पंजाब में सरकारी स्कूलों की हालत और उनकी गुणवत्ता को लेकर एक बड़ा सियासी विवाद खड़ा हो गया है। यह मामला अब कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच एक सीधे मुकाबले में बदल चुका है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब कांग्रेस के नवनियुक्त पंजाब प्रभारी सचिन पायलट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नाम के संगठन की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए। सचिन पायलट ने पूछा कि क्या यह संगठन अलग-अलग राज्यों में सत्तासीन राजनीतिक दलों को देखकर अपने मूल्यांकन के पैमाने बदल देता है। इस टिप्पणी पर आम आदमी पार्टी की ओर से बेहद तीखी प्रतिक्रिया आई और पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने कांग्रेस को पड़ोसी राज्यों में अपने काम का सबूत देने की खुली चुनौती दे दी।
लुधियाना में स्कूलों के निरीक्षण से शुरू हुआ विवाद
इस पूरे सियासी घमासान की जड़ें पंजाब के लुधियाना में सरकारी स्कूलों के हालिया निरीक्षण से जुड़ी हैं। सीजेपी (CJP) के सह-संयोजक सौरव दास के नेतृत्व में एक विशेष टीम ने क्षेत्र के तीन सरकारी स्कूलों का दौरा किया था। इस टीम ने एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय, एक सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल और एक 'स्कूल ऑफ एमिनेंस' का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया। अपनी जांच के बाद टीम ने बताया कि जहां एक स्कूल में बेहद शानदार सुविधाएं मौजूद थीं, वहीं बाकी के दो स्कूलों में कई बुनियादी और शैक्षणिक कमियां पाई गईं। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी की सरकार ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे इन कमियों को जल्द से जल्द दूर करने के लिए कदम उठाएंगे।
सचिन पायलट ने सीजेपी की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
इस ऑडिट के बाद कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने इस पूरी प्रक्रिया की नीयत और निष्पक्षता पर उंगली उठाई। उन्होंने आरोप लगाया कि क्या सीजेपी कुछ चुनिंदा राज्य सरकारों के प्रति नरम रवैया अपना रही है। पायलट का मानना था कि पंजाब के स्कूलों की जांच भी उसी कड़ाई और ईमानदारी से होनी चाहिए जैसे अन्य राज्यों में की जाती है। इस मुद्दे पर सचिन पायलट ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा और मांग की कि पंजाब में भी बिना किसी रियायत के निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।
पायलट ने अपने सोशल मीडिया संदेश में साफ किया कि देश के किसी भी हिस्से में सरकारी स्कूलों का ऑडिट किया जाना एक स्वागत योग्य कदम है, लेकिन इसमें दोहरा मापदंड नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जांच टीम को पंजाब में भी उसी नजरिए, उन्हीं तीखे सवालों और उसी हिम्मत के साथ काम करना चाहिए जो वे अन्य राज्यों में दिखाते हैं। उनके अनुसार, पंजाब को किसी भी तरह की विशेष छूट नहीं मिलनी चाहिए और न ही वहां सत्तासीन आम आदमी पार्टी को किसी किस्म की 'दोस्ताना रियायत' का लाभ दिया जाना चाहिए।
मनीष सिसोदिया का कांग्रेस को करारा जवाब और चुनौती
आम आदमी पार्टी ने सचिन पायलट के इन आरोपों का तुरंत और बेहद आक्रामक जवाब दिया। इस विवाद को अब पंजाब बनाम कांग्रेस शासित हिमाचल प्रदेश के स्कूलों की तुलना में बदल दिया गया। दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री रह चुके आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने पायलट के आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें सीधी चुनौती दी। सिसोदिया ने X पर पायलट को चुनौती दी और दोनों राज्यों के स्कूलों का एक साथ संयुक्त ऑडिट कराने का प्रस्ताव रखा।
सिसोदिया ने दावा किया कि पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार किसी भी समय 1,000 बेहद आधुनिक और विश्वस्तरीय सरकारी स्कूल दिखा सकती है। इसके बदले में उन्होंने सचिन पायलट को चुनौती दी कि वे कांग्रेस शासित हिमाचल प्रदेश में ऐसे ही 1,000 बेहतरीन सरकारी स्कूल खोजकर दिखाएं। सिसोदिया ने कहा कि दोनों पक्षों को मिलकर पंजाब और हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों का एक साथ ऑडिट करना चाहिए और पायलट से पूछा कि क्या वे इस चुनौती को स्वीकार करने का साहस रखते हैं।
राजस्थान के स्कूलों को लेकर भी छिड़ी बहस
इस राजनीतिक तकरार में केवल मनीष सिसोदिया ही नहीं, बल्कि आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा भी कूद पड़े। ढांडा ने सचिन पायलट पर निशाना साधने के लिए एक नया मोर्चा खोल दिया। उन्होंने भाजपा शासित राजस्थान के सरकारी स्कूलों की खस्ताहाल स्थिति का जिक्र किया। ढांडा ने आरोप लगाया कि पायलट पंजाब के स्कूलों पर तो सवाल उठा रहे हैं, लेकिन राजस्थान के जर्जर स्कूलों की बदहाली पर चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने पायलट से पूछा कि राजस्थान के स्कूलों की दुर्दशा पर उनकी चुप्पी का क्या कारण है। इसके साथ ही उन्होंने पायलट को राजस्थान के स्कूलों का भी मिलकर ऑडिट करने का निमंत्रण दिया और पूछा कि क्या वे इसके लिए तैयार हैं।



















