भारतीय प्रशासनिक सेवा और राजनीति के बीच का जुड़ाव हमेशा से ही दिलचस्प रहा है, जहां कई वरिष्ठ अधिकारी अपनी प्रशासनिक कुर्सियां छोड़कर जनता की सीधी सेवा के लिए चुनावी राजनीति में कदम रखते हैं। असम के राजनीतिक परिदृश्य में इन दिनों एक ऐसे ही चेहरे की काफी चर्चा हो रही है, जिन्होंने लोक सेवा में एक लंबी पारी खेलने के बाद अब सीधे चुनावी अखाड़े में उतरने का फैसला किया है। हम बात कर रहे हैं पूर्व IAS अधिकारी देबाशीष शर्मा की, जिन्हें भारतीय जनता पार्टी ने असम की महत्वपूर्ण नौगांव लोकसभा सीट पर होने वाले आगामी उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया है।
स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और राजनीति में प्रवेश
देबाशीष शर्मा ने हाल ही में जिला कमिश्नर के पद पर रहते हुए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति यानी VRS ले लिया था, ताकि वे सक्रिय राजनीति में अपना कदम बढ़ा सकें। इसके बाद, 8 सितंबर को उन्होंने गुवाहाटी में स्थित बीजेपी के प्रदेश कार्यालय में एक गरिमामयी कार्यक्रम के दौरान पार्टी की औपचारिक सदस्यता ग्रहण कर ली थी। नौगांव लोकसभा सीट पर उपचुनाव की स्थिति इसलिए बनी क्योंकि वहां के तत्कालीन सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इस सीट पर नए राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए बीजेपी ने एक अनुभवी प्रशासनिक चेहरे पर भरोसा जताया है, जिससे मुकाबला काफी रोमांचक होने की उम्मीद है।
शैक्षणिक सफर और प्रशासनिक सेवा की शुरुआत
प्रशासनिक और सार्वजनिक जीवन में देबाशीष शर्मा की सफलता के पीछे उनकी बेहतरीन शैक्षणिक पृष्ठभूमि की बड़ी भूमिका रही है। उन्होंने अंग्रेजी साहित्य में अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की, जिससे उन्हें समाज और मानवीय पहलुओं को गहराई से समझने का मौका मिला। इसके बाद उन्होंने जनसंपर्क विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने लोक सेवा में जाने का फैसला किया और साल 1992 में असम सिविल सेवा की परीक्षा उत्तीर्ण की। इस परीक्षा को पास करने के बाद उन्हें प्रशासनिक अधिकारी के रूप में अपनी पहली नियुक्ति असम के बारपेटा जिले में मिली थी, जहां से उन्होंने सार्वजनिक सेवा के एक नए अध्याय की शुरुआत की।
तीन दशकों का लंबा और बेदाग करियर
अपने लगभग 30 साल से भी अधिक लंबे प्रशासनिक करियर के दौरान देबाशीष शर्मा ने कई संवेदनशील और अत्यंत महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दीं। वे असम के तत्कालीन राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल एसके सिन्हा के विशेष अधिकारी के रूप में भी नियुक्त रहे, जहां उन्होंने राजभवन के महत्वपूर्ण कार्यों का संचालन किया। इसके बाद, उन्होंने मुंबई में स्थित असम भवन में डिप्टी रेजिडेंट कमिश्नर के रूप में काम करते हुए देश की वित्तीय राजधानी में अपने गृह राज्य का प्रतिनिधित्व किया। उनके प्रशासनिक कौशल को देखते हुए उन्हें गुवाहाटी म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के कमिश्नर की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। राजनीति में आने और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने से ठीक पहले, वे मोरीगांव के जिला कमिश्नर के रूप में कार्यभार संभाल रहे थे।
गिटार की धुनों से लोगों का दिल जीतने वाले अफसर
अक्सर अधिकारियों को फाइलों और सख्त नियमों के बीच बंधा हुआ देखा जाता है, लेकिन देबाशीष शर्मा का व्यक्तित्व इससे बिल्कुल अलग है। वे संगीत के बेहद शौकीन हैं और सार्वजनिक मंचों पर बेझिझक गिटार बजाते हैं। साल 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान उनका एक अनोखा अंदाज सामने आया था। मतदान के दूसरे चरण की समाप्ति के बाद, जब वे मोरीगांव में ईवीएम लेकर सुरक्षित स्ट्रॉन्ग रूम पहुंचे, तो उन्होंने वहां दिनभर की कड़ी ड्यूटी से थके-हारे मतदान कर्मियों को देखा। चुनाव कर्मियों की थकान दूर करने के लिए उन्होंने खुद गिटार संभाला और गाने गाए। उनके इस संवेदनशील और कलात्मक अंदाज का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था और लोगों ने उनकी खूब प्रशंसा की थी।
कैंसर पीड़ितों की सेवा और 'दीपशिखा' की स्थापना
प्रशासनिक व्यस्तताओं के बावजूद देबाशीष शर्मा ने अपने सामाजिक सरोकारों को कभी पीछे नहीं छूटने दिया। वे असम की विख्यात कैंसर केयर संस्था 'दीपशिखा' के संस्थापक चेयरमैन और ट्रस्टी हैं। इस संस्था के माध्यम से वे असम और उसके आसपास के पूर्वोत्तर राज्यों में कैंसर पीड़ित मरीजों और उनके परिवारों की चिकित्सा, वित्तीय और मानसिक मदद करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। अब जब वे अपनी सरकारी सेवा को पूरी तरह से अलविदा कहकर राजनीति के मैदान में उतर चुके हैं, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि क्षेत्र की जनता उनके इस प्रशासनिक अनुभव, संवेदनशील व्यक्तित्व और सामाजिक सेवा को वोट के रूप में कितना आशीर्वाद देती है।



















