नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों के आंदोलन को अब एक प्रमुख मुस्लिम संगठन का भी साथ मिल गया है। इंडियन मुस्लिम्स फॉर सिविल राइट्स (IMCR) की तरफ से आयोजित मुस्लिम नेताओं और बुद्धिजीवियों की एक राष्ट्रीय परामर्श बैठक में प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में एक विशेष प्रस्ताव पास किया गया। इस बैठक में देश के कई बड़े मुस्लिम नेता और बुद्धिजीवी एकजुट हुए, जिन्होंने छात्रों के खिलाफ की गई पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जताई और देशभर में अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरे नौजवानों के प्रति अपनी एकजुटता प्रकट की।
छात्रों के पक्ष में खड़े हुए कई बड़े नेता
इस राष्ट्रीय परामर्श बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती और अजमेर दरगाह के सरवर चिश्ती सहित कई प्रमुख हस्तियों ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान देश के वर्तमान हालातों और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई। बैठक में शामिल नेताओं ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग किए जाने की तीखी आलोचना की। उनका कहना था कि अपनी शैक्षणिक समस्याओं और पारदर्शी परीक्षाओं की मांग कर रहे युवाओं के साथ इस तरह का व्यवहार लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है।
देश के मौजूदा हालातों पर महबूबा मुफ्ती का निशाना
बैठक में अपना भाषण देते हुए पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने देश की वर्तमान स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि आज के समय में देश के युवाओं को सबसे ज्यादा अन्याय और मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। महबूबा मुफ्ती ने कहा, "आज तो पूरा भारत कश्मीर बन गया है।" उन्होंने अपने संबोधन में आगे कहा कि देश के जो हालात हैं, वे किसी से छिपे नहीं हैं। इस समय सबसे ज्यादा प्रताड़ना उन नौजवानों को दी जा रही है जिन्हें देश का भविष्य कहा जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि एक तरफ लगातार परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ अपने हक के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाने वाले छात्रों पर लाठियां बरसाई जा रही हैं।
सलमान खुर्शीद ने की सरकार से बातचीत की अपील
इस मौके पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने आंदोलन के गैर-राजनीतिक स्वरूप पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे इस छात्र आंदोलन का किसी भी राजनीतिक दल से कोई सीधा संबंध नहीं है। छात्र पूरी तरह से अपने दम पर और अपने हक के मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, इसलिए उनकी आवाज को अनसुना नहीं किया जाना चाहिए। सलमान खुर्शीद ने कहा, "हमने भी छात्रों के आंदोलन का पूरी मजबूती से समर्थन किया है।" उन्होंने छात्रों के खिलाफ किए गए पुलिसिया व्यवहार की निंदा करते हुए उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इस मामले में संवेदनशील रुख अपनाएगी और छात्रों के साथ सीधे बातचीत का रास्ता साफ करेगी, ताकि जल्द ही कोई सकारात्मक समाधान निकल सके।
न्यायिक जांच की मांग और दिल्ली घोषणापत्र
बैठक के समापन पर 'भारत में मुसलमानों के अधिकारों के समर्थन पर नई दिल्ली घोषणा' के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इन प्रस्तावों में विशेष रूप से 20 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे युवाओं और छात्रों पर दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग की कड़े शब्दों में भर्त्सना की गई। प्रस्ताव में यह भी रेखांकित किया गया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान 100 से अधिक छात्र घायल हुए थे, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a), 19(1)(b) और अनुच्छेद 21 के तहत देश के नागरिकों को मिलने वाले मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। इस बैठक के माध्यम से मुस्लिम नेताओं ने पूरे घटनाक्रम की एक स्वतंत्र और समय सीमा के भीतर न्यायिक जांच कराने तथा लाठीचार्ज के जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।



















