ऐसी कानूनी प्रक्रिया तय की जा रही है जिससे 3 महीने के भीतर अदालत का फैसला आ सके।

मंगल मिलन के जरिए फ्लोर मैनेजमेंट और सहयोगी दलों से समन्वय

एनडीए संसदीय दल की साप्ताहिक रणनीति बैठक को ही अब 'मंगल मिलन' का नया स्वरूप दिया गया है। इसका प्राथमिक उद्देश्य संसद सत्र के दौरान प्रतिदिन के विधायी कामकाज का सुचारू संचालन (फ्लोर मैनेजमेंट) करना और विभिन्न मुद्दों पर आम सहमति कायम करना है। यह मंच सकारात्मक बहस और सहयोगी दलों के बीच आपसी तालमेल बढ़ाने का कार्य करता है।

इस बैठक के माध्यम से शिव सेना, एलजेपी, टीडीपी, जेडीयू और अन्य क्षेत्रीय सहयोगी दलों के बीच संसद में बोलने के अवसर और जिम्मेदारियां बांटी जाती हैं। इससे सभी सहयोगी दलों की सहभागिता सुनिश्चित होती है और एनडीए संसद के भीतर एक एकजुट रणनीति के साथ अपनी बात रख पाता है।

सवाल-जवाब

संसद में हाल ही में कौन सा एंटी-चीटिंग बिल पेश किया गया है?
लोकसभा में 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पेश किया गया है, जो 2024 के मूल अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव करता है।
एंटी-चीटिंग संशोधन विधेयक 2026 में सजा के क्या प्रावधान हैं?
इस विधेयक में दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की जेल, 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना, संपत्ति की जब्ती और 3 महीने के भीतर मुकदमे के फैसले का प्रावधान शामिल है।
एनडीए की 'मंगल मिलन' बैठक में किन नए सांसदों ने भाग लिया?
तृणमूल कांग्रेस की पूर्व नेता और वर्तमान में एनसीपीआई सांसद काकोली घोष, शताब्दी रॉय और सायनी घोष ने पहली बार इस बैठक में हिस्सा लिया।
एनडीए की 'मंगल मिलन' बैठक का मुख्य उद्देश्य क्या है?
यह एनडीए की साप्ताहिक रणनीति बैठक है जिसका उद्देश्य संसद सत्र के दौरान फ्लोर मैनेजमेंट, सहयोगी दलों के साथ तालमेल और बोलने की जिम्मेदारियों का बंटवारा करना है।
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